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Pt. Vijayshankar Mehta Column | Tips To Improve Friendship & Relationships


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1 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

इन दिनों हमारी जीवनशैली में एक रिश्ता और अलग रूप ले रहा है- वह है मित्रता का। आज दोस्ती भी सोशल मीडिया के कारण इफेक्टेड है, लेकिन इमोशनली कनेक्टेड नहीं है। मित्रता टाइम-पास टूल बन गई। राम ने सुग्रीव से कहा था, मैं तुम्हें मित्रों के छह लक्षण बताता हूं। उसमें एक पंक्ति बोली थी- जे न मित्र दु:ख होहिं दुखारी।

जो लोग मित्र के दु:ख से दु:खी नहीं होते, वो किस बात के मित्र हैं? दोस्ती पर उस तरह से काम करें जैसे हम वर्जिश करते हैं तो एक दिन में परिणाम नहीं आता। प्रतिदिन मूल्यांकन करते हैं। ऐसे ही दोस्ती को लेकर प्रैक्टिस बढ़ाएं। रोज मित्रता को एक आकार दें- अपनेपन का, करुणा का, साथ निभाने का, मित्र को सही मार्ग दिखाने का, कठिन समय में अकेला न छोड़ने का।

और यदि बाहर की दुनिया में मित्र न मिलें तो दोस्ती के सारे प्रयोग घर में कर लें। आपका जीवनसाथी सबसे अच्छा मित्र हो सकता है। माता-पिता मित्र हो सकते हैं, भाई-बहन हो सकते हैं। लेकिन दोस्ती एक भाव है, एक स्वाद है- इसको चखिएगा जरूर।

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