![]()
पंजाब सरकार भले ही पराली प्रबंधन को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। तरनतारन जिले के कच्चा पक्का और भैणी मंसा सिंह गांवों में दोपहर 2 बजे ही किसान खुलेआम खेतों में पराली जलाते नजर आ रहे हैं। खेतों से उठ रहा घना धुआं आसपास के गांवों और मुख्य सड़कों तक फैल गया है, जिससे पूरे इलाके की हवा जहरीली हो गई है। इसका सबसे बुरा असर बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों पर पड़ रहा है। कागजों में दावे, हकीकत में जल रही पराली कृषि विभाग और प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाने, पराली न जलाने की अपील करने और पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह तंबाकू का सेवन सेहत को नुकसान पहुंचाता है, ठीक उसी तरह खुलेआम पराली जलाकर पूरे समाज के स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरे में डाला जा रहा है। दिनदहाड़े उठती आग ने उठाए सवाल दिन के उजाले में बेखौफ जलाई जा रही पराली ने प्रशासनिक निगरानी और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इस लापरवाही के बारे में कृषि विभाग के अधिकारी भूपिंदर सिंह से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और जल्द ही इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
Source link
तरनतारन में पराली जलाने का सिलसिला जारी:सरकारी दावे खोखले, दोपहर 2 बजे ही खेतों में लगा रहे आग; धुएं से सांस लेने में दिक्कत
