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टोंक| बग्घी खाना परिसर में संचालित महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल की करीब 150 साल पुरानी इमारत की जर्जर स्थिति पर एक साल बाद भी सुधार नहीं हुआ है। स्कूल में पिछले वर्ष एक कमरे को खतरनाक घोषित कर उस पर चेतावनी का निशान लगाया गया था, लेकिन मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। स्कूल प्रशासन के अनुसार परिसर में पांच कमरों में नौ कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। शाला प्रधान ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग और अधिकारियों को पहले ही सूचना दी गई थी। करीब 22 लाख रुपये का प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन अब तक राशि आवंटित नहीं हुई। परिसर में पानी निकासी की व्यवस्था भी कमजोर बताई गई है। तेज बारिश के दौरान कक्षा-कक्षों में पानी भरने की शिकायत सामने आई है। पूर्व पार्षद शकील मियां के अनुसार कई बार पानी भरने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। विद्यालय स्टाफ ने नगर परिषद में शिविर के दौरान शिकायत दर्ज कराई थी, पर कार्रवाई नहीं हुई। यह परिसर केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। यहां महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के साथ एक बालिका सीनियर सेकंडरी स्कूल और एक उच्च प्राथमिक स्कूल भी संचालित होते हैं। तीनों स्कूलों की इमारतें जर्जर बताई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत और नए निर्माण की जरूरत लंबे समय से बनी हुई है। झालावाड़ और ककोड़ में स्कूल भवन गिरने की घटनाओं के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जर्जर स्कूलों की सूची पर काम शुरू किया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर आरोप है कि 60 से अधिक स्कूलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। जानकारी के अनुसार केवल छह विद्यालयों के लिए करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई, जिसमें टोंक शहर के स्कूल शामिल नहीं हैं। कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष इम्तियाज खान ने बताया कि इस मुद्दे को विधायक सचिन पायलट तक भी पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रोग्रेसिव वेलफेयर सोसायटी ने नगर परिषद से परिसर के बाहर पार्किंग स्थल विकसित करने की मांग भी रखी है, ताकि सफाई व्यवस्था सुधरे और मरीजों, स्कूल आने-जाने वालों तथा अन्य सेवाओं को सुविधा मिल सके। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और राशि मिलने के बाद ही काम हो पाएगा।
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पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बढ़ी परेशानी, जिम्मेदार विभागों ने अब तक नहीं ली सुध
