चंडीगढ़ | निगम के रिकॉर्ड और इंटरनल कंट्रोल सिस्टम पर ऑडिट ने सवाल उठाए हैं। पाया कि निगम ने प्रॉपर्टीज का एसेट रजिस्टर मेंटेन नहीं किया, टैक्स और अन्य राजस्व के लिए डिमांड एंड कलेक्शन रजिस्टर नहीं रखा। वसूल की जाने वाली रकम और उसे राइट-ऑफ करने का रिकॉर्ड भी ठीक तरीके से नहीं रखा गया। पालतू जानवरों, उनके रजिस्ट्रेशन और जानवरों की देखभाल करने वाली एनजीओ से जुड़े रिकॉर्ड में भी कमियां मिली हैं। ऑडिट ने इसे निगम के इंटरनल कंट्रोल सिस्टम की कमजोरी माना है। ऑडिट ने प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य टैक्स की पूरी प्रक्रिया में कई कमियां पाई हैं। ऑडिट ने पालतू जानवरों के रिकॉर्ड को लेकर भी गंभीर कमी दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक पालतू जानवरों और उनके मालिकों का रिकॉर्ड और जानवरों की देखभाल के लिए निगम से वित्तीय सहायता पाने वाली एनजीओ का रिकॉर्ड भी मेंटेन नहीं किया गया। दो साल से निगम ने नहीं बनाई एनुअल एडमिनिस्ट्रेटिव रिपोर्ट ऑडिट में सामने आया है कि निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की एनुअल एडमिनिस्ट्रेटिव रिपोर्ट तैयार नहीं की। ऑडिट के दौरान विभाग न तो ये रिपोर्ट पेश कर पाया और न ही रिपोर्ट तैयार नहीं करने की कोई वजह बताई। इस संबंध में ऑडिट ने आपत्ति दर्ज की है। ये रिपोर्ट किसी भी विभाग की सेवाओं, उपलब्धियों और कामकाज का व्यापक ब्यौरा देती है। इसमें विभाग की उपलब्धियों, किए गए कार्यों और प्रबंधन की जवाबदेही से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। ऑडिट में कहा गया है कि एनुअल एडमिनिस्ट्रेटिव रिपोर्ट तैयार नहीं करने से चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मिलने वाली ग्रांट रोकी जा सकती है।
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ऑडिट ऑब्जेक्शन: न टैक्स की डिमांड-कलेक्शन का हिसाब, न रजिस्टर मेंटेन
