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"ऑल इज वेल, जिंदगी में उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं…":खाकी पर कलंक: भ्रष्टाचार में फंसी SHO सुनीता बावा ने कोर्ट के बाहर अपने अंदाज में बात




नितिन सिंगला,मोगा “ऑल इज वेल, जिंदगी में उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं…”“नौकरी में ऐसा होता है, जेल का मॉड्यूल शुरू हो गया है।” यह शब्द एनडीपीएस एक्ट केस में 50 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में विजिलेंस विभाग द्वारा गिरफ्तार की गई मोगा के ‘कोट इसे खां’ थाने की SHO सुनीता बावा के हैं। अदालत से बाहर निकालने के बाद उन्होंने पत्रकारों से इसी अंदाज में बाद की। उन्होंने एनडीपीएस एक्ट के मामले में नामजद ना करने के बदले में रिश्वत लेने का आरोप है। कोर्ट में भी अपने दबंग अंदाज में एंट्री करने के अंदाज से लग रहा था कि उसे अपनी इस गलती पर कोई अफसोस नहीं है। कांस्टेबल पद पर भर्ती होने वाली सुनीत बावा ने 15 साल की नौकरी में दो बार पेपर देकर सब इंस्पेक्टर के पद तक पहुंची। सब इंस्पेक्टर बनने के दौरान ही पैसा कमाने की ललक ने ड्यूटी के प्रति बेपरवाह बना दिया। हालत यह रहे कि सर्विस के दौरान ही भ्रष्टाचार करने को लेकर दर्जनों ही शिकायतें आल अधिकारियों व विजिलेंस विभाग के पास पहुंची, जिसमें कई शिकायतों की जांच अभी चल रही है, जबकि कई मामलों में सबूत के अभाव में गुनाह करने के बावजूद भी कानून के शिकंजे से बाहर रही।
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पछतावे की जगह बेपरवाही: “उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं…
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली और चिंताजनक बात यह रही कि जब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरी इस महिला अधिकारी को पुलिस बल के साथ मीडिया के कैमरों के सामने लाया गया, तो उनके चेहरे पर कानून का खौफ या अपने गुनाह का कोई पछतावा तक नहीं था।
एक तरफ जहां सलाखों के पीछे जाने पर किसी भी अपराधी के मन में ग्लानि का भाव होना चाहिए, वहीं सुनीता बावा के चेहरे पर एक अजीब सी बेपरवाही और मुस्कान तैर रही थी। मीडिया द्वारा जब उनसे सवाल किया गया, तो उनका बेहद फिल्मी और गैर-जिम्मेदाराना जवाब सामने आया— “ऑल इज वेल, जिंदगी में उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं…”। यह बयान महज चंद शब्द नहीं हैं, बल्कि यह उस गहरी मानसिकता को दर्शाता है जहां भ्रष्टाचार को अपराध न मानकर जीवन का महज एक ‘उतार-चढ़ाव’ मान लिया गया है।
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सत्ता और वर्दी का घमंड: जनता के भरोसे की हत्या
सुनीता बावा का यह रवैया इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि लंबे समय से सिस्टम के भीतर बैठे ऐसे अधिकारियों के मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। जब एक थाना प्रभारी (SHO) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाला अधिकारी खुलेआम घूसखोरी जैसे संगीन अपराध में पकड़े जाने के बाद भी बेशर्मी से मुस्कुराते हुए बयान दे, तो यह आम आदमी के उस भरोसे की सरेआम हत्या है, जो वह पुलिस और प्रशासन पर करता है। यह सोच इस बात की गवाही देती है कि भ्रष्टाचार अब कुछ लोगों के लिए कोई नैतिक पतन नहीं, बल्कि व्यवस्था का एक ऐसा ‘सहज हिस्सा’ बन चुका है, जिसके बेताज बादशाह वे खुद को मानते हैं।

खाकी की साख पर गहरा सवालिया निशान
विजिलेंस के शिकंजे में आने के बाद भी इस तरह का अड़ियल और बेपरवाह रवैया यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर विभागीय और कानूनी डर पूरी तरह बेअसर हो चुका है? जनता के बीच यह सवाल सुलग रहा है कि जब कानून के रखवाले ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगें और पकड़े जाने पर भी सीनाजोरी करें, तो समाज को न्याय की आस किससे होगी। सुनीता बावा का यह प्रकरण सिर्फ एक मामले की इतिश्री नहीं है, बल्कि यह उस सड़ी-गली व्यवस्था पर करारा तमाचा है जो वर्दी की आड़ में आम जनता का शोषण करने से बाज नहीं आती।

साल 2011 कांस्टेबल भर्ती हुई
आरोपी सुनीता बावा पंजाब पुलिस में साल 2011 में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुई थी। जिसके बाद उसने पंजाब पुलिस विभाग का बी-1 पेपर देक हेड कांस्टेबल की तरीकी हासिल की। जिसके बाद कुछ समय बाद उसने फिर से पेपर देकर सब इंस्पेक्टर की तरीकी हासिल की। सब इंस्पेक्टर का पद मिलने के बाद वह मोगा जिले के विभिन्न थानों में बतौर एसएचओ रह चुकी है, जबकि गिरफ्तार होने से पहले वह गांव’कोट इसे खां’ थाने की एसएचओ थी।

भ्रष्टाचार को लेकर विजिलेंस के पास है दर्जनों शिकायतें
आरोपी सुनीत बावा पर भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उसके खिलाफ दर्जनों शिकायतें पुलिस विभाग व विजिलेंस विभाग के पास पहुंची हुई है, जिनमें कई शिकायतों की जांच अभी चल रही है। विजिलेंस विभाग ने आरोपी इंस्पेक्टर की लंबित पड़ी शिकायतों की जांच एक बार फिर से शुरू कर दी है, जबकि विजिलेंस पुराने शिकायतकर्ता से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, ताकि मामले को ओर मजबूत किया जा सके।

कॉल डिटेल्स और संपर्कों की गहन पड़ताल
विजिलेंस ब्यूरो यह पता लगाने में जुटा है कि सुनीता बावा के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। विजिलेंस अधिकारी सुनीता बावा और उनके गनमैन गुरअवतार सिंह के मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स की तकनीकी जांच कर रहे हैं। यह देखा जा रहा है कि गिरफ्तारी से पहले किन-किन नंबरों पर लगातार बातचीत हुई थी। फोन से डिलीट किए गए संदेशों, चैट्स और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की डिजिटल फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह पहली बार था या इस खेल का पुराना नेटवर्क चल रहा था।

बिचौलियों की तलाश
पुलिस महकमे या बाहरी लोगों में ऐसे कौन लोग हैं जो इस तरह के मामलों में मिलीभगत या मध्यस्थता करते थे। किन लोगों के जरिए मामलों को रफा-दफा किया जाता था, इसकी एक-एक कड़ी जोड़ी जा रही है। वहीं एक महिला इंस्पेक्टर के पास अवैध कमाई का कितना साम्राज्य है, यह जानने के लिए विजिलेंस अब उनकी संपत्तियों की फाइलों को खंगाल रही है। सुनीता बावा और उनके परिवार के नाम पर दर्ज मकान, प्लॉट, कमर्शियल प्रॉपर्टी या कृषि भूमि के कागजात जुटाए जा रहे हैं।
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आय से अधिक संपत्ति का एंगल
विजिलेंस इस बात की जांच कर रही है कि उनकी वैध सैलरी के मुकाबले उनकी संपत्ति में कितना असंतुलन है। यदि उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाई जाती है, तो आने वाले दिनों में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक और नया मामला दर्ज किया जा सकता है। उनके और उनके करीबियों के बैंक खातों, फिक्स डिपाजिट और बैंक लॉकरों की जानकारी हासिल करने के लिए बैंकों को पत्र लिखने की तैयारी कर ली है।
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पिछले कार्यकालों और थानों की फाइलों की समीक्षा
चूंकि सुनीता बावा पहले भी कई अन्य संवेदनशील थानों में तैनात रह चुकी हैं, इसलिए विजिलेंस अब उनके पुराने कार्यकालों की भी समीक्षा कर रही है। उनके पिछले थानों में दर्ज उन मामलों को खंगाला जा रहा है जिन्हें संदिग्ध तरीके से रफा-दफा किया गया था या जिनमें फाइलें अटकाई गई थीं। पूर्व में उनके खिलाफ यदि कोई शिकायतें दी गई थीं, तो विजिलेंस उन्हें भी दोबारा फाइल पर लाकर यह जांच कर रही है कि भ्रष्टाचार का यह दायरा कितना पुराना और फैला हुआ था।



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