- Hindi News
- Lifestyle
- Newborn Baby Birthmark Signs; Infantile Hemangiomas Symptoms & Treatment Explained
8 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
- कॉपी लिंक

कुछ नवजात शिशुओं में जन्म के बाद स्किन पर लाल, बैंगनी या भूरे रंग का उभरा हुआ दाग दिखाई देता है। अक्सर पेरेंट्स इसे देखकर घबरा जाते हैं। यह लक्षण ‘इन्फैंटाइल हेमेंजियोमा’ का संकेत हो सकता है, जो एक नॉन-कैंसरस ट्यूमर है। इसे ‘स्ट्रॉबेरी बर्थमार्क’ भी कहा जाता है।
यह जन्म के कुछ सप्ताह बाद दिखाई देता है और तेजी से बढ़ता है। अगर यह आंख, गले या रीढ़ के पास हो तो परेशानी बढ़ जाती है।
मई, 2022 में ‘फ्रंटियर इन फॉर्माकोलॉजी’ जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया में एक वर्ष की उम्र तक लगभग 5-10% बच्चों को हेमेंजियोमा होता है।
साल 2003, में ‘इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी, वेनेरियोलॉजी एंड लेप्रोलॉजी’ में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, भारत में हेमेंजियोमा की दर 4.3% है। ये दर कई देशों की तुलना में ज्यादा है। हालांकि अच्छी बात ये है कि सही समय पर पहचान, निगरानी और इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है।
इसलिए आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में हम हेमेंजियोमा के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- हेमेंजियोमा से क्या कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं?
- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. मनीष मित्तल, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- हेमेंजियोमा (Hemangioma) क्या है?
जवाब- विस्तार से पॉइंटर्स में समझिए–
- हेमेंजियोमा ब्लड वेसल्स से बना एक नॉन-कैंसरस ट्यूमर या बर्थमार्क है।
- यह तब बनता है, जब छोटी ब्लड वेसल्स असामान्य रूप से बढ़कर एक जगह गुच्छे की तरह जमा हो जाती हैं।
- यह आमतौर पर जन्म के कुछ दिनों या हफ्तों बाद शिशुओं की स्किन पर लाल या बैंगनी उभरे हुए निशान के रूप में दिखाई देता है।
- ज्यादातर मामले जन्म के पहले साल में तेजी से बढ़ते हैं और फिर धीरे-धीरे अपने आप ठीक हो जाते हैं।
- अगर यह आंख, नाक, मुंह या अन्य सेंसिटिव ऑर्गन्स के पास हो, बहुत बड़ा हो जाए या ब्लीडिंग और इन्फेक्शन जैसी समस्याएं पैदा करे, तो इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
सवाल- हेमेंजियोमा क्याें होता है?
जवाब- इसके सटीक कारण का पता अभी नहीं चल पाया है। माना जाता है कि यह ब्लड वेसल्स की कोशिकाओं के जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण होता है।
- रिसर्च के मुताबिक, प्री-मैच्योर बर्थ, जन्म से कम वजन वाले शिशुओं और लड़कियों में इसका रिस्क ज्यादा देखा गया है।
- यह किसी संक्रमण, चोट या माता-पिता की गलती के कारण नहीं होता।
सवाल- क्या हेमेंजियोमा जन्मजात भी होता है?
जवाब- हां, कुछ बच्चों में यह जन्म के समय मौजूद होता है। इसे ‘कंजेनिटल हेमेंजियोमा’ कहा जाता है। हालांकि अधिकतर मामलों में यह जन्म के पहले कुछ हफ्तों में दिखाई देता है। कुछ जन्मजात हेमेंजियोमा समय के साथ अपने-आप ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ बने रह सकते हैं।
सवाल- जन्म के कितने समय बाद हेमेंजियोमा के लक्षण उभरने शुरू होते हैं? किन संकेतों से पता चलता है कि बच्चे को हेमेंजियोमा हो सकता है?
जवाब- इसके लक्षण अक्सर जन्म के कुछ समय बाद दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में यह जन्म के पहले वर्ष में भी डेवलप होता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके संकेतों को समझिए-

सवाल- हेमेंजियाेमा शरीर के किन हिस्सों में हो सकता है?
जवाब- ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन कुछ खास हिस्सों में यह ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर कोई बच्चा हेमेंजियोमा के साथ पैदा हुआ है तो इस कारण उसे क्या हेल्थ कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं?
जवाब- हेमेंजियोमा के कारण आमतौर पर कोई खास समस्या नहीं होती, जब तक वह शरीर के किसी सेंसिटिव हिस्से में न हो।
- आंखों के आसपास होने पर यह नाजुक टिश्यू पर दबाव डाल सकता है और उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
- इससे विजन संबंधी समस्याएं जैसे एम्ब्लियोपिया (लेजी आई), ग्लूकोमा या मोतियाबिंद का रिस्क हो सकता है।
- ठुड्डी या गर्दन पर होने पर यह श्वासनली पर दबाव डालकर सांस रुकने जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
- रीढ़ के आसपास बढ़ने पर यह स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचा सकता है।
- अगर यह शरीर के अंदर (खासकर लिवर में) हो तो इंटरनल ऑर्गन्स के काम को बाधित कर सकता है।
सवाल- क्या हेमेंजियोमा जेनेटिक भी होता है? अगर माता–पिता को है तो क्या बच्चे को भी हो सकता है?
जवाब- हेमेंजियोमा जेनेटिक बीमारी नहीं है। यह ब्लड वेसल्स का एक नॉन-कैंसरस ट्यूमर है, जो ज्यादातर जन्म के बाद विकसित होता है, न कि जेनेटिक रूप से ट्रांसफर होता है। हालांकि बहुत रेयर मामलों में फैमिली पैटर्न देखा गया है। लेकिन यह सीधे तौर पर जेनेटिक नहीं है।
सवाल- वयस्कों में हेमेंजियोमा के लक्षण क्या होते हैं?
जवाब- वयस्कों में हेमेंजियोमा अक्सर स्किन पर छोटे, उभरे हुए लाल या बैंगनी धब्बे के रूप में दिखाई देता है। इसे ‘चेरी हेमेंजियोमा’ कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में इसमें दर्द नहीं होता, न ही कोई नुकसान होता है। 75 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 4 में से 3 लोगों में चेरी हेमेंजियोमा होता है। वयस्कों में ये अपने-आप खत्म नहीं होता है।
सवाल- किन लोगों को हेमेंजियोमा का रिस्क ज्यादा होता है?
जवाब- हेमेंजियोमा का जोखिम इन लोगों में ज्यादा होता है-
- नवजात शिशु
- समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) बच्चे
- कन्या शिशु (लड़कों की तुलना में ज्यादा)
- गोरी स्किन वाले लोगों में।

सवाल- डॉक्टर हेमेंजियोमा की पहचान (डायग्नोसिस) कैसे करते हैं?
जवाब- डॉक्टर हेमेंजियोमा की पहचान फिजिकल एग्जामिन से करते हैं। जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग जांच की जाती है, जिससे ब्लड फ्लो को देखा जा सके।
- कुछ मामलों में MRI की सलाह दी जा सकती है, ताकि अंदरूनी हिस्सों और संभावित जोखिमों की जांच हो सके।
- टिश्यू की जांच (बायोप्सी), ब्लड टेस्ट या जेनेटिक टेस्ट भी किए जा सकते हैं। हर मामले में इनकी जरूरत नहीं होती है।
सवाल- हेमेंजियोमा का इलाज क्या है?
जवाब- इसका इलाज हेमेंजियोमा के प्रकार, साइज और स्थान पर निर्भर करता है। कई मामलों में केवल निगरानी की जाती है, क्योंकि शिशुओं में यह समय के साथ छोटा हो सकता है। जरूरत पड़ने पर दवाएं दी जाती हैं। स्किन की ऊपरी लेयर पर बने हेमेंजियोमा के लिए लेजर ट्रीटमेंट किया जा सकता है। कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
जवाब- हेमेंजियोमा होने पर तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि कुछ स्थितियों में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। खासकर तब, जब इसमें बदलाव दिखे या यह किसी संवेदनशील हिस्से के पास हो। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

हेमेंजियोमा से जुड़े कुछ कॉमन सवाल-जवाब
सवाल- हेमेंजियोमा और साधारण बर्थमार्क में क्या अंतर है?
जवाब- हेमेंजियोमा ब्लड वेसल्स से बना एक प्रकार का बर्थमार्क है। यह अक्सर जन्म के बाद बढ़ता है और समय के साथ छोटा हो सकता है। वहीं साधारण बर्थमार्क आमतौर पर स्थिर रहता है और तेजी से नहीं बढ़ता है।
सवाल- क्या हेमेंजियोमा एक प्रकार का ट्यूमर है?
जवाब- हां, हेमेंजियोमा एक प्रकार का नॉन-कैंसरस ट्यूमर है। यह ब्लड वेसल्स से बनता है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता नहीं है।
सवाल- हेमेंजियोमा कितने प्रकार का होता है?
जवाब- हेमेंजियोमा के दो प्रमुख प्रकार होते हैं।
कैपिलरी हेमेंजियोमा: यह स्किन की ऊपरी परत में दिखाई देता है।
कैवर्नस हेमेंजियोमा: यह स्किन की अंदरूनी हिस्सों में बनता है।
सवाल- हेमेंजियोमा के कितने फेज होते हैं?
जवाब- बच्चों में हेमेंजियोमा के दो फेज होते हैं।
- पहला फेज प्रोलिफरेशन है, जिसमें यह तेजी से बढ़ता है। यह आमतौर पर जन्म के पहले 12 महीनों में होता है।
- दूसरा फेज इनवोल्यूशन है, जिसमें यह धीरे-धीरे छोटा होने लगता है। ज्यादातर बच्चों में यह 5 साल तक खत्म हो जाता है। लगभग 90% बच्चों में 9 साल तक पूरी तरह ठीक हो जाता है।
सवाल- क्या हेमेंजियोमा लाइफ थ्रेटनिंग भी हो सकता है?
जवाब- आमतौर पर हेमेंजियोमा लाइफ थ्रेटनिंग नहीं होता है। लेकिन अगर यह शरीर के किसी महत्वपूर्ण हिस्से जैसे आंख, गर्दन या इंटरनल ऑर्गन्स के पास हो तो गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। स्थिति की गंभीरता उसकी जगह और साइज पर निर्भर करती है।
………………………………
ये भी पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- हर एलर्जी मामूली नहीं:जान भी जा सकती है, डॉक्टर से जानें क्या है एनाफिलैक्सिस, एलर्जी है तो ये इंजेक्शन साथ रखें

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, दुनिया में लगभग 20-30% लोगों को कभी-न-कभी एलर्जी की समस्या होती है। इसमें आमतौर पर छींक, खुजली या आंखों से पानी आने जैसे लक्षण दिखते हैं। लेकिन कुछ लोगों में यही एलर्जी अचानक ‘एनाफिलैक्सिस’ का कारण बन सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

