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Bihar Ebola Virus Alert: Health Department Seeks Hospital Reports


बिहार सरकार इबोला वायरस रोग (Ebola Virus Disease) के संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गई है।

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भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इबोला से निपटने की तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है।

इसके तहत राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज, प्रमुख अस्पताल, आयुष संस्थान और सभी जिलों के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों से निर्धारित प्रारूप में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। इसमें सभी संस्थानों को अपनी तैयारियों की अद्यतन जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।

विभाग का उद्देश्य राज्यभर में उपलब्ध संसाधनों, स्वास्थ्यकर्मियों की तैयारियों और आपदा प्रबंधन की स्थिति का आकलन करना है। इसका लक्ष्य किसी भी संभावित आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी निर्देश एम्स पटना, आईजीआईएमएस, पीएमसीएच सहित राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, आयुष मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों और सभी सिविल सर्जन कार्यालयों को भेजे गए हैं। सभी संस्थानों को एक निर्धारित फॉर्मेट में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

विभाग ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। सभी जिलों से प्राप्त जानकारी के आधार पर बिहार की समेकित रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार को भेजी जाएगी।

PPE किट और बॉडी बैग की उपलब्धता की होगी समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से उपलब्ध संसाधनों का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि संबंधित संस्थान में कुल कितनी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं और उनमें से कितने संस्थानों में पर्याप्त मात्रा में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट उपलब्ध हैं। इसके अलावा अस्पतालों को यह भी बताना होगा कि वर्तमान में उनके पास कितनी पीपीई किट और बॉडी बैग उपलब्ध हैं। यदि संसाधनों की कमी है तो अतिरिक्त आवश्यकता कितनी है और उसकी पूर्ति के लिए खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है या नहीं, इसकी जानकारी भी अनिवार्य रूप से देनी होगी।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि किसी भी संक्रामक बीमारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सुरक्षा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी कारण इन संसाधनों का अलग से मूल्यांकन किया जा रहा है।

स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल पर रहेगा विशेष फोकस

केवल उपकरणों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की तैयारी का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। विभाग ने सभी संस्थानों से संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण (Infection Prevention and Control) से जुड़े प्रशिक्षण की जानकारी मांगी है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख करना होगा कि डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को पीपीई किट के सही उपयोग का प्रशिक्षण कब दिया गया था। साथ ही संस्थान में अंतिम बार मॉक ड्रिल कब आयोजित की गई, इसकी तारीख भी देनी होगी।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि किसी भी आपदा की स्थिति में केवल संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि प्रशिक्षित मानव संसाधन और समय-समय पर होने वाले अभ्यास (मॉक ड्रिल) भी उतने ही आवश्यक हैं। इससे किसी भी संभावित संक्रमण की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में आसानी होती है।

केंद्र सरकार को भेजी जाएगी

विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में सही एवं अद्यतन जानकारी जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिलों और अस्पतालों से प्राप्त सभी सूचनाओं का विश्लेषण करने के बाद राज्य स्तर पर एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद यह रिपोर्ट भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजी जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस समीक्षा का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिहार में फिलहाल इबोला वायरस संक्रमण का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। सरकार एहतियात के तौर पर तैयारियों की समीक्षा कर रही है ताकि भविष्य में यदि किसी प्रकार की चुनौती सामने आती है तो स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह तैयार रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संक्रामक बीमारी के प्रसार को रोकने में शुरुआती तैयारी, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और मजबूत निगरानी व्यवस्था सबसे प्रभावी उपाय होते हैं। इसी रणनीति के तहत बिहार सरकार ने समय रहते सभी स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारियों का आकलन शुरू कर दिया है।



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