3 घंटे पहले
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किताबों से जानिए, खुद को लगातार बेहतर साबित करने की कोशिश आखिर कितनी नुकसानदायक है?
अपनी अपूर्णताओं को स्वीकारें, कमजोरियां व्यक्तित्व का हिस्सा हैं हमें लगता है अगर हम ज्यादा सफल, ज्यादा सुंदर, ज्यादा सक्षम या हर किसी को खुश रखने वाले बन जाएं, तो हम खुद को पर्याप्त मानेंगे। खुद को लगातार बेहतर साबित करने की यह कोशिश भीतर से थका सकती है। अपनी अपूर्णताओं को स्वीकारना हार मानना नहीं है। इसका अर्थ है यह समझना कि कमजोरियां हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा हैं, पूरी पहचान नहीं। हमें हर समय मजबूत दिखने की जरूरत नहीं है। (द गिफ्ट्स ऑफ इंपरफेक्शन -ब्रेने ब्राउन)
शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन वही आगे बढ़ने का रास्ता खोलती है किसी काम को टालने से वह छोटा नहीं होता, हमारे मन में और बड़ा होता जाता है। कई बार हम काम इसलिए नहीं टालते कि हम आलसी हैं, बल्कि इसलिए कि वह हमें मुश्किल, उबाऊ या तनावपूर्ण लगता है। काम जितना भारी महसूस होता है, उससे बचने की इच्छा उतनी बढ़ती है। खुद पर दबाव बढ़ाने के बजाय काम को छोटे हिस्सों में बांटें। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन वही आगे बढ़ने का रास्ता खोलती है। (द नाउ हैबिट -नील फिओरे)
आत्मविश्वास तभी बनता है जब आप अपने डर का सामना करना सीखते हैं आत्मविश्वास का मतलब यह नहीं कि आपको अपनी हर क्षमता पर भरोसा हो। आत्मविश्वास धीरे-धीरे बनता है, जब आप अपने डर का सामना करते हैं, छोटे लक्ष्य तय करते हैं और खुद को कोशिश करने का मौका देते हैं। हर छोटी सफलता आपके भीतर यह विश्वास मजबूत करती है कि आप मुश्किल परिस्थितियों से निपट सकते हैं। जहां कमी है, वहां सीखने और अभ्यास की गुंजाइश होती है। (द सेल्फ कॉन्फिडेंस वर्कबुक -बार्बरा मार्कवे)
मन में आने वाले हर विचार को सोचना और सच मानना जरूरी नहीं मन में आने वाले हर विचार को सच मानना जरूरी नहीं है। आपका मन कह सकता है कि आप असफल होंगे, लोग आपको पसंद नहीं करेंगे या आप इस काम के लिए तैयार नहीं हैं। इन विचारों को दबाने या उनसे लड़ने के बजाय उन्हें केवल विचार के रूप में देखना सीखें। अपने लिए महत्वपूर्ण दिशा चुनें और डर को साथ लेकर आगे बढ़ें। हर बार जब ऐसा करते हैं, तो अपने बारे में एक नई बात पता चलती है। (द कॉन्फिडेंस गैप -रस हैरिस)

