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कहीं जीत का जश्न, कहीं बोल गया 'मोरिया':बाड़ेबंदी में 'गणेशजी की आरती'; मंत्रीजी की थाली में 'रोटी की कमी'




नमस्कार, निकाय चुनाव का रिजल्ट आ गया। कहीं पुराने किले ढह गए, कहीं निर्दलीयों ने परचम लहराया। जो जीता वो सिकंदर बन गया, बाकी का ‘मोरिया’ बोल गया। बोर्ड बनाने के लिए बाड़ेबंदी का पैंतरा जारी है। कोटा में मंत्रीजी को अन्नपूर्णा रसोई में जली रोटी मिल गई तो बाड़मेर में दिग्गज नेता ने 100 रुपए बांटे। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. कहीं जीत का जोश, कहीं बोला ‘मोरिया’ अकाल सिर्फ बारिश न आने के कारण ही नहीं आता, वोट न मिलने से भी आता है। अजमेर में 36 साल से भाजपा का बोर्ड था। कांग्रेस के खाते में वोटों का अकाल था। इस बार सूखा खत्म हो गया। बड़े-बड़े दिग्गज भी धराशायी हो गए। मेयर मनने के सपने देखने वाली मैडम खुद हार गईं। कांग्रेस रेस में आगे निकल गई। हालांकि बहुमत किसी पार्टी को नहीं मिला। ऐसे में अब निर्दलीय प्रत्याशियों की दसों अंगुलियां घी में हैं और सिर… डीडवाना-कुचामन की परबतसर नगर पालिका में तो गजब ही हो गया। यहां वार्ड नंबर-13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद चुनावी मैदान में थे। जब रिजल्ट आया तो पता चला कि कैलाश जी को सिर्फ एक वोट मिला है। वह भी उन्होंने खुद को दिया होगा। बाकी घरवालों ने भी वोट नहीं दिया। यही हाल नागौर की रियांबड़ी नगर पालिका में कांग्रेस के मजीद मोहम्मद का हुआ। वे वार्ड 15 से मैदान में थे। उन्हें भी सिर्फ खुदका वोट मिला। चुनाव में जो जीत गए, उनका जश्न शुरू हो गया। गुलाल उड़ाई गई। ढोल-ताशे बजे। घर-घर धोक लगाने की रस्म शुरू हो गई। सीकर में जीतने वालों ने हारने वालों को चिढ़ा दिया। इस पर बात बढ़ गई। एक तो पहले ही मोरिया बोल गया। ऊपर से चिढ़ाना। ऐसा झगड़ा फसाद हुआ कि पुलिस पहुंची और डंडे से सुंताई करने लगी। हिदायत दी कि झुंड बनाकर जश्न मानने की दरकार नहीं। इधर श्रीगंगानगर में नगर परिषद का रिजल्ट आया। वार्ड 54 से भाजपा के अमरजीत गिल जीत गए। जैसे ही जीत की खबर मिली। गिल का बेटा गले लगकर रोने लगा। लगता है बेटे ने भी खूब पसीना बहाया था। पिताजी ने भी प्यार से गले लगाया, पुच्ची दी और बोले- अब सारी गंदगी साफ कर देंगे। नागौर और डीडवाना में तो कांग्रेस-बीजेपी के बीच सबसे कम वोट पाने का कॉम्पिटिशन हो गया। नागौर की रियांबड़ी नगर पालिका के वार्ड 15 से कांग्रेस के प्रत्याशी मजीद मोहम्मद को सिर्फ 1 वोट मिला। वहीं डीडवाना-कुचामन की परबतसर में वार्ड 13 में बीजेपी के कैलाश चंद को भी 1 ही वोट मिला। 2. जो हारे वो बाड़ाबंदी से बाहर कैसे-कैसे सपने लेकर प्रत्याशी बाड़ाबंदी में गए थे। रिजल्ट आया तो कइयों के दिल के अरमां आंसुओं में बह गए। गए तो थे 10 दिन की पैकिंग करके। लेकिन दो ही दिन की मौज काटकर लौट आए। हारने वालों का बाड़ाबंदी में क्या काम? अलवर के 65 वार्डों के कांग्रेस प्रत्याशी बाड़ेबंदी में जयपुर के एक रिसोर्ट में जुटे। तीज पर महिलाओं ने गणेशजी की आरती उतारी। पुरुष प्रत्याशी क्रिकेट का शौक पूरा करते रहे। जब उसने मौज-मस्ती के बारे में पूछा तो बोले- बीजेपी वाले तो पूल पार्टी कर रहे हैं। गानों पर नाच रहे हैं। हम तो फिर भी देवताओं की आरती कर रहे हैं। बोर्ड बनाने को लेकर बीजेपी वाले ज्यादा संजीदा रहे। चर्चा रही कि वे अपनों को लेकर बस से उत्तराखंड निकल गए। अलवर में कांग्रेस की बाड़ाबंदी में पुलिस घुस गई। बोली कि एक प्रत्याशी के किडनैप होने की सूचना मिली है। सारे प्रत्याशी मिलकर पुलिस से भिड़ गए। प्रत्याशी चिल्लाकर बोला- मैं अपनी मर्जी से आया हूं। उधर, बांसवाड़ा से कुंभलगढ़ पहुंचीं महिला प्रत्याशियों ने तीज पर एक दूसरे को मेहंदी लगाई। लॉन में बैठकर शिवलिंग बनाया। फिर ओम नम: शिवाय का जाप किया। 3. मंत्रीजी को जली हुई रोटी दे दी कुछ दिन पहले भरतपुर में एक गरीब उपभोक्ता को राशन डीलर से सड़े हुए गेहूं दे दिए थे। उपभोक्ता ने बड़ी दीनता से कहा था- क्या करें साहब, लेने पड़ेंगे, गरीब आदमी हैं। हालांकि वीडियो शेयर होने के बाद डीलरशिप जाने के डर से डीलर ने गेहूं चेंज कर दिए। लेकिन वीडियो नहीं आता तो गरीब को वही गेहूं खाने पड़ते। कभी-कभी गरीब की हाय लग जाती है। कोटा में पंचायतीराज मंत्रीजी अन्नपूर्णा रसोई का निरीक्षण औचक ढंग से करने पहुंच गए। उनके साथ दो-तीन अफसरनुमा लोग और थे। भोजन करने बैठ गए। मंत्रीजी और अन्य लोगों को जली हुई रोटियां परोस दी गईं। मंत्रीजी ने शिकायत की तो वहां परोसगारी कर रहा व्यक्ति भड़क कर बोला- मैं यहां काम थोड़े करता हूं। चावल मांगे तो पता चला कि चावल भी खत्म। मंत्रीजी सब्जी की तरी से भूख मिटाने लगे। अन्य लोग तरी में से आलू तलाशने लगे। किसी तरह निरीक्षण का काम निपटाकर जिम्मेदारों को निर्देश देते हुए निकल गए। 4. चलते-चलते… अब चलते-चलते बात सीमावर्ती जिले बाड़मेर की। यहां बरसों-बरस शिव विधानसभा सीट पर कांग्रेस के सीनियर नेता अमीन खान साहब का कब्जा रहा। उन्होंने इस सीट से 10 बार चुनाव लड़ा और 5 बार विधायक बने। चुनावी सीजन में अमीन खान भी पार्टी के लिए खूब घूमे। हालांकि वे संत-फकीर किस्म के प्राणी हैं। जो जंचती है कह जाते हैं, कर जाते हैं। यही कारण है कि पार्टी ने कुछ वक्ते के लिए उन्हें निकाल भी दिया था। अमीन खान जी का एक वीडियो सामने आया है। बताया जा रहा है कि वे शिव विधानसभा के दौरे पर थे। इस दौरान एक कार्यकर्ता टकरा गया। कार्यकर्ता के साथ दो बच्चियां। उन्हें देख साहब ने कुर्ते के ऊपर की जेब से 100 रुपए निकाले। एक बच्ची की तरफ बढ़ाकर बोले- अभी तो ये सौ रुपए दे रहा हूं। दोनों 50-50 बांट लेना। अकेली तू मत रख लेना। घटना का वीडियो संभवत: कार के ड्राइवर ने बनाया। वीडियो को कुछ लोगों ने नेताजी की दरियादिली कहा और कुछ ने चुनावी दरियादिली। इनपुट सहयोग- शक्ति सिंह (कोटा), धर्मेंद्र सिंह, साजिद खान (अलवर), संजय पटेल (बांसवाड़ा), सुरेंद्र माथुर (सीकर), सुनील जैन, भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।



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