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अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया एक विज्ञापन विवादों में घिर गया है। अमेरिकी सरकार की इस एजेंसी पर भारतीय-अमेरिकियों, सिखों और हिंदू समुदाय को निशाना बनाने तथा नस्लभेदी विचार फैलाने के आरोप लगे हैं। चौतरफा विरोध और नेताओं के कड़े एतराज के बाद आखिरकार विभाग को यह विवादित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटानी पड़ी। वहीं, पोस्टर में पंजाबी और सिख समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। साथ ही भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाने की अपील की है। क्या था पूरा मामला और क्यों हुआ विवाद? दरअसल, अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग सड़कों पर बिना लाइसेंस या बिना वैध दस्तावेजों के व्यवसायिक वाहन (जैसे ट्रक और बसें) चलाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ एक अभियान चला रहा था। इस अभियान के तहत विभाग ने सोशल मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार की गई कुछ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए थे। विवादित टैगलाइन: एक तस्वीर में भूरी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति को दिखाया गया था, जिस पर लिखा था – “हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता मिस्टर सिंह”। ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ के किरदारों का इस्तेमाल: अभियान को प्रचारित करने के लिए मशहूर हॉलीवुड फिल्म ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ के पात्रों का सहारा लिया गया। वीडियो में फिल्म के खलनायक ‘मेगाट्रॉन’ को दिखाया गया, जो सड़क हादसों और अपराधों में शामिल रहे कुछ ड्राइवरों (जिनमें हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार और जसवीर सिंह जैसे नाम शामिल थे) की रिहाई की मांग कर रहा था। एक अन्य तस्वीर में हीरो ‘ऑप्टिमस प्राइम’ को DHS का लोगो पहने दिखाया गया, जो दाढ़ी वाले व्यक्ति से कह रहा था- या तो खुद देश छोड़ दो (सेल्फ-डिपोर्ट), या अंजाम भुगतने को तैयार रहो। ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ स्कीम से जुड़ा था अभियान यह पूरा विज्ञापन अमेरिकी सरकार के ‘सीबीपी होम’ नाम के एक विशेष कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। इस कार्यक्रम के तहत बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सरकार ऐसे लोगों को देश छोड़ने के लिए यात्रा का खर्च और 2,600 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.15 लाख रुपए) का बोनस देने की पेशकश करती है। विवाद पर किसने क्या कहा? विज्ञापन में ‘सिंह’ सरनेम और दाढ़ी वाले व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने पर अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के संगठनों तथा राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी: गवर्नर गेविन न्यूसम (कैलिफोर्निया):उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक करार देते हुए कहा कि सरकार सिख समुदाय को निशाना बनाकर नस्लवादी दुष्प्रचार कर रही है।
कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति (भारतीय-अमेरिकी सांसद): उन्होंने कहा कि अमेरिका में 1 लाख 60 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जिनका सरनेम ‘सिंह’ है। जब कोई सरकारी एजेंसी किसी खास सरनेम का मजाक उड़ाती है, तो इससे विदेशियों के प्रति नफरत बढ़ती है और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF): संगठन ने कहा कि ‘सिंह’ सरनेम वाले लोग हिंदू भी हैं, सिख भी हैं और सच्चे अमेरिकी भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक सरकारी एजेंसी भारत-विरोधी और नस्लवादी सोच को बढ़ावा कैसे दे सकती है? संगठन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सिख कोएलिशन : सिख संगठन ने दुख जताते हुए कहा कि 9/11 की घटना के 25 साल बीत जाने के बाद भी सिखों को उनके पहनावे और पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है और संदिग्ध नजरों से देखा जा रहा है। CoHNA (नॉर्थ अमेरिका के हिंदू संगठन): ने कहा कि कानून का पालन कराया जाना चाहिए, लेकिन किसी की पहचान या नाम का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले लोग किसी भी धर्म या जाति के हो सकते हैं। विज्ञापन हटने के बाद भी गुस्सा बरकरार चौतरफा दबाव और जनता के गुस्से को देखते हुए गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने विज्ञापन को सोशल मीडिया से डिलीट तो कर दिया है, लेकिन सिख और हिंदू संगठनों का कहना है कि केवल पोस्ट हटा देना काफी नहीं है। संगठनों की मांग है कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी भी समुदाय की पहचान को इस तरह गलत और नस्लवादी तरीके से पेश न किया जाए। धामी बोले-अमेरिका के विकास में पंजाबियों का अहम योगदान एडवोकेट धामी ने कहा कि अमेरिका के विकास और आर्थिक तरक्की में पंजाबियों ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और हुनर से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ट्रकिंग समेत कई क्षेत्रों में सिख और पंजाबी अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़े हैं और अमेरिकी समाज की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के पोस्टर में विशेष रूप से ‘मिस्टर सिंह’ का उल्लेख कर पंजाबी और सिख समुदाय को निशाना बनाना नस्ली और सामुदायिक पक्षपात वाली सोच को दर्शाता है। विकसित देश के लिए इस तरह की सोच चिंताजनक है। धामी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से अपील की कि सिख समाज के प्रति इस तरह के कथित भेदभावपूर्ण और आपत्तिजनक व्यवहार का मामला अमेरिकी सरकार के समक्ष उठाया जाए।
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अमेरिका में 'मिस्टर सिंह' वाले विज्ञापन पर विवाद:विरोध के बाद अमरीकी गृह सुरक्षा विभाग ने हटाया एड; SGPC ने भी जताई आपत्ति
