48 मिनट पहले
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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.4% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। फिच के मुताबिक जून तिमाही में देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8% रही थी, जिससे भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का पता चलता है।
हालांकि, रेटिंग एजेंसी का यह भी अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई और कम बारिश के असर को देखते हुए RBI आगामी अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है।
इससे पहले ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया था।

जून तिमाही में 7.8% की ग्रोथ से मिला बूस्ट
फिच रेटिंग्स के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने काफी मजबूती दिखाई है। जून तिमाही में 7.8% की जीडीपी ग्रोथ दर इसका सबूत है। हालांकि, एजेंसी का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की बाकी बची तिमाहियों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
अक्टूबर में RBI बढ़ा सकता है 0.25% ब्याज दर
फिच ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिया है कि बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की दिक्कतों को देखते हुए RBI अक्टूबर 2026 की बैठक में पॉलिसी रेट्स को 0.25% बढ़ाकर 5.5% कर सकता है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी यहीं नहीं रुकेगी। 2027 की शुरुआत तक ब्याज दरें बढ़कर 5.75% हो सकती हैं, जिसके बाद 2028 में इनके वापस घटकर 5.5% पर आने की संभावना है।
प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और क्रेडिट ग्रोथ में तेजी
भले ही अर्थव्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर से इन्वेस्टमेंट की स्थिति काफी बेहतर दिख रही है। फिच को उम्मीद है कि इस साल प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में 10% से अधिक की बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, जुलाई में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ (गैर-खाद्य ऋण) भी सालाना आधार पर 19% दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इकोनॉमी की रफ्तार धीमी होने के 3 मुख्य कारण
फिच ने आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ रेट के थोड़ा सुस्त पड़ने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:
- PMI डेटा में नरमी: मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों के ही परफॉर्मेंस इंडिकेटर (PMI) में विस्तार की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है।
- कमजोर मानसून: सामान्य से कम बारिश का असर खेती और ग्रामीण इलाकों की मांग (Rural Demand) पर पड़ेगा।
- महंगाई का दबाव: बढ़ती महंगाई आम लोगों की असली कमाई (Real Income) पर असर डालेगी, जिससे कंज्यूमर खर्च में कमी आ सकती है।
S&P और मूडीज ने भी जताया 7% की ग्रोथ का अनुमान
फिच से पहले अन्य वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। बुधवार को S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की ग्रोथ रेट 7% रहने का अनुमान लगाया है। पिछले हफ्ते रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7% रहने का ही अनुमान जताया था। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई थी।

