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किशोरों की पुरुष प्रधान सोच से स्कूलों में चिंता:महिला-विरोधी सोच बदलने के लिए सिलेबस जोड़ रहे कई देश




इन दिनों कई प्रगतिशील माने जाने वाले देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ‘मैनोस्फीयर’ स्कूलों के लिए चिंता का विषय बन रही हैं। ‘मैनोस्फीयर’ ऑनलाइन पुरुष समुदायों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का एक ऐसा नेटवर्क है, जो मर्दानगी की आक्रामक और छोटी सोच को बढ़ावा देता है। शिक्षक और विशेषज्ञ यह देख रहे हैं कि 12 से 17 वर्ष के छात्र ऑनलाइन दिखने वाले इन विचारों को वास्तविक जीवन और कक्षाओं में अपना रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने करीब 2,000 सोशल मीडिया वीडियो का अध्ययन किया। इनमें कई वीडियो में महिलाओं के प्रति नफरत या यौन हिंसा को सामान्य बताने वाली बातें मिलीं। किशोरों के बीच बढ़ती ऐसी प्रवृत्ति को रोकने के लिए कई देश पाठ्यक्रम में सुधार कर रहे हैं। इंग्लैंड, नीदरलैंड्स, बेल्जियम जैसे यूरोपीय देश बच्चों में इस तरह की ऑनलाइन सोच पहचानने और उसका विरोध करने के लिए एजुकेशनल कंटेंट तैयार कर रहे हैं। यही नहीं ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी ऐसी तैयारी हो रही है। इंग्लैंड में ऑनलाइन महिला-विरोधी भावना के बारे में पढ़ाना जरूरी किया जा रहा है। यॉर्क यूनिवर्सिटी की मनोविज्ञान प्रोफेसर हैरियट ओवर इसके लिए करिकुलम बनाने में मदद कर रही हैं। उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट पर मिलने वाली गलत सूचनाओं, लैंगिक भेदभाव को समझने और उन्हें दूर करने में सक्षम बनाना है। नीदरलैंड्स – ओटीटी सीरीज पर चर्चा के जरिए भी बच्चों को सिखा रहे नीदरलैंड्स के शिक्षा विभाग ने किशोरों में पनप रही इस समस्या को गंभीरता से लिया है। एक सर्वे में आधे से ज्यादा हाई स्कूल स्टाफ ने कहा कि पिछले चार वर्षों में लड़कों के ऐसे व्यवहार बढ़े हैं, जिनका संबंध इंटरनेट पर फैल रही इस सोच से हो सकता है। नीदरलैंड्स के वार्न्सवेल्ड शहर कुछ स्कूलों में ओटीटी सीरीज ‘एडोलेसेंस’ के जरिए लड़कों से मर्दानगी, सहकर्मी दबाव, ऑनलाइन बदमाशी और महिलाओं के प्रति नफरत जैसे मुद्दों पर चर्चा कराई जा रही है। स्कूलों में ओटीटी सीरीज के जरिए चर्चा कराने का विचार ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के समर्थन के बाद तेजी से आगे बढ़ा है।



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