जयपुर8 मिनट पहले
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प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटलों में फ्री दवाइयों का स्टॉक उपलब्ध करवाने वाली एजेंसी राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिडेट (RMSCL) में पिछले डेढ़ से दो साल में बड़ी अनियमितताएं हुई। खासकर दवाइयां खरीद के टेंडर और उन दवाइयों की गुणवत्ता जांच (QC) को लेकर भारी अनियमितताएं हैं।
रेट कॉन्ट्रेक्ट की टेंडर अवधि खत्म होने के बाद भी RMSCL ने एक-एक साल तक दोबारा नए रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं किए। इस लापरवाही के कारण सरकारी हॉस्पिटलों में दवाइयों की सप्लाई नहीं हुई और हॉस्पिटलों में स्थानीय स्तर (लोकल लेवल) पर औने-पौने दामों में दवाइयों की जमकर खरीद हुई, जिससे काफी वित्तीय नुकसान हुआ।
स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की तरफ से की गई ऑडिट के कई ऐसे पैरा सामने आए हैं, जिसमें बताया कि RMSCL ने रेट कॉन्ट्रेक्ट टेंडर की अवधि खत्म होने के बाद एक-एक साल तक दोबारा नए रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं किए।
जबकि RTPP नियम में प्रावधान है कि वर्तमान रेट कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने के तुरंत बाद नए रेट कॉन्ट्रेक्ट प्रभावी होने चाहिए, उनके बीच कोई अंतराल नहीं रहे। अगर किसी कारण से नए रेट कॉन्ट्रेक्ट समय पर नहीं हो पाते, तो मौजूदा रेट कॉन्ट्रेक्ट को उन्हीं कीमतों, नियमों ओर शर्तों पर अधिकतम तीन महीने की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है। ऐसा करने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि बाजार की कीमतों में गिरावट नहीं आई हो।
दवाइयों का संकट गहराया, लोकल स्तर पर की खरीद
रेट कॉन्ट्रेक्ट नहीं होने से दवाइयों की समय पर खरीद नहीं हो सकी और प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटलों में का संकट गहरा गया है। इस कारण हॉस्पिटलों में स्थानीय स्तर पर ज्यादा दामों पर दवाइयां खरीद की गई। सबसे बड़ी बात लोकल स्तर पर खरीदी गई दवाइयों की क्वालिटी जांच भी नहीं करवाई गई।
नॉन स्टेण्डर्ड दवाइयां भी कर दी सप्लाई
ऑडिट रिपोर्ट में RMSCL की स्टोरेज व्यवस्था और क्वालिटी जांच पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट में बताया- ऑडिट में 131 बैच दवाइयों की पहचान की गई, जिन्हें क्वालिटी कंट्रोल विंग ने नॉन स्टेण्डर्ड घोषित किया, लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों ने इन दवाइयों का उपभोग किया।
जांच में पता चलता है कि क्वालिटी टेस्ट में फेल रही दवाइयों को जारी किए जाने अथवा उनके उपभोग पर प्रभावी रूप से रोक नहीं लगाई गई। ऐसी दवाइयों का उपभोग क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम के उद्देश्य को विफल करता है और मरीजों को जोखिम में डालने वाला माना।

