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शॉर्ट फिल्ममेकर सरबजीत सिंह ने इंसान के वजूद, उसकी पहचान और कला के सफर को बयां करती नई शॉर्ट फिल्म बनाई है, जिसका शीर्षक आइडेंटिटी है। पांच मिनट की इस वीडियो में सरबजीत ने दिखाया कि हर व्यक्ति की अलग पहचान होती है, जो उसके कर्म और काम से जुड़ी होती है। उन्होंने बताया – फिल्म के कुछ सीन घरों के भीतर और कुछ सीन छतबीड़ तथा डेराबस्सी के पास जंगल में फिल्माए गए हैं। आउटडोर वीडियोग्राफी और शॉट्स लेने में सोनू ब्रोका ने मदद की है, सिनेमेटोग्राफी मैंने खुद संभाली। सरबजीत ने कहा – मैंने इस प्रोजेक्ट में कई एक्सपेरिमेंट्स किए हैं, जो कैमरा जुड़े रहे। वीडियो के जरिए संदेश दिया कि इंसान की असली पहचान उसके काम से तय होती है, जिसे कोई मजबूरी में तो कोई अपनी खुशी से चुनता है। भले ही काम में पूर्णता न हो, लेकिन उनका कलात्मक सफर और पहचान दुनिया में हमेशा याद रखी जाएगी। मानता हूं कि जो भी इस शॉर्ट फिल्म को देखे तो उन्हें समझ आए कि अपनी पहचान पर हमें खुद ही काम करना होगा। इसके लिए मेहनत को नकारा नहीं जा सकता। जो बनना है उस ओर कदम बढ़ाओ। काम कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता। जंगल क्यों? सरबजीत ने बताया – मेरे लिए प्रकृति और जंगल एक स्कूल की तरह रहे हैं, जहां मैंने फोटोग्राफी और फिल्मों से जुड़े कई प्रयोग किए, गलतियां करके सीख हासिल की। फिल्म में वाइल्डलाइफ और स्ट्रीट फोटोग्राफी के अनुभव की बात करूं तो इस कला में धैर्य और तेजी दोनों का होना बहुत जरूरी है। मैंने जो भी सीखा उसमें कुदरत का बड़ा योगदान है। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की समझ नेचर से मिलती है। कब कहां कितनी रोशनी कैसे दिखाई देगी यह तो हमें दिन और रात अपने आप सिखाते हैं। प्रकृति खुद ही अपने आप में गुरु है, बस उसके लिए हमें सबसे पहले शिष्य बनना होता है।
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इंसान के वजूद व पहचान का सफर दिखाती ‘आइडेंटिटी’
