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बिलासपुर के जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत आमागोहन ग्राम पंचायत के सचिव राजेश कुमार उइके को पद से हटा दिया गया है। उन पर लाखों रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और ग्रामीणों से दुर्व्यवहार के आरोप थे, जिसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने बताया कि आमागोहन के सचिव के विरुद्ध की गई जांच में गड़बड़ी पाई गई है। उन्हें नोटिस जारी किया गया है और जवाब मिलने के बाद विभागीय जांच और वसूली की कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को जारी आदेश में पंचायत सचिव राजेश कुमार उइके को ग्राम पंचायत आमागोहन से हटाकर जनपद पंचायत कोटा कार्यालय में संलग्न किया गया है। ग्राम पंचायत बिटकुली के सचिव अनुप कुमार मजूमदार को आमागोहन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब आमागोहन पंचायत में कथित लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं, विकास कार्यों में गड़बड़ी, ग्राम सभाओं के संचालन में अनियमितता और ग्रामीणों से दुर्व्यवहार जैसे मामलों को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन, सुशासन शिविर, जनपद पंचायत और जिला पंचायत सहित विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर की थी। इन शिकायतों के आधार पर कई जांच दलों ने पंचायत का निरीक्षण किया था। प्रशासन ने पूर्व में भी एक जांच समिति गठित कर विभिन्न निर्माण कार्यों के भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए थे। कार्रवाई को शिकायतकर्ताओं ने जनता की आवाज की जीत बताया आमागोहन के सचिव को पंचायत से हटाने के आदेश के बाद ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने इसे जनता की आवाज की जीत बताया है। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों और जनदबाव के कारण प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ पंचायत से हटाकर दूसरे स्थान पर भेजना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उनका मानना है कि मामले में आगे भी कार्रवाई होनी चाहिए। आदेश में कारणों का उल्लेख नहीं जिला पंचायत के आदेश में सचिव को हटाने और दूसरी जगह संलग्न करने की जानकारी दी गई है, लेकिन इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे अब कई सवाल उठ रहे हैं। कई सवाल उठे आमागोहन सचिव को हटाने के आदेश को लेकर ग्रामीणों की ओर से कई तरह से सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें यदि कार्रवाई शिकायतों और जांच के आधार पर हुई है तो आदेश में कारण क्यों नहीं लिखा गया, क्या यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था है या प्रारंभिक अनुशासनात्मक कार्रवाई? जांच में अनियमितताएं मिली हैं तो दोष तय कर आगे क्या कार्रवाई होगी। इसी प्रकार सरपंच और अन्य जिम्मेदारों पर क्या होगा? मांग की जा रही है कि सचिव की गड़बड़ियों में शामिल सरपंच और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पंचायत व्यवस्था पर उठे सवाल आमागोहन का मामला पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी कई प्रश्न खड़े कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सभाओं की सूचना समय पर नहीं दी जाती थी।
पंचायत पोर्टल पर वास्तविक स्थल की तस्वीरें अपलोड नहीं की जाती थीं। इसी प्रकार विकास कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान को लेकर लगातार विवाद रहे। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई की प्रक्रिया काफी धीमी रही। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग ग्रामीणों की मांग है कि आमागोहन सचिव के खिलाफ हुई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि अगर जांच में वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो सरकारी राशि की वसूली की जाए और दोषियों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए।
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आमागोहन पंचायत सचिव हटाए गए:वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों पर सीईओ का आदेश, जांच के बाद होगी कार्रवाई
