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15 अक्टूबर 2026 से UPI पर नया चार्ज लगने जा रहा है। 2,000 रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर दुकानदारों को 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR देना होगा। सरकार का कहना है कि ग्राहक की जेब से एक रुपया भी नहीं कटेगा। वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी का कहना है- सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? ग्राहक की जेब से आएगी। आखिर UPI का ये नया चार्ज है क्या, इससे कितनी कमाई होगी, पैसा किस-किसको मिलेगा और क्या असली बोझ आम आदमी पर पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: UPI पेमेंट पर कैसे और कितना नया चार्ज लगने जा रहा है? जवाब: 14 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी करके कहा कि 2,000 रुपए तक के UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा। अगर MDR फीस लागू की जाती है, तो ये नाममात्र की दर पर 2,000 रुपए के ऊपर के लेनदेन पर व्यापारियों पर ही लागू होगी। अगले ही दिन, 15 सितंबर को देश में UPI का संचालन करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, NPCI ने MDR का रेट तय कर दिया। नए नियम के मुताबिक, 2,000 रुपए से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा। इस बदलाव के लिए संसद के मानसून सत्र के दौरान ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पारित किया गया था। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन करके UPI और RuPay पर MDR चार्ज लगाने पर लगी कानूनी रोक हटा दी गई। NPCI के निर्देश के मुताबिक लगने वाले चार्ज समझिए… MDR पर 300 रुपए की अपर लिमिट कैसे लागू होगी, 2 उदाहरणों से समझिए… पहला: 3000 रुपए के पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से 12 रुपए और इसी तरह आगे बढ़ने पर 75000 रुपए पर 300 रुपए चार्ज बनेगा। दूसरा: 75000 रुपए से ऊपर किसी भी पेमेंट, मिसाल के लिए 1 लाख रुपए के पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से 400 रुपए बनते हैं, लेकिन अपर लिमिट 300 है, इसलिए अधिकतम चार्ज 300 रुपए ही लगेगा। सवाल-2: इस नए चार्ज से कितनी कमाई होगी? जवाब: इसका कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है, लेकिन कुछ अनुमान लगाए गए हैं। पहले ये समझिए कि भारत का UPI नेटवर्क कितना बड़ा है… अब MDR चार्ज से होने वाली कमाई की गणित देखिए… क्रेडिट रेटिंग कंपनी केयरएज के मुताबिक, कुल UPI पेमेंट्स में से 29% ट्रांजैक्शन आम लोगों ने दुकानदारों को किए हैं, यानी पर्सन टू मर्चेंट, P2M पेमेंट्स। इन P2M पेमेंट्स में से MDR सिर्फ उन पेमेंट्स पर लगेगा, जो 2000 रुपए से ऊपर के हैं। ऐसे पेमेंट्स कुल P2M पेमेंट्स का 67.2% हैं। केयरएज के मुताबिक, 2025-26 में MDR के दायरे में आने लायक पेमेंट्स करीब 61.13 लाख करोड़ रुपए के थे। इन पर 0.4% MDR के हिसाब से कुल 24,452 करोड़ रुपए की कमाई होगी सवाल-3: ये कमाई कैसे बंटेगी, किसे कितना पैसा मिलेगा? जवाब: किसी UPI ट्रांजैक्शन में पेमेंट करने वाले और पेमेंट लेने वाले के अलावा पूरी प्रक्रिया में 4 और पार्टनर्स काम करते हैं- UPI के पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर को चलाने में इन चारों पर सालाना करीब 20 हजार करोड़ रुपए का खर्च आता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें इश्यूइंग बैंक का खर्च सबसे ज्यादा होता है। बैंकों का कुल खर्च करीब 70% होता है, जबकि करीब 30% खर्च UPI एप को करना होता है। सरकार ने 2021-22 से 2024-25 तक UPI को प्रमोट करने के लिए MDR जीरो रखा और बैंकों के खर्च की भरपाई के लिए इन 4 सालों में उन्हें कुल 8,276 करोड़ का इंसेंटिव दिया। इसके बावजूद पूरे UPI इन्फ्रास्ट्रक्चर को सालाना करीब 5000 से 6000 करोड़ का घाटा हो रहा था। अब MDR के जरिए होने वाली कमाई से चारों पार्टनर्स को पैसा दिया जाएगा। किसको, कितना हिस्सा मिलेगा, इसे लेकर NPCI ने अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, MDR का 40% इश्यूइंग बैंक को, करीब 30% एक्वायरिंग बैंक, करीब 20% फोनपे, गूगल पे जैसी एप और 10% पेमेंट सर्विस बैंक को मिलेगा। एक पहलू ये भी है कि इस बिजनेस से विदेशी UPI एप्स को ज्यादा फायदा हो रहा है, भारतीय UPI एप्स की हिस्सेदारी बेहद कम है। टोटल UPI पेमेंट्स में NPCI की BHIM एप की हिस्सेदारी सिर्फ 0.86% है। वहीं Paytm से करीब 8% और Navi एप से करीब 3.5% UPI पेमेंट्स होते हैं। जबकि अमेरिका के वालमार्ट के स्वामित्व वाली फोन-पे से 47% और गूगल-पे से 37% पेमेंट होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, MDR चार्ज से फोनपे को सालाना करीब 700 करोड़ रुपए और गूगल पे को 500 करोड़ की कमाई होगी। नवंबर 2020 में NPCI ने आदेश दिया था कि UPI में किसी एक कंपनी की हिस्सेदारी 30% से ज्यादा नहीं हो सकती, लेकिन इस नियम को लागू करने की टाइमलाइन तीन बार बढ़ाई जा चुकी है। 2024 में संसदीय समिति इन दोनों अमेरिकी एप्स की UPI में कुल 84% हिस्सेदारी पर चिंता जाहिर कर चुकी है। सवाल-4: इसका आम आदमी पर कितना असर होगा? जवाब: सरकार का कहना है कि UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसमें साइबर फ्रॉड रोकने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने और पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में खर्च होता है, इसलिए MDR चार्ज लगाया गया है। सरकार का दावा है कि MDR बढ़ाने से ग्राहकों की जेब पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि असल में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब पेमेंट्स में दुकानदारों या बिजनेसेज पर कोई फीस लगती है, तो मर्चेंट्स उसका बोझ ग्राहकों पर डाल देते हैं… एक और अनसुलझा सवाल GST का है। अब तक जीरो MDR होने की वजह से UPI पेमेंट्स पर कोई GST नहीं लगता था। अप्रैल 2025 में वित्त मंत्रालय ने साफ किया था कि ₹2,000 से ऊपर के UPI लेनदेन पर 18% GST लगने की खबरें झूठी हैं। लेकिन अब जब MDR वापस आ रहा है, तो ये सवाल फिर खुल गया है कि क्या इस MDR कलेक्शन पर GST लगेगा। इसके अलावा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में हुए बदलावों के बाद सरकार जब चाहे, एक नोटिफिकेशन लाकर इसमें बदलाव कर सकती है कि MDR का रेट क्या होगा और और ये किन मर्चेंट्स पर लगेगा। —– ये भी पढ़िए… ₹2000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज:15 अक्टूबर से यह कारोबारियों से लिया जाएगा, अभी 4 साल में सरकार ने ₹8276 करोड़ खर्चा उठाया UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा। फीस की मैक्सिमम लिमिट 300 रुपए तक की गई है। यह अमाउंट अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर निर्भर करेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बिजनेसमैन से लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
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आज का एक्सप्लेनर:अब तक मुफ्त UPI का खर्च कौन उठाता था, नए चार्ज से कितने पैसे जुटेंगे, किसे-कितना फायदा मिलेगा
