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काशी व‍िश्‍वनाथ मंद‍िर पहुंचे ऋतेश्वर महाराज:बोले – ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने से आपसी सौहार्द बढ़ेगा




सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सोमवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। बाबा विश्वनाथ के दरबार में उन्होंने राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि काशी भगवान शिव की नगरी है और यहां आने का उद्देश्य बाबा विश्वनाथ से देश में सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना करना है। उन्होंने ‘हर हर महादेव, शंभू काशी विश्वनाथ गंगे’ का जयघोष भी किया। राहुल गांधी के मांसाहार वाले बयान पर बोले- उनके पास कोई आंकड़ा होगा राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें भारत की करीब 80 प्रतिशत आबादी के मांस-मछली खाने की बात कही गई थी, ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि उनके पास कोई आंकड़ा होगा, तभी उन्होंने यह बात कही होगी। हालांकि, उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि भारत की बहुसंख्यक जनता आज भी शाकाहार को प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जीव हत्या को उचित नहीं माना गया है। हालांकि उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में अलग तरह की खान-पान की परंपराएं होने की बात भी कही। उनका कहना था कि सामान्य तौर पर भारतीय सनातन परंपरा में अहिंसा और जीवों के प्रति करुणा को महत्व दिया गया है। काशी, अयोध्या और मथुरा को लेकर रखी बात सनातन धर्म और प्रमुख धार्मिक स्थलों के सवाल पर ऋतेश्वर महाराज ने काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन स्थानों से सनातनी हिंदुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। उनका कहना था कि इन धार्मिक स्थलों का महत्व केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की भावनाएं जुड़ी हैं। ज्ञानवापी परिसर को लेकर उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक परिस्थितियों में जो कुछ हुआ, उसकी वजह से आज विवाद की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानवापी को हिंदुओं को सौंप दिया जाता है तो इससे आपसी सौहार्द बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी समुदायों को मिलकर ऐसे मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। ‘काशी में सदियों से लहरा रहा है भगवा’ ऋतेश्वर महाराज ने कहा – काशी स्वयं भगवान शिव की नगरी है और यहां भगवा सदियों से लहरा रहा है। उन्होंने भगवा को सूर्य और ज्ञान का प्रतीक बताते हुए कहा कि काशी ज्ञान और वैराग्य की भूमि है। उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जबकि भगवा भारतीयों के हृदय में है। उन्होंने कहा काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवा ध्वज निश्चित रूप से फहरेगा और देश के तीर्थस्थलों में भगवा ज्ञान और सनातन परंपरा का प्रतीक है। ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि काशी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने लोगों से देश की एकता, शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की अपील की। ‘राष्ट्र में सुख-समृद्धि हो, कोई अशांति और दंगे न हों’ उन्होंने कहा कि देश में सुख-समृद्धि हो, किसी तरह की अशांति और दंगे न हों और सभी लोग मिल-जुलकर रहें। यही बाबा से प्रार्थना की है।



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