Comedian Gaurav Kapoor Stomach Worms; Symptoms Causes Prevention


  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Comedian Gaurav Kapoor Stomach Worms; Symptoms Causes Prevention | Roundworms Hookworms Tapeworms

32 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

  • कॉपी लिंक

पिछले दिनों कॉमेडियन गौरव कपूर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। इसमें उनकी पत्नी ने बताया कि पेट दर्द और एसिडिटी की शिकायत के बाद जांच में गौरव के पेट में कीड़े मिले।

दरअसल, आंतों में पैरासाइटिक कीड़ों का संक्रमण एक कॉमन प्रॉब्लम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 1.5 अरब लोग मिट्टी से फैलने वाले पैरासाइटिक कीड़ों से संक्रमित हैं।

वहीं, दक्षिण भारत में हुए ‘डीवॉर्म 3’ ट्रायल में 20% लोगों के पेट में कीड़े निकले।

इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में पेट में कीड़े की समस्या पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके क्या लक्षण हैं?
  • इससे बचने के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट- डॉ. सुकृत सिंह सेठी, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेप्टोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांटेशन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

सवाल- पेट में कीड़े होने का क्या मतलब है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • इसका मतलब है कि आंतों में पैरासाइट्स (परजीवी कीड़े) मौजूद हैं या उनका संक्रमण हो गया है।
  • ये परजीवी आंतों में रहकर शरीर से पोषक तत्व लेते हैं और अपनी संख्या बढ़ाते हैं।
  • मेडिसिन की भाषा में इसे ‘इंटेस्टाइनल वर्म इंफेस्टेशन’ या ‘हेलमिंथियासिस’ कहा जाता है।
  • इसके कारण पेट दर्द, दस्त, गैस, पेट फूलना, कमजोरी और वजन कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • कुछ मामलों में लंबे समय तक संक्रमण रहने पर एनीमिया, पोषक तत्वों की कमी और कुपोषण जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

सवाल- पेट में कीड़े क्यों होते हैं?

जवाब- इसकी सबसे बड़ी वजह दूषित भोजन, गंदा पानी और हाइजीन की कमी है। पैरासाइट के अंडे या लार्वा भोजन, पानी, मिट्टी या दूषित हाथों के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। इसके बाद वे आंतों में पनपने लगते हैं और इन्फेक्शन का कारण बनते हैं।

सवाल- पेट में कितनी तरह के कीड़े हो सकते हैं?

जवाब- पेट में कई तरह के कीड़े हो सकते हैं। ये सभी पैरासाइट होते हैं, लेकिन इनके शरीर में प्रवेश करने का तरीका और शरीर पर असर अलग-अलग होता है।

  • कुछ पैरासाइट पोषण की कमी पैदा करते हैं।
  • कुछ खून की कमी (एनीमिया) का कारण बनते हैं।
  • जबकि कुछ पेट और आंतों से जुड़ी समस्याएं बढ़ाते हैं।

पेट में होेने वाले कीड़ों की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या इन कीड़ों के लक्षण भी अलग होते हैं?

जवाब- हां, अलग-अलग कीड़ों के लक्षण अलग हो सकते हैं, क्योंकि हर पैरासाइट शरीर को अलग तरीके से प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए-

  • पिनवर्म इन्फेक्शन में रात के समय एनस के आसपास खुजली होती है।
  • हुकवर्म इन्फेक्शन से शरीर में खून की कमी हो सकती है। इससे एनीमिया, कमजोरी और थकान हो सकती है।
  • राउंडवर्म इन्फेक्शन से पेट दर्द, मतली और डाइजेस्टिव इश्यूज हो सकते हैं।
  • टेपवर्म इन्फेक्शन से वजन घट सकता है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
  • वहीं कुछ पैरासाइट इन्फेक्शन में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते।

सवाल- क्या ऐसा हो सकता है कि पेट में कीड़े हों और बाहर से कोई लक्षण न दिखे?

जवाब- ऐसा तब हो सकता है, जब शरीर में कीड़ों की संख्या कम हो। संक्रमण की शुरुआत में भी कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कुछ मामलों में व्यक्ति को केवल पेट में हल्की असहजता, थकान या भूख में मामूली बदलाव महसूस होता है। इसे वह सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देता है।
  • कई लोगों को संक्रमण का पता तब चलता है, जब वे किसी दूसरी समस्या के लिए जांच कराते हैं।

सवाल- लाइफस्टाइल से जुड़ी कौन-सी आदतें पेट में कीड़ों का रिस्क बढ़ाती हैं?

जवाब- हाइजीन की अनदेखी जैसी रोजमर्रा की कई आदतें पेट में कीड़ों का रिस्क बढ़ाती हैं। ग्राफिक में सभी आदतें देखिए-

सवाल- क्या हाइजीन का पूरा ख्याल रखने और RO का पानी पीने वाले लोगों के पेट में भी कीड़े हो सकते हैं?

जवाब- हां, हो सकते हैं, क्योंकि पैरासाइट हमारे शरीर में भोजन, मिट्टी, जानवर या किसी भी दूसरे सोर्स से पहुंच सकते हैं। लेकिन हाइजीन का ख्याल रखने पर रिस्क कम हो जाता है।

सवाल- किन लोगों को पेट में कीड़े होने का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- पेट में कीड़े किसी भी व्यक्ति को हो सकते हैं। लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- पेट में कीड़े होने के संकेत क्या हैं?

जवाब- हर व्यक्ति में इसके संकेत अलग हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पेट में किस तरह का पैरासाइट है, उसकी संख्या कितनी है और इन्फेक्शन कितना गंभीर है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए-

सवाल- एक बार शरीर में पहुंचने के बाद कीड़े कितने समय तक जिंदा रह सकते हैं?

जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में किस तरह का पैरासाइट मौजूद है। सभी कीड़ों का लाइफ स्पैन एक जैसा नहीं होता।

उदाहरण के लिए-

  • पिनवर्म आमतौर पर कुछ हफ्तों तक जीवित रहते हैं।
  • राउंडवर्म 1 से 2 साल तक जीवित रह सकते हैं।
  • कुछ टेपवर्म उचित इलाज न मिलने पर कई सालों तक आंतों में बने रह सकते हैं।

सवाल- क्या ये कीड़े पेट से शरीर के अन्य हिस्सों और ब्रेन तक भी पहुंच सकते हैं?

जवाब- हां, कुछ पैरासाइट ब्लड के जरिए लिवर, लंग्स, मसल्स, आंखों और ब्रेन तक पहुंच सकते हैं। इनके ब्रेन में पहुंचने से ये समस्याएं हो सकती हैं-

  • सिरदर्द
  • दौरे
  • चक्कर आना
  • अन्य न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स

हालांकि ये बहुत रेयर होता है। ज्यादातर लोगों में इन्फेक्शन आंतों तक ही सीमित रहता है।

सवाल- अगर प्रेग्नेंसी के समय पेट में कीड़े हों तो क्या उसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है?

जवाब- हां, प्रेग्नेंसी के दौरान मां और बच्चे दोनों को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। ऐसे में गंभीर संक्रमण होने पर मां में कमजोरी बढ़ सकती है और बच्चे के विकास पर भी असर पड़ सकता है।

इसलिए अगर प्रेग्नेंसी के दौरान पेट में कीड़ों का शक हो या संक्रमण की पुष्टि हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

सवाल- डॉक्टर कैसे पता लगाते हैं कि पेट में कीड़े हैं?

जवाब- डॉक्टर आमतौर पर कुछ टेस्ट की मदद से इसकी पुष्टि करते हैं, जैसेकि-

  • स्टूल टेस्ट– इसमें स्टूल के सैंपल की जांच करके पैरासाइट, उनके अंडों या उनसे जुड़े संकेतों को खोजा जाता है।
  • ब्लड टेस्ट– कुछ मामलों में ब्लड टेस्ट किया जाता है। इससे शरीर में इन्फेक्शन के संकेत, एनीमिया या कुछ विशेष पैरासाइट्स के प्रति शरीर के रिस्पॉन्स का पता चलता है।
  • जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई (MRI) जैसे टेस्ट भी कराए जाते हैं।

सवाल- पेट के कीड़ों का इलाज क्या है?

जवाब- इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि इन्फेक्शन किस तरह के पैरासाइट की वजह से हुआ है। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर एंटीपैरासिटिक दवाएं देते हैं, जो कीड़ों को मारने या शरीर से बाहर निकालने का काम करती हैं।

सवाल- क्या इंसानों को भी डीवार्मिंग की जरूरत होती है?

जवाब- हां, कुछ परिस्थितियों में इंसानों को भी डीवॉर्मिंग की जरूरत पड़ सकती है। वैसे साल में एक बार डॉक्टर की सलाह से T Zentel जैसी डिवार्मिंग दवा ले लेनी चाहिए। लेकिन याद रखें, फैमिली डॉक्टर से पूछे बिना न खाएं।

सवाल- अगर पेट में कीड़े हों तो क्या डॉक्टर कुछ खास डाइट रेकमंड करते हैं?

जवाब- हां, पेट में कीड़े होने पर डॉक्टर आमतौर पर पौष्टिक और सुपाच्य डाइट लेने की सलाह देते हैं। इसका मकसद शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करना और रिकवरी में मदद करना होता है।

क्या खाएं?

  • दाल, अंडा, दूध, दही और अन्य प्रोटीन युक्त फूड्स।
  • ताजे फल और हरी सब्जियां।
  • साबुत अनाज और फाइबर रिच फूड।
  • पर्याप्त पानी और अन्य लिक्विड चीजें।
  • घर का बना ताजा भोजन।

क्या न खाएं?

  • खुले में रखा खाना।
  • अधपका मांस, मछली और सीफूड।
  • बिना धोए फल और सब्जियां।
  • तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड।
  • दूषित पानी

सवाल- पेट के कीड़ों से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इससे काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। ग्राफिक में देखिए-

पेट के कीड़ों से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब

सवाल- क्या ज्यादा मिठाई खाने से पेट में कीड़े हो जाते हैं?

जवाब- नहीं, पेट के कीड़े दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलते हैं।

सवाल- क्या हर पेट दर्द की वजह पेट के कीड़े होते हैं?

जवाब- नहीं, पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसेकि गैस, अपच, इन्फेक्शन या पाचन संबंधी दूसरी समस्याएं।

सवाल- क्या घरेलू नुस्खों से पूरी तरह इलाज संभव है?

जवाब- नहीं, कीड़ों को खत्म करने के लिए आमतौर पर दवा की जरूरत होती है।

सवाल- क्या डी-वॉर्मिंग सिर्फ बच्चों के लिए जरूरी है?

जवाब- नहीं, जरूरत पड़ने पर वयस्कों को भी डॉक्टर की सलाह से डी-वॉर्मिंग करानी पड़ सकती है।

……………………

ग्राफिक्स- विपुल शर्मा

……………………..

ये खबर भी पढ़ें….

फिजिकल हेल्थ- पैरों में दर्द, जलन इग्नोर न करें:हो सकता है एरिथ्रोमेलैल्जिया, डॉक्टर से जानें इस दुर्लभ बीमारी के बारे में सबकुछ

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक 16 साल का लड़का इकबाल शेख घंटों तालाब के पानी में खड़ा रहता है। वजह है, उसके शरीर में होने वाली तेज जलन और गर्माहट। पानी से बाहर आते ही जलन बढ़ जाती है। ठंडे पानी में रहने से राहत मिलती है। डॉक्टरों का कहना है कि उसे एरिथ्रोमेलैल्जिया है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *