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एकचारी में गणेश पूजा महोत्सव संपन्न, गूंजे गणपति के जयघोष:डांस प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल, झारखंड से पहुंचे कलाकारों ने बांधा समां; बच्चों ने भी जीता दिल




भागलपुर के एकचारी में अखंड समाज गणेश पूजा समिति की ओर से आयोजित चार दिवसीय पूजा महोत्सव का समापन हो गया। महोत्सव के आखिरी दिन नृत्य प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला हुआ। इसमें चुने गए कलाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने गणपति वंदना और अलग-अलग गानों पर डांस किया, पूरा परिसर तालियों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठा। फाइनल मुकाबले में बंगाल, झारखंड समेत कई राज्यों से कलाकार पहुंचे थे। उन्होंने अपनी कला और नृत्य प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। छोटे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। भगवान श्रीगणेश की पूजा-अर्चना विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ की गई। समिति के सदस्यों ने बताया कि पूजा काशी से आए पंडितों ने कराई। मंत्रोच्चार, आरती और गणपति बप्पा के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। दो पंचायतों के ग्रामीणों की एकजुटता बनी आयोजन की पहचान पूजा समिति के अध्यक्ष अनुपांत सिंह ने बताया कि अखंड समाज गणेश पूजा समिति में एकचारी और भूल से जुड़े दो पंचायतों के ग्रामवासी मिलकर शामिल होते हैं। चार दिवसीय आयोजन पूरे क्षेत्र के लोगों को एक मंच पर लाने का काम करता है। यहां गणेश पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम बन चुकी है। महोत्सव के दौरान हर वर्ष श्रद्धालुओं और ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता है। पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण गणेश प्रतिमा की विसर्जन शोभायात्रा होती है, जिसमें आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं। विसर्जन शोभायात्रा में करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की परंपरा रही है। गणपति की भक्ति ने बढ़ाया एकता और सामाजिक सौहार्द समिति के संयोजक सौरभ सुमन ने कहा कि जब से अखंड समाज गणेश पूजा समिति का गठन हुआ है, तब से क्षेत्र के लोगों में आपसी जुड़ाव और एकजुटता लगातार मजबूत हुई है। गणपति बप्पा की कृपा से पूजा की शुरुआत के बाद क्षेत्र में एक अलग तरह का धार्मिक और सामाजिक वातावरण देखने को मिलता है। पूजा समिति से जुड़े लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। गणेश पूजा के दौरान सभी लोग जाति-पंथ और आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर एक साथ भगवान गणेश की आराधना करते हैं। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता है।



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