![]()
आर्थिक तंगी न केवल हमारी जीवनशैली को प्रभावित करती है, बल्कि यह हमारे दिमाग को भी समय से पहले तेजी से बूढ़ा कर देती है। साथ ही 50 साल की उम्र में ही याददाश्त कमजोर होने लगती है और बातों को समझने की क्षमता भी सामान्य से कम हो जाती है। यह चौंकाने वाली जानकारी यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं के 70 साल लंबे चले अध्ययन में सामने आई है। शोध ‘इनोवेशन इन एजिंग’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसके अनुसार, कामकाजी जीवन में लंबे समय तक पैसों की कमी और तंगहाली से जूझने वालों के 50 साल की उम्र होने पर दिमाग के काम करने की गति में बड़ी गिरावट आती है। शोधकर्ताओं ने 1946 के ब्रिटेन के नेशनल सर्वे ऑफ हेल्थ एंड डेवलपमेंट में शामिल रहे करीब 2,800 प्रतिभागियों के 26 से 53 वर्ष की उम्र तक के आय डेटा और वित्तीय कठिनाइयों का विश्लेषण किया। यूसीएल के डॉ. जैक्स वेल्स ने बताया, ‘हमारे दशकों लंबे डेटा से स्पष्ट है कि थोड़े समय की नहीं, बल्कि कई वर्षों तक लगातार बनी रहने वाली आर्थिक तंगी ही दिमाग के स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। 70 वर्ष की उम्र में किए गए ब्रेन स्कैन में लगातार कम आय वाले लोगों में ‘वेंट्रिकुलर वॉल्यूम’ बढ़ा हुआ पाया गया, जो दिमाग के टिश्यूज के नुकसान यानी दिमाग के सिकुड़ने का बड़ा संकेत है।’ पुरुषों पर ज्यादा असर – शोध के अनुसार, लगातार आर्थिक तनाव का असर तीन विशेष समूहों पर सबसे ज्यादा और घातक देखा गया। 1. पुरुष – महिलाओं की तुलना में लगातार आर्थिक तंगी झेलने वाले पुरुषों का मस्तिष्क तेजी से सिकुड़ा। 2. गरीब बचपन वाले वयस्क: जो लोग बचपन में गरीब परिवारों में पले-बढ़े और वयस्क होने पर भी आर्थिक तंगी से जूझे, उनके दिमाग का याददाश्त से जुड़ा हिस्सा ‘हिप्पोकैम्पस’ तेजी से कमजोर हुआ। 3. आनुवंशिक: अल्जाइमर रोग का आनुवंशिक जोखिम (एपीओई-ε4 जीन) वाले लोगों में आर्थिक तंगी के कारण दिमाग में ‘अमाइलॉइड प्रोटीन’ का जमाव और ब्रेन वॉल्यूम का नुकसान सबसे तेज पाया गया है। आर्थिक मदद और गरीबी घटाना डिमेंशिया रोकने में कारगर शोध में शामिल जिन प्रतिभागियों की घरेलू आय लंबे समय तक लगातार कम रही, उनके दिमाग में वेंट्रिकुलर वॉल्यूम ज्यादा पाया गया। वेंट्रिकल्स दिमाग के भीतर तरल से भरी कैविटीज होती हैं। इनका बढ़ना अक्सर ब्रेन टिश्यू नुकसान के संकेत माना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, दुनिया भर में भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) के मामले अगले 30 वर्षों में तीन गुना बढ़कर 15 करोड़ होने का अनुमान है। शोध की सह-लेखिका प्रो. प्रवीथा पटाले का कहना है कि लोगों को गरीबी से उबारना और आर्थिक सुरक्षा देना भविष्य में डिमेंशिया और मानसिक अक्षमता के मामलों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका साबित हो सकता है।
Source link
आर्थिक तंगी से जल्द बूढ़ा होता है दिमाग:UCL की 70 साल पुरानी स्टडी; 50 की उम्र में ही घटने लगती है याददाश्त
