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1958 में एक बोर्डिंग स्कूल में कक्षा नौ के छात्र रहे 14 साल के थॉम स्टीनबेक ने अपने पिता को पत्र लिख कर कहा कि उन्हें सुसान नाम की लड़की से प्यार हो गया है। बताएं कि अब उन्हें क्या करना चाहिए। पत्र के आखिर में उन्होंने पिता को यह भी समझाया कि उनकी भावनाओं को ‘पप्पी लव’ मानकर खारिज न करें, जिसके बारे में वे खुद अपनी किताबों में लिख चुके हैं। थॉम पिता को इतना निजी पत्र इसलिए लिख पाया, क्योंकि उसके पिता जॉन स्टीनबेक अमेरिका के महानतम लेखकों में से एक थे। आम लोगों, खासकर मजदूरों, प्रवासियों और कठिन हालात झेल रहे परिवारों के जीवन को बेहद वास्तविकता और संवेदनशीलता के साथ अपनी किताबों में उतारने के लिए उन्हें 1962 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। महामंदी के दौरान एक परिवार के संघर्षों पर आधारित उनकी मशहूर किताब ‘द ग्रेप्स ऑफ रॉथ’ को पुलित्जर मिला। अपने खुद के खेत का सपना देखने वाले दो प्रवासी मजदूरों की कहानी पर आधारित दूसरी चर्चित किताब ‘ऑफ माइस एंड मेन’ दुनिया भर के स्कूलों में पढ़ाई गई, मेरे स्कूल में भी। स्टीनबेक ने बेटे को जवाब देते हुए लिखा ‘अगर तुम्हें प्यार हुआ है तो यह अच्छी बात है। यह किसी के भी साथ हो सकने वाली सबसे अच्छी बात है। किसी को भी इसे मामूली या कमतर मत समझने देना।’ लेकिन साथ ही उन्होंने बेटे से प्यार के दो रूपों के बीच फर्क समझने को भी कहा। एक प्यार स्वार्थी, जकड़ने वाला और अहंकार से भरा होता है, जिसमें व्यक्ति खुद को बेहद अहम मानने लगता है। दूसरा, सामने वाले को अनोखा और मूल्यवान मानता है। उन्होंने बताया कि ‘पहला प्यार तुम्हें छोटा और कमजोर बनाएगा। लेकिन दूसरा तुम्हें ऐसी ताकत, साहस, नेकी और समझदारी से भर देगा, जिसके बारे में तुम्हें खुद भी पता नहीं था कि ये तुम्हारे पास हैं।’
मैं स्टीनबेक की नौ किताबें पढ़ चुका हूं, जिनमें ‘ईस्ट ऑफ ईडन’, ‘कैनरी रो’ और ‘द पर्ल’ शामिल हैं। जब मुझे अपनी पत्नी से प्यार हुआ तो मैंने उन्हें स्टीनबेक की अपने पालतू डॉग चार्ली के साथ अमेरिका यात्रा पर आधारित ट्रैवलॉग ‘ट्रैवल्स विद चार्ली’ गिफ्ट की थी। मैंने यह किताब इसलिए चुनी, क्योंकि मेरी पत्नी के पास भी स्नोई नाम का पालतू डॉग था, जो शादी के बाद ‘दहेज’ में हमारे घर आ गया। इसलिए मेरा मानना है कि स्टीनबेक ने पहले प्यार की चुनौती और गिफ्ट को बहुत अच्छे-से समझाया है। पहला प्यार आपको अपना सबसे अच्छा रूप खोजने में मदद कर सकता है, तब जबकि आपका दिल चुरा लिया गया हो और दिमाग काम करना बंद कर चुका हो। जिन पैरेंट्स के बच्चे टीनेज रोमांस से गुजर रहे हों, उन्हें यह समझना चाहिए कि यह दीवानापन हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर्स का मिला-जुला नतीजा है। नॉरएपिनेफ्रिन पेट में गुदगुदी करता है, एड्रेनालिन से हथेलियों में पसीना आता है और ऑक्सीटोसिन बॉन्डिंग बढ़ाता है। ब्रेन स्टडीज बताती हैं कि रोमांटिक प्रेम में वही रिवॉर्ड सर्किट एक्टिव होते हैं, जो ड्रग एडिक्शन में होते हैं। स्टीनबेक का पत्र आज भी इसलिए प्रासंगिक है, क्योंकि उसकी शुरुआत सम्मान से होती है। वे बेटे की भावनाओं पर हंसे नहीं, न खारिज और नजरअंदाज किया। पहले उन्होंने उसकी भावना स्वीकार की और फिर सही-गलत समझाया। आज भी पैरेंट्स के लिए यह सबसे असरदार तरीका हो सकता है। टीनेज लव को हैंडल करने के कुछ व्यवहारिक तरीके यहां पेश हैं: 1. भावनाओं का मजाक न उड़ाएं: आप उनका मजाक उड़ाएंगे तो वे प्यार करना नहीं, बल्कि आपसे बात करना छोड़ देंगे। फिर वे दोस्तों या सोशल मीडिया पर निर्भर हो जाएंगे और उसके खतरे आप समझते हैं।
2. सलाह से पहले उनकी सुनें: ‘यह लड़का या लड़की कौन है?’ इसके बजाय यह पूछें कि ‘तुम्हें इसमें क्या अच्छा लगा?’ या ‘इस रिश्ते से तुम्हें कैसा महसूस होता है?’ किसी लेक्चर की तुलना में इन सवालों से ज्यादा बातें सामने आएंगी।
3. आकर्षण और चरित्र का फर्क समझाएं: उनसे पूछें कि क्या वह इंसान दयालु, सम्मान देने वाला और ईमानदार है? क्या वो तुम्हें बेहतर बनने के लिए प्रोत्साहित करता है? स्वार्थी और उदार प्रेम के बीच स्टीनबेक ने जो फर्क बताया, वह 1958 की तुलना में आज के इंस्टाग्राम दौर में अधिक प्रासंगिक है।
4. उनकी डिजिटल लाइफ में दिलचस्पी लें: आजकल का रोमांस अधिकतर फोन पर ही होता है। इसलिए प्राइवेसी, ऑनलाइन मेनिपुलेशन, तस्वीरों की शेयरिंग, साइबर-बुलीइंग और डिजिटल फुटप्रिंट्स के हमेशा बने रहने के जोखिमों पर उनसे चर्चा करें। फंडा यह है कि जब प्यार आपके जीवन में दस्तक दे तो किसी ‘वेल-रेड’ व्यक्ति की तरह उसे शांति से संभालें।
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एन. रघुरामन का कॉलम:घर में आप ‘टीनेज लव’ को कैसे संभाले?
