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Veer Guardian Exercise Jodhpur | IAF Sukhoi vs Japan F-2A Dogfight


जोधपुर एयरबेस पर जापान के शक्तिशाली फाइटर जेट F-2A पहुंच चुके हैं। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI विमानों से हवा में जोरदार फाइट होगी।

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मौका है 9 सितंबर से शुरू हुई एयर एक्सरसाइज ‘वीर गार्जियन’ का। एक्सरसाइज में एयर-टू-एयर कॉम्बैट, डॉग फाइट, नाइट ऑपरेशन और मिड-एयर रिफ्यूलिंग जैसी जटिल तकनीकों का अभ्यास होगा।

यह युद्धाभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एयर-मैरीटाइम ऑपरेशंस के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही पाकिस्तानी एयरफोर्स के फाइटर जेट F-16 से निपटने में भी खास मदद मिलेगी।

इस स्टोरी में पढ़िए- जापानी लड़ाकू विमान F2A की खासियत क्या है? जोधपुर में एक्सरसाइज के पीछे क्या खास मकसद है?

युद्धाभ्यास का पाकिस्तान से खास कनेक्शन

युद्धाभ्यास ‘वीर गार्जियन’ में सबसे खास हैं जापान के F-2A फाइटर जेट। तीन F-2A जोधपुर एयरबेस पर पहुंच चुके हैं। इसे मित्सुबिसी हैवी इंडस्ट्रीज (MHI) ने अमेरिका की लॉक्चेड मार्टिन के सहयोग से विकसित किया है। लेकिन मूल डिजाइन अमेरिकी F-16 फाइटिंग फाल्कन पर आधारित है। खूबियां भी लगभग वैसी ही हैं।

खास बात ये है कि पाकिस्तान के पास भी अमेरिका के दिए F-16 फाइटर फाल्कन का बेड़ा है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने अलग-अलग समय में कुल करीब 85 से 90 F-16 विमान खरीदे थे।

ऐसे में भारतीय वायुसेना के वीर इस युद्धाभ्यास से F-16 फाइटर जेट के खतरों से निपटने का अनुभव ले रहे हैं। इससे भारतीय वायुसेना को एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और राडार को चकमा देने की रणनीति समझने में सीधी मदद मिलेगी।

27 फरवरी 2019 को बालाकोट एयरस्ट्राइक में F-16 फाइटर जेट से ही भारतीय वायुसेना का सामना हुआ था। इस दौरान भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने अपने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के एक एफ-16 जेट को मार गिराया था।

फाइटर जेट F-2 और F-15 के साथ हो चुकी ट्रेनिंग

वीर गार्जियन एक्सरसाइज का यह दूसरा फेज है। इससे पहले जनवरी 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर भारतीय वायुसेना ने चार Su-30MKI के साथ ट्रेनिंग की थी। उस दौरान जापान की ओर से F-2 और F-15 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया था।

अब इस दूसरे पार्ट में जापान के फाइटर जेट भारत पहुंचें और जोधपुर एयरबेस पर युद्धाभ्यास कर रहे हैं। इस जॉइंट एक्सरसाइज का डिसीजन सितंबर 2022 में टोक्यो में हुई भारत-जापान विदेश और रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक में हुआ था।

तस्वीर 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर भारतीय वायुसेना की है।

तस्वीर 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर भारतीय वायुसेना की है।

भविष्य के एयर मैरीटाइम ऑपरेशंस के लिए महत्वपूर्ण

जोधपुर में इस अभ्यास का रणनीतिक मकसद हिंद-प्रशांत के मैरीटाइम ऑपरेशंस की एक्सरसाइज करना है। वह कैसे यह आपको बताते है…

  • जापान का F-2A समुद्री सुरक्षा और वातावरण को ध्यान में रखकर विकसित हुआ है। उसके साथ भारतीय लड़ाकू विमानों की ट्रेनिंग भविष्य के एयर-मैरीटाइम ऑपरेशंस के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • भारत जहां हिंद महासागर क्षेत्र में और जापान पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण मेरीटाइम पॉवर्स हैं। दोनों देशों के बीच पहले से नौसेनाओं का समुद्री अभ्यास होता रहा है। अब ‘वीर गार्जियन’ को एयर प्लस मैरीटाइम सिक्योरिटी एक्सरसाइज के रुप में देखा जा रहा है।
  • इस एक्सरसाइज में हवाई युद्ध, मिशन प्लानिंग, सेंसर/एवियोनिक्स, टेक्टिकल कॉर्डिनेशन और ऑपरेशनल प्रोसिजर्स का जो अनुभव दोनों पक्ष साझा कर रहे हैं, वह भविष्य में मैरीटाइम एयर ऑपरेशन के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
जोधपुर एयरबेस पर भारतीय अफसरों से हाथ मिलाते जापानी एयरफोर्स के अधिकारी।

जोधपुर एयरबेस पर भारतीय अफसरों से हाथ मिलाते जापानी एयरफोर्स के अधिकारी।

जापान का मित्सुबिसी F-2A क्यों है खास

जापान का मित्सुबिसी F-2A एक सिंगल-इंजन मल्टीरोल फाइटर है। भले ही मूल डिजाइन अमेरिका के फाल्कन जेट से है। लेकिन जापान ने इसे अपनी समुद्री सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से कई बड़े बदलाव किए हैं।

  • F-2A में एंटी-शिप मिसाइल ले जाने की क्षमता है। यही वजह है कि यह जापान की एयर-डिफेंस और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • इसे AESA रडार से लैस फाइटर एयरक्राफ में गिना जाता है। यह तकनीक हवा से सतह / समुद्री टारगेट में फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन को आसानी से ट्रेस कर लेती है।
  • F-2 का विंग F-16 की तुलना में करीब 25 प्रतिशत बड़ा है। बड़े विंगो के साथ इसमें कंपोसिट मेटेरियल का इस्तेमाल भी किया गया, जिससे विमान की क्षमता और प्रदर्शन जापान की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो गई।

एक्सरसाइज में क्या हो रहा है खास?

इस एक्सरसाइज के दौरान हवा से हवा में मार करने (Air-to-Air Combat), डॉग फाइट, रात के अंधेरे में सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन्स, और मिड-एयर रिफ्यूलिंग (हवा में ही ईंधन भरने) जैसी जटिल युद्ध तकनीकों का अभ्यास किया जाएगा।

22 सितंबर तक चलने वाली इस एयर एक्सरसाइज में दोनों देशों के फाइटर जेट आमने सामने होंगे और एक दूसरे से युद्ध की बारिकियों को समझेंगे।

जटिल एयर ऑपरेशंस का अनुभव : इस युद्धाभ्यास के दौरान हवा से हवा में मार करने (Air-to-Air Combat), डॉग फाइट, रात के अंधेरे में सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन्स, और मिड-एयर रिफ्यूलिंग (हवा में ही ईंधन भरने) जैसी जटिल युद्ध तकनीकों का अभ्यास किया जाएगा।

F-16 जैसे खतरों से निपटना: भारतीय पायलटों के लिए जापानी F-2 जेट्स के खिलाफ अभ्यास करना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है, क्योंकि यह विमान काफी हद तक पाकिस्तान के प्रमुख लड़ाकू विमान F-16 की कॉपी है। इससे भारतीय वायुसेना को एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और राडार को चकमा देने की रणनीति समझने में सीधी मदद मिलेगी।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा: इस साझा अभ्यास को चीन की विस्तारवादी नीतियों और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दोनों महाशक्तियों के एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।



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