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अमृतसर में पंथक संगठनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस:धार्मिक प्रथा जबरन लागू करने पर जताई आपत्ति, संविधान में धार्मिक आजादी का दिया हवाला




अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में पांच प्यारों द्वारा अरदास के बाद पंथक संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें धार्मिक स्वतंत्रता, सिख धर्म के मूल सिद्धांतों और किसी भी धार्मिक विचार या प्रथा को जबरन लागू करने से जुड़े मुद्दों पर नेताओं ने अपना पक्ष रखा। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता और पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान के बेटे ईमान सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी का केंद्रीय सिद्धांत अकाल पुरख और ‘इक ओंकार’ है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबानों ने आध्यात्मिक सत्य को समझाने के लिए अलग-अलग नामों और प्रतीकों का इस्तेमाल किया, लेकिन अंतिम सत्ता को अकाल पुरख से ही जोड़ा। ईमान सिंह मान ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी की बाणी में भी सिख धर्म की नींव गुरु की बाणी पर आधारित होने की बात स्पष्ट है। उनके अनुसार विभिन्न धार्मिक नामों का उल्लेख आध्यात्मिक सत्य समझाने के उद्देश्य से किया गया है। रणजीत सिंह बोले- संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है इस दौरान सिख यूथ फेडरेशन भिंडरांवाला के अध्यक्ष भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल ने कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और विश्वास के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने किसी धार्मिक रस्म या विचार को कानून के माध्यम से सभी पर अनिवार्य करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, भाषाओं और विचारधाराओं वाला देश है। ऐसे में किसी एक धार्मिक प्रथा को जबरन लागू करना विविधता के लिए चुनौती हो सकता है। पंथक नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य धर्म की मान्यताओं का विरोध नहीं करते, लेकिन सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता और भावनाओं का भी संवैधानिक दायरे में सम्मान होना चाहिए। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब से धार्मिक मामलों में स्पष्टता की मांग की।



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