दुर्ग-भिलाई6 मिनट पहले
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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के पेपर लीक मामले में दुर्ग के भारती कॉलेज के लेक्चरर समेत 6 आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब भारती कॉलेज प्रबंधन ने भी मामले में कार्रवाई की है। कॉलेज प्रबंधन ने लापरवाही बरतने के आरोप में प्राचार्य डॉ. एके दुबे को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
वहीं, पेपर लीक के मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया को भी नौकरी से निकाल दिया गया है। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद कुछ छात्रों ने पेपर लीक को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। एग्रीकल्चर के कुछ छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रश्नपत्र परीक्षा से कुछ घंटे पहले नहीं, बल्कि करीब एक दिन पहले ही छात्रों तक पहुंच जाता था।
छात्रों के मुताबिक, पेपर सुबह करीब 11 बजे तक उनके पास आ जाता था। दावा है कि यह मामला सिर्फ कीट विज्ञान के प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं था। पूरे सेमेस्टर के कई विषयों के प्रश्नपत्र PDF के रूप में छात्रों के बीच शेयर किए जा रहे थे। एक पेपर की कीमत करीब 5 हजार रुपए तक बताई जाती थी।
दावा है कि कई छात्र मिलकर पेपर खरीदने के लिए पैसे जुटाते थे। इसमें कोई छात्र 1-2 हजार रुपए तक देता था। रकम पूरी होने के बाद प्रश्नपत्र की PDF WhatsApp के जरिए छात्रों के बीच आगे भेज दी जाती थी। हालांकि, छात्रों की ओर से किए गए इन दावों की पुलिस जांच में पुष्टि होना अभी बाकी है।
देखिए पहले ये तस्वीरें-

पुलिस ने मास्टरमाइंड प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कैश और मोबाइल जब्त किया है।

पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया।
1 हजार से 5 हजार तक में बिकता था पेपर
कुछ छात्रों ने बताया कि उन्हें भी दो-तीन पेपर खरीदने के ऑफर मिले थे, लेकिन उन्होंने पेपर नहीं खरीदा। छात्रों के मुताबिक, एक पेपर की कीमत 1 हजार से 5 हजार रुपए तक होती थी। कुछ प्रश्नपत्र पर्सनल फोन और मैसेज के जरिए भेजे जाते थे।
थर्ड ईयर के पेपर के लिए भी छात्रों को उनके दोस्तों के जरिए कॉल किए जाते थे। इतना ही नहीं, कॉलेज के कुछ चुनिंदा और भरोसेमंद छात्रों से कहा जाता था कि वे पेपर लेकर आगे दूसरे छात्रों को बेचें और पैसे कमाएं।
परीक्षा से पहले ही छात्रों तक पहुंच जाते थे प्रश्नपत्र
बताया जा रहा है कि इस सत्र में करीब 10-11 विषयों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। आरोप है कि इनमें से कई प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। जिस प्रश्नपत्र के बड़े स्तर पर फैलने के बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द की, फिलहाल कार्रवाई उसी मामले में हुई है।
हालांकि, छात्रों का दावा है कि इससे पहले हो चुकी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी परीक्षा से पहले ही कुछ छात्रों के पास पहुंच गए थे। एक अन्य छात्र के मुताबिक, परीक्षा के दौरान एक छात्र नकल की पर्ची के साथ पकड़ा गया था। उसके खिलाफ नकल का मामला बनाया जा रहा था।
इसके बाद कथित तौर पर उस छात्र ने अगले दिन होने वाले प्रश्नपत्र की तस्वीर वायरल कर दी। तस्वीर के पीछे भारती कॉलेज की सीढ़ियां दिखाई दे रही थीं। इसके बाद कॉलेज से प्रश्नपत्र बाहर जाने का शक गहराया और मामले की जांच आगे बढ़ी।

NSUI का दावा- 2022 और 2024 में भी पेपर लीक
एनएसयूआई रायपुर के जिला अध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी ने दैनिक भास्कर डिजिटल से बातचीत में दावा किया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक की शिकायत पहली बार नहीं आई है।
उनके मुताबिक, 2022 और 2024 में भी पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। दोनों बार विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी छात्रों के जरिए मिली थी।
प्रशांत गोस्वामी का दावा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही छात्रों के बीच वाट्सऐप पर पहुंच जाते थे और उन्हें बेचने के लिए पैसे की मांग की जाती थी। जो छात्र पैसे दे पाते थे, वे प्रश्नपत्र खरीद लेते थे, जबकि दूसरे छात्र इसकी जानकारी सामने लाते थे।
उनके मुताबिक, 2024 में मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति भी बनाई गई थी। उस समय प्रश्नपत्र को अनुमानित प्रश्नपत्र बताया गया था, लेकिन छात्रों का दावा था कि वह पहले ही बाहर आ चुका था।
मामला सोशल मीडिया तक पहुंचा, तब हुई पुलिस कार्रवाई
प्रशांत गोस्वामी के मुताबिक, 2026 में मामला पहले के मुकाबले बड़े स्तर पर सामने आया। कीट विज्ञान के प्रश्नपत्र के बाद दूसरे विषयों के पेपर को लेकर भी छात्रों के बीच चर्चा शुरू हो गई।
उनका दावा है कि कुछ प्रश्नपत्रों को ‘इंपोर्टेंट क्वेश्चन’ बताकर वाट्सऐप पर भेजा जा रहा था। बाद में परीक्षा में उन्हीं सवालों के आने की बात सामने आई। उनका कहना है कि कुछ मामलों में सवालों का क्रम भी वही था।

कॉलेज ने प्राचार्य को भी नौकरी से निकाला
इस मामले में भारती कृषि महाविद्यालय प्रबंधन ने प्राचार्य डॉ. एके दुबे और सहायक व्याख्याता योगेश सोनकेसरिया दोनों को नौकरी से निकाल दिया है।
कॉलेज डायरेक्टर सुशील चंद्राकर ने बताया कि योगेश प्राध्यापक या उप-प्राचार्य नहीं, बल्कि सहायक व्याख्याता था। वह 2019 से कॉलेज में काम कर रहा था। पिछले एक साल से उसे प्रश्नपत्र लाने और जमा करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
प्रश्नपत्र सुरक्षित रखना प्राचार्य की जिम्मेदारी
डायरेक्टर ने बताया कि विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र आने के बाद उसे सुरक्षित रखना और बंद करके रखना प्राचार्य की जिम्मेदारी थी। प्रश्नपत्र को सुरक्षित जगह पर रखा जाना था, लेकिन इसमें लापरवाही हुई।
इसी वजह से कॉलेज प्रबंधन ने प्राचार्य पर भी कार्रवाई की। यानी कॉलेज ने सिर्फ प्रश्नपत्र बाहर ले जाने वाले सहायक व्याख्याता पर ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे प्राचार्य को भी जिम्मेदार माना।
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