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आईआईएम बोधगया के चार प्रोफेसर दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिक:डॉ. अविरल तिवारी को अर्थशास्त्र में 47वां स्थान, आर्थिक विकास से जुड़े रिसर्च पर लिस्ट में मिली जगह




आईआईएम बोधगया को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। संस्थान के चार प्रोफेसरों डॉ. अविरल कुमार तिवारी, डॉ. रोहित अग्रवाल, डॉ. सुनील तिवारी और डॉ. रघुनाथन कृष्णकुमार को मशहूर स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर वर्ल्ड्स टॉप 2% साइंटिस्ट्स सूची में शामिल किया गया है। एक साथ चार प्रोफेसरों को यह दुनिया भर में पहचान मिलने से आईआईएम बोधगया और बिहार का गौरव बढ़ा है। यह संस्थान में अच्छे शोध और बेहतरीन पढ़ाई के प्रयासों को दिखाता है। डॉ. अविरल कुमार तिवारी ने अर्थशास्त्र में विश्व स्तर पर 47वां स्थान हासिल किया है। ऊर्जा अर्थशास्त्र, पर्यावरणीय अर्थशास्त्र और आर्थिक विकास से जुड़े उनके शोध को इस सूची में जगह मिली है। डॉ. रोहित अग्रवाल को व्यवसाय एवं प्रबंधन के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 437वां स्थान मिला है। उनके शोध काम व्यवसाय, सतत विकास और तकनीक से संबंधित हैं। इन प्रोफेसरों के शोध योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास माना जा रहा है। पर्यावरण विज्ञान में डॉ. सुनील तिवारी का प्रदर्शन डॉ. सुनील तिवारी ने पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 947वां स्थान हासिल किया है। पर्यावरण से जुड़े उनके शोध कार्यों को प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की चुनौतियों के बीच इस क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। एआई और इमेज प्रोसेसिंग में डॉ. रघुनाथन कृष्णकुमार डॉ. रघुनाथन कृष्णकुमार ने एआई और इमेज प्रोसेसिंग से संबंधित क्षेत्र में विश्व स्तर पर 5810वां स्थान प्राप्त किया है। डिसीजन साइंसेज, सॉफ्ट कंप्यूटिंग और मल्टी-क्राइटेरिया डिसीजन मेकिंग जैसे विषयों पर उनके शोध को सूची में जगह मिली है। ये क्षेत्र आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण और जटिल समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोध की गुणवत्ता और प्रभाव का वैश्विक मूल्यांकन स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर वर्ल्ड्स टॉप 2 फीसदी साइंटिस्ट्स डेटाबेस में शोधकर्ताओं के अकादमिक योगदान और वैज्ञानिक प्रभाव का आकलन किया जाता है। इसके लिए स्कोपस के आंकड़ों के आधार पर शोध-पत्रों को मिले उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखन से जुड़े प्रभाव और कुल उद्धरण जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है। इसमें पूरे अकादमिक करियर के योगदान और किसी एक वर्ष के शोध प्रभाव का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।



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