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सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को कम करने के लिए चलाए जा रहे जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम के तीसरे और चौथे चरण की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला सोमवार को पुलिस मुख्यालय के अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में हुई। यातायात निदेशालय की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थलों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट के नोडल अधिकारी शामिल हुए। डीजीपी राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को सिर्फ आकस्मिक घटना मानकर छोड़ देना काफी नहीं है। उनके पीछे छिपे मूल कारणों की वैज्ञानिक पहचान कर उन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को अपने जिम्मेदारी क्षेत्र में दुर्घटना संभावित जगहों की पहचान कर मिशन मोड में रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीजीपी ने कहा कि इन टीमों की जिम्मेदारी सिर्फ दुर्घटना के बाद की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। दुर्घटना रोकना भी उनकी प्राथमिक ड्यूटी है। हर हादसे के बाद कारणों की समीक्षा कर व्यवस्था में कमी ढूंढनी चाहिए और दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए सुधार सुनिश्चित करने चाहिए। संबंधित विभागों से अपेक्षित सुधारों का लगातार फॉलोअप और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर एस्केलेट करने को भी कहा गया। आंकड़े बता रहे योजना का असर जनवरी से अगस्त 2026 तक ZFD से कवर किए गए स्थलों पर पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत, मृतकों में 8.03 प्रतिशत और घायलों में 6.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस दौरान 1255 दुर्घटनाएं कम हुईं, यानी रोजाना औसतन करीब 7 हादसे घटे। साथ ही 1107 लोगों की जान बचाई गई, यानी रोजाना औसतन करीब 5 जीवन सुरक्षित हुए। ZFD योजना प्रदेश के सभी कमिश्नरेट और जनपदों के सबसे ज्यादा दुर्घटना वाले 700 स्थानों पर लागू है। इसका मूल सिद्धांत है- ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’। वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर ऐसे स्थानों की लगातार पहचान की जा रही है जहां हस्तक्षेप की जरूरत है। एडीजी यातायात ए सतीश गणेश ने बताया, कैसे करें इंटरसेप्टर का उपयोग कार्यशाला में सड़क सुरक्षा, मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना विवेचना, आईआरएडी/ईडीएआर, ब्लैक स्पॉट, प्राथमिक उपचार और सीपीआर जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। एडीजी ट्रैफिक ए. सतीश गणेश ने ZFD कार्यक्रम और इंटरसेप्टर के प्रभावी उपयोग पर प्रस्तुतीकरण दिया। बरेली के जीटीओ/पीटीओ रमेश चंद्र प्रजापति ने प्रवर्तन उपकरणों और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं पर जानकारी दी। मेदांता अस्पताल के डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता ने सीपीआर और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी। कानपुर के थाना विधनू, बाराबंकी के थाना कोतवाली नगर और सुल्तानपुर के थाना कोतवाली नगर की क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को उत्कृष्ट कार्य के लिए डीजीपी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में अपर परिवहन आयुक्त मयंक ज्योति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। डीजीपी ने कार्यशाला में आए सुझावों को आगामी यातायात नीति में शामिल करने के निर्देश भी दिए ताकि सड़क सुरक्षा के प्रयास और मजबूत हो सकें।
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इस साल सड़क हादसों में 7% गिरावट, 1107 जानें बचाईं:जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम का असर, 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थलों को किया गया है चिन्हित
