मोहाली नेशनल हाईवे से गुजरते वाहन
नेशनल हाईवे-5 (NH-5) को चौड़ा करने के लिए ली गई जमीन के मुआवजे से जुड़े मामले में NHAI और केंद्र सरकार को मोहाली कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने NHAI की याचिका यह कहते हुए वापस कर दी कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार मोहाली कोर्ट के पास नहीं है। कोर्ट न
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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सामने जमीन ली गई थी
NH-5 को बनाने और सड़क को चौड़ा करने के लिए मोहाली जिले की खरड़ तहसील के घड़ूआं गांव में जमीन ली गई थी। यह जमीन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सामने है। लैंड एक्विजिशन कलेक्टर-कम-एसडीएम मोहाली ने 7 जनवरी 2019 को जमीन के मुआवजे का अवार्ड जारी किया था।
मुआवजे से असंतुष्ट जमीन मालिक राम शरण ने मामले को आर्बिट्रेटर-कम-कमिश्नर, रूपनगर डिवीजन के सामने रखा। कमिश्नर ने 16 अप्रैल 2021 को राम शरण के पक्ष में फैसला सुनाया। उन्होंने मामले को दोबारा एसडीएम मोहाली के पास भेजते हुए जमीन पर बने ढांचे आदि का फिर से मूल्यांकन कर नया मुआवजा तय करने के निर्देश दिए।
NHAI ने 2021 के आदेश को दी थी चुनौती
NHAI और केंद्र सरकार ने आर्बिट्रेटर के इस आदेश को चुनौती देने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत मोहाली कोर्ट में याचिका दायर की थी। NHAI का कहना था कि आर्बिट्रेटर ने अपने अधिकार से बाहर जाकर आदेश दिया है। वहीं, जमीन मालिक राम शरण ने इसका विरोध किया।

जमीन मालिक ने कहा, जमीन की कीमत ज्यादा
राम शरण की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उनकी जमीन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के ठीक सामने है। इसलिए इसकी व्यावसायिक कीमत काफी अधिक है। वह यहां स्टील फैब्रिकेटर का काम करते थे और इससे उन्हें करीब 5 लाख रुपए सालाना आय होती थी।
उनका कहना था कि जमीन पर बने 15 लाख रुपए से अधिक कीमत के ढांचे और भवन का मुआवजा तय नहीं किया गया। इसलिए आर्बिट्रेटर ने दोबारा मूल्यांकन के लिए मामला एसडीएम को भेजने का सही आदेश दिया था।
मोहाली कोर्ट ने याचिका क्यों लौटाई?
अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले के अधिकार क्षेत्र पर विचार किया। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में मध्यस्थता की कार्रवाई रूपनगर डिवीजनल कमिश्नर के कार्यालय में हुई थी और वहीं से फैसला जारी हुआ था। इसलिए इस मामले का अधिकार क्षेत्र रूपनगर का बनता है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिस जगह मध्यस्थता की कार्रवाई हुई हो, वहां की सक्षम अदालत को ही धारा 34 के तहत फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुनने का अधिकार होता है। इसलिए मोहाली कोर्ट ने माना कि इस मामले की सुनवाई उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
अब रूपनगर कोर्ट में दाखिल होगी याचिका
मोहाली कोर्ट ने NHAI की याचिका को खारिज करने के बजाय वापस कर दिया है, ताकि इसे उचित अधिकार क्षेत्र वाली रूपनगर कोर्ट में दाखिल किया जा सके। कोर्ट ने आर्बिट्रेटर से संबंधित रिकॉर्ड भी वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।
