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नहीं बदले हालात:वैवाहिक हिंसा में कमी, पर महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा मारपीट पति ही कर रहे




प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ वैवाहिक हिंसा के मामलों में कमी जरूर आई है, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक ही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5 और 6) के अनुसार प्रदेश में विवाहित महिलाओं के खिलाफ होने वाली वैवाहिक हिंसा में 6.6% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बीते तीन वर्षों में यह आंकड़ा 28.0% से घटकर 21.4% पर आ गया है। लेकिन इस सुधार के पीछे एक स्याह पहलू यह भी है कि महिलाओं के लिए उनका अपना घर और सबसे करीबी रिश्ता ही सबसे असुरक्षित बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष की आयु के बाद प्रताड़ना का सामना करने वाली प्रदेश की विवाहित महिलाओं ने सबसे अधिक (90.8%) हिंसा अपने पति से ही झेली है। इससे भी अधिक चिंताजनक स्थिति समाज की संवेदनशीलता पर सवाल उठाती है। रिपोर्ट बताती है कि गर्भावस्था जैसी नाजुक स्थिति में भी महिलाओं पर रहम नहीं खाया जा रहा है। पिछले तीन साल में इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और गर्भवती महिलाओं के साथ मारपीट का आंकड़ा 2.3% पर स्थिर बना हुआ है। पहले 28 प्रतिशत विवाहिताएं लड़ाई झगड़े से परेशान थीं, अब 21.4 फीसदी कोख में पल रहे बच्चे पर भी नहीं रहम: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा सिर्फ धक्का-मुक्की तक सीमित नहीं है। सर्वे (NFHS-5) के अनुसार, 25% को थप्पड़ मारे जाते हैं। 12% को धक्का दिया या झकझोरकर या कोई वस्तु फेंककर मारी गई। वहीं, 7% को मुक्के-लात मारकर घसीटा गया और 2% मामलों में गला घोंटने या जलाने की कोशिश की गई। अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है लाड़लियां: अविवाहित महिलाओं और शादी के बाद मायके आने वाली महिलाओं को भी घर में शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं के साथ होने वाली शारीरिक हिंसा के 10.6% मामलों में मां/सौतेली मां, 8.5% में पिता/सौतेले पिता और 4.8% मामलों में भाई-बहन जिम्मेदार हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पत्नी ज्यादा असुरक्षित: हिंसा का स्वरूप गांव और शहर में अलग-अलग नजर आता है। वैवाहिक हिंसा के मामले ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं। सर्वे के आंकड़ों की माने तो प्रदेश के गांवों में 22.6% विवाहित महिलाओं ने वैवाहिक हिंसा झेलने की बात कही है, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 17.7% है। आश्चर्य: हर तीसरी महिला इसे सही मानती: महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता का भी सवाल है। प्रदेश की 34% महिलाओं का मानना है कि कुछ परिस्थितियों में पति द्वारा पत्नी की पिटाई करना जायज है। हैरानी की बात यह है कि 28% पुरुष भी इससे सहमत हैं। सर्वे के मुताबिक, 12 या उससे अधिक वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद भी 22 फीसदी महिलाएं और 20% पुरुष पत्नी की पिटाई को सही ठहराते हैं।



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