20 मिनट पहले
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विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के चार बजे भस्म आरती के दौरान मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग अर्पित कर श्रृंगार किया गया।
हरि ओम का जल अर्पित करने और कपूर आरती के बाद भगवान का श्रृंगार पूरा किया गया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढककर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। मोगरे और गुलाब के सुगंधित फूलों से भगवान का श्रृंगार किया गया। फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।


