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- Ramcharitmanas Tulsidas Jayanti | Vijayshankar Mehta Column On Literature
1 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
बहुत कम साहित्य ऐसे हैं, जो मनुष्य की रग-रग में बस गए हों, परिवारों की आचार-संहिता बन गए हों। ऐसे ही साहित्य का नाम है- रामचरितमानस। इसके रचयिता तुलसीदास जी की आज जयंती है। पिछले वर्षों में देखा गया है कि तुलसीदास को केवल एक साहित्यकार मानकर आयोजन कर दिए जाते हैं, जबकि वे मनोवैज्ञानिक ऋषि थे।
450 वर्ष बीत गए हैं रामचरितमानस की रचना हुए। 2 वर्ष, 7 महीने और 26 दिन लगे थे इसकी रचना में। 80 वर्ष के थे तुलसीदास उस समय। कौन कहता है उम्र बाधा बन जाती है। बल्कि होता तो यह है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, सृजन और निखर जाता है।
शब्दों के सृजन के कितने अनूठे रूप हो सकते हैं, रामचरितमानस इसका प्रमाण बन गया। तुलसीदास ने 126 वर्ष की उम्र पूरी की। सवा सौ वर्षों में इन्होंने हजारों साल का काम कर दिया। हम उनसे सबक लें कि परमात्मा के प्रति अटूट भरोसा रखें, योग्यता को लगातार निखारें और इस बात पर ध्यान दें कि उम्र की किस अवधि में कौन-से काम किए जाएं और कौन-से नहीं।

