पिछले 50 दिनों में चीनी 19% महंगी होकर 55.7 रुपए किलो पर पहुंच गई। ये कीमतें देशभर का सरकारी औसत हैं। कई शहरों की फुटकर दुकानों पर चीनी 65 से 70 रुपए किलो तक बिक रही है। अब सरकार ने 10 लाख टन चीनी विदेशों से मंगाने का फैसला किया है।
.
ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक भारत अचानक चीनी की किल्लत में कैसे फंस गया, दाम अभी और बढ़ेंगे या सरकार इसे थाम पाएगी; डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: चीनी के दाम पिछले दिनों कितने बढ़े हैं? जवाबः चीनी के दाम करीब 2 साल से स्थिर बने हुए थे, लेकिन जून 2026 से कीमतें अचानक बढ़ने लगीं…

सवाल-2: इतनी तेजी से चीनी के दाम बढ़ने की वजह क्या है? जवाबः चीनी की डिमांड हर साल अगस्त से नवंबर के बीच बढ़ती है, क्योंकि त्योहारी सीजन में मिठाई और प्रोसेस्ड फूड की खपत ज्यादा होती है। इसबार भी डिमांड बढ़ी, लेकिन चीनी का स्टॉक कम है…
- चीनी मिलों में गन्ने से चीनी बनाने का सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होता है। भारत में चीनी की खपत 2.6 करोड़ से 2.8 करोड़ टन के बीच रहती है। सीजन के आखिर, यानी 30 सितंबर तक 60 से 70 लाख टन चीनी का क्लोजिंग स्टॉक बच जाता है।
- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 1 अक्टूबर को नया उत्पादन शुरू होने तक मिलों के पास अनुमानित सिर्फ 35 लाख टन चीनी का ओपनिंग स्टॉक होगा। ये 3 दशकों में सबसे कम है। पिछले साल 2025-26 में ये स्टॉक 47 लाख टन था
- नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड, NFCSF चीनी मिलों की अगुवाई करने वाली संस्था है। NFCSF के उपाध्यक्ष केतन पटेल के मुताबिक, पिछले साल ज्यादा बारिश से गन्ने की फसल में नुकसान हुआ। इससे शुगर रिकवरी रेट, यानी 100 किलो गन्ने से बनने वाली चीनी का परसेंटेज 12 किलो से नीचे आ गया। इससे कुल चीनी का प्रोडक्शन करीब 3 करोड़ टन रहा, जबकि इसके 3.2 करोड़ टन रहने का अनुमान था।
यानी, ज्यादा डिमांड और कम सप्लाई के चलते चीनी के दाम तेजी से ऊपर चले गए।
सवाल-3: लेकिन चीनी का स्टॉक इतना कम क्यों हो गया? जवाबः एक्सपर्ट्स 3 बड़ी वजहें बताते हैं…
1. गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में खपा
- सरकार की नई एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के तहत गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय एथेनॉल बनाने में खप रहा है।
- एथेनॉल बनाने में रॉ मटेरियल के तौर पर 67% मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज इस्तेमाल होता है। बाकी 33% गन्ना और उसके शीरे का इस्तेमाल होता है, जिससे चीनी बनती है।
- ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, 2025-26 देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसमें 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन शीरा लगा।
- ICRA के मुताबिक, 2025-26 में चीनी का टोटल अनुमानित प्रोडक्शन लगभग 3.1 करोड़ टन है। इसमें करीब 31 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का शीरा एथेनॉल बनाने में खप गया। इससे चीनी का नेट प्रोडक्शन 2.8 करोड़ टन ही बचा। जबकि देश में चीनी की अनुमानित खपत 2.83 करोड़ टन है।
- कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, CAIT के अधिकारी शंकर ठक्कर कहते हैं, ‘3 साल से हमारा कहना था कि गन्ने का एथेनॉल में इस्तेमाल मुश्किलें खड़ी करेगा। अब वही समय आ गया है।’
2. कम स्टॉक के बावजूद चीनी का एक्सपोर्ट
- नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। फरवरी 2026 में 5 लाख टन का अतिरिक्त एक्सपोर्ट कोटा भी दे दिया गया।
- सरकार ने मई में चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी, लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले ही 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी।
- रिपोर्ट के मुताबिक, इससे चीनी का क्लोजिंग स्टॉक 47 लाख टन से घटकर 39 लाख टन हो गया और घरेलू बाजार में चीनी की कमी हो गई।
- शुगर इंडस्ट्री से जुड़े एक व्यक्ति बताते हैं, ‘मिलों से सप्लाई का संकट मार्च 2026 में ही शुरू हो गया था, लेकिन एक्सपोर्ट पर रोक 2 महीने बाद लगी। जब कीमतें बढ़ना शुरू हुईं, तभी खतरे की घंटी बजनी शुरू हो जानी चाहिए थी। साफ है कि कोई सिस्टम को गुमराह कर रहा था कि चीनी का स्टॉक पर्याप्त है, जबकि असल में टोटल प्रोडक्शन खपत के बराबर भी नहीं था।’
3. त्योहारी सीजन के दौरान जमाखोरी
- गणेश चतुर्थी और दीवाली जैसे त्योहारों के सीजन, यानी अगस्त से नवंबर तक मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की खपत बढ़ जाती है।
- मिठाई और बेवरेज वगैरह बनाने वाली कंपनियां चीनी स्टॉक करने लगती हैं। ज्यादा डिमांड और स्टॉक कम होने के चलते दाम और बढ़ जाते हैं।

कम बारिश के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की कम पैदावार हुई है। (तस्वीर- महाराष्ट्र के सांगली की है)
सवाल-4: तो क्या आगे और दाम बढ़ सकते हैं? जवाबः हां, अभी चीनी की कीमत और बढ़ सकती है।
बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जैन के मुताबिक, त्योहारी सीजन से पहले मांग में तेजी के चलते चीनी मिलें सप्लाई रोक रही हैं। मिलें स्टॉक को धीरे-धीरे रिलीज कर रही हैं, क्योंकि उन्हें कीमतों में और बढ़ोत्तरी की उम्मीद है।
इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, देश में चीनी का 6 लाख टन का मानक क्लोजिंग स्टॉक होना चाहिए। ये तीन महीने की खपत के बराबर है। हालांकि 1 अक्टूबर, 2026 से शुरू होने वाले नए सीजन में जरूरी स्टॉक इससे कम हो सकता है।
मुंबई के एक व्यापारी ने कहा, ‘नवंबर में मिलें गन्ने की नई फसल की पेराई शुरू करेंगी, उसके बाद ही सप्लाई में सुधार होगा। तब तक बाजार इसी मौजूदा स्टॉक पर निर्भर रहेगा। इससे कुछ कीमतें और बढ़ सकती हैं।
सवाल-5: सरकार इसे कंट्रोल करने के लिए क्या कर रही है? जवाबः सरकार ने 28 जुलाई 2026 को दावा किया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। कुछ डीलरों और बिचौलियों की जमाखोरी और मिलों से चीनी की फर्जी बिक्री दिखाने से चीनी की कमी की गलत तस्वीर बनी। इससे कीमतों में अस्थिरता पैदा हुई है।
20 अगस्त 2026 को सरकार ने कीमतें कंट्रोल करने के लिए कई फैसले लिए हैं…
- महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े थोक खरीदार, जैसे- मिठाई और बेवरेज बनाने वाली कंपनियों के लिए 15 दिन की स्टॉक लिमिट तय की है। यानी अगर कोई थोक खरीदार चीनी की एक क्विंटल की बोरी खरीदे, तो 10 टन में 100 बोरियां होती हैं, लेकिन अब वह एक महीने में 50 बोरी का ही स्टॉक रख सकते हैं।
- चीनी के बड़े सप्लायर और डीलर, जो खुद चीनी इस्तेमाल नहीं करते, वो भी अधिकतम 4,000 क्विंटल, यानी करीब 4,000 बोरी से ज्यादा स्टॉक जमा नहीं कर सकते हैं।
- सरकार ने मिलों को सामान्य से 0.5 लाख, यानी 50,000 मीट्रिक टन ज्यादा चीनी बेचने की इजाजत दी है। ये भी कहा है कि किसी व्यापारी को चीनी बेचने के बाद 7 दिनों के भीतर चीनी की बोरियां ट्रक में लोड होकर फैक्टरी से बाहर निकल जानी चाहिए। इससे चीनी तुरंत बाजार तक पहुंचेगी और जमाखोरी रुकेगी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इस पेराई सीजन में शीरे को एथेनॉल के बजाय, पूरी तरह चीनी के प्रोडक्शन में लगाने का निर्देश दे सकती है।
- सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के इम्पोर्ट को मंजूरी दी है। इस पर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। आम तौर पर चीनी के आयात पर 100% इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है।
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, दस लाख टन चीनी इम्पोर्ट करने से चीनी के थोक रेट कंट्रोल होने उम्मीद कम है, क्योंकि इससे चीनी थोक में 500 रुपये प्रति क्विंटल तक ही गिर सकती है।
सवाल-6: क्या विदेशों से चीनी का आयात पहले से होता रहा है?
जवाबः नहीं। भारत, ब्राजील के बाद चीनी का दूसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर और एक्सपोर्टर देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड 1.1 करोड़ टन चीनी एक्सपोर्ट की, लेकिन बीते कुछ सालों में यह लगातार घट रहा है…

घरेलू सप्लाई पर संकट हो, तो सरकार ब्राजील जैसे देशों से कच्ची चीनी मंगवाती है और उसे घरेलू मिलों में रिफाइन करके बाजार में उतारती है। 10 साल पहले आखिरी बार 2017 में 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी।
CAIT के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर कहते हैं, ‘सरकार कच्ची चीनी आयात करने की कोशिश में है। नवंबर से पहले पर्याप्त मात्रा में ऐसी चीनी मिलने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि इसका निर्यात बहुत कम ही देश करते हैं। ——–
ये खबर भी पढ़िए…
चीनी सस्ती हो सकती है, आयात टैक्स फ्री हुआ: इथेनॉल में सप्लाई डाइवर्ट होने से चीनी महंगी, एक किलो के दाम ₹55 के करीब पहुंचे

आने वाले दिनों में चीनी सस्ती हो सकती है। केंद्र सरकार ने इसके आयात को टैक्स फ्री कर दिया है। पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 10% बढ़कर रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं। पूरी खबर पढ़िए…
