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साल में एक फैमिली वैकेशन और उसके लिए पति, परिवार या दोस्तों की तारीखें मिलने का इंतजार… भारतीय महिलाओं में छुट्टी का यह तरीका बदल रहा है। अब वे खुद जगह चुन रही हैं, बजट तय कर रही हैं और साथ जाने वाला न मिले तो सोलो या महिलाओं के ग्रुप में निकल रही हैं। ट्रैवल-फिनटेक कंपनी स्कैपिया के अनुसार, कामकाजी महिलाओं की सोलो ट्रैवल बुकिंग एक साल में 9 गुना बढ़ी। इसमें फ्लाइट, ट्रेन, बस व होटल सभी बुकिंग शामिल हैं। क्लियरट्रिप ने भी सिर्फ महिला ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय यात्रा में 36% सालाना वृद्धि बताई। बदलाव यात्रा की वजहों में भी है। एसओटीसी ट्रैवल के प्रेसिडेंट एसडी नंदकुमार ने भास्कर को बताया कि महिलाएं सहेलियों से मिलने वे खुद के लिए समय निकालने को यात्राएं चुन रहीं। माताएं तरोताजा होने के लिए ‘मॉमकेशन’ ले रही हैं। बाइकिंग व रोमांचक गतिविधियों का ट्रेंड बढ़ा है। ब्लीजर ट्रेंड, ऑफिस ट्रिप में अब छुट्टी जोड़कर घूम रही हैं महिलाएं – महिलाओं की छुट्टियां अब सिर्फ गर्मी, त्योहार या परिवार के तय कैलेंडर से नहीं बंधी हैं। कॉरपोरेट महिलाओं में ‘ब्लीजर’ यानी ऑफिस ट्रिप में कुछ दिन छुट्टी जोड़कर घूमने का ट्रेंड भी बढ़ा है। यानी काम के लिए निकली यात्रा अब सीधे घर लौटने पर खत्म नहीं हो रही है। – ग्रुप इंटरनेशनल ट्रिप 4-5 महीने व हनीमून ट्रिप 60-75 दिन पहले बुक हो रही हैं। – पिकयोरट्रेल के अनुसार, मदर-डॉटर ट्रिप भी बढ़ रही हैं। ये समूह सामान्य पैकेज के बजाय अपनी पसंद के होटल, वेलनेस, फूड, संस्कृति और स्थानीय अनुभव जोड़कर कस्टमाइज्ड यात्रा बुक कर रहे हैं। सोलो सफर में भरोसा कैसे? यात्रा में अहम – महिला यात्री स्टाफ का व्यवहार – 50% लाइव ट्रैकिंग – 48% महिलाओं की बस रेटिंग – 47% अन्य महिला की मौजूदगी – 33% बोर्डिंग पॉइंट की सुरक्षा – 29% एडवेंचर की मांग 37% बढ़ी ट्रैवल अनुभव – मांग में वृद्धि एडवेंचर – 37% स्पा-वेलनेस – 28% क्रूज छुट्टियां – 23% ग्रुप में घूमना – 35% फूड-कुकिंग – 17% लग्जरी – 25% (स्रोत: थॉमस कुक इंडिया, विमेंस ट्रैवल ट्रेंड रिपोर्ट व अन्य रिपोर्ट्स।) सफरनामा, जेन-जी महिलाओं की पसंद मिड रेंज होटल, मिलेनियल में लग्जरी की मांग ज्यादा हर उम्र की महिलाओं की यात्रा पसंद अलग है। जेन-जी महिलाओं की करीब आधी होटल बुकिंग मिड-रेंज में होती हैं। वे जैसलमेर, उदयपुर, हम्पी, आगरा व वाराणसी जैसे हेरिटेज शहरों के साथ छोटे और नए ठिकाने भी चुन रही हैं। वहीं, 33% मिलेनियल महिला यात्री लग्जरी होटल चुन रही हैं। एक साल में महिलाओ का ट्रैवल बजट 20% बढ़ा है। विदेश यात्रा, महिलाओं के टॉप डेस्टिनेशन में 60% जगह ऐसी जहां एडवांस वीसा जरूरी नहीं महिलाओं की विदेश यात्राओं में दक्षिण-पूर्व एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप की 62.6% हिस्सेदारी है। थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका प्रमुख पसंद हैं। यूरोप की हिस्सेदारी 14% है, जबकि मध्य एशिया उभर रहा है। वहीं, टॉप डेस्टिनेशन में 60% से ज्यादा जगह एडवांस वीसा नहीं चाहिए। अपनी पसंद के अनुभव व आजादी की चाह से महिलाओं का सोलो सफर बढ़ा – महिलाएं यात्रा के फैसले खुद ले रही हैं। वे अपनी रुचियों को समय देने, आजादी महसूस करने और तरोताजा होने के लिए सोलो सफर चुन रही हैं। – नए हुनर की चाह भी है। महिलाएं थाईलैंड में थाई बॉक्सिंग, भूटान में तीरंदाजी व केरल में कलरीपयट्टु जैसी युद्धकला सीखने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। – रोमांचक यात्राओं की मांग भी बढ़ी है। महिलाएं लद्दाख में बाइकिंग, आल्प्स में स्नोबोर्डिंग और मैराथन में भाग लेने जैसे अनुभव चाहती हैं। – शेफ से खाना सीखने और संस्कृति को करीब से जानने व वेलनेस जैसे अनुभवों की मांग भी बढ़ी है।
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कामकाजी महिलाओं का सोलो ट्रैवल 9 गुना तक बढ़ा:73% यात्रा के फैसले खुद ले रहीं; 48% लाइव ट्रैकिंग की वजह से सुरक्षित महसूस कर रहीं
