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कोटा की राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (RTU) के हॉस्टल में गुरुवार को फर्स्ट ईयर स्टूडेंट की मौत के बाद छात्रों में अव्यवस्थाओं को लेकर आक्रोश है। यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में अव्यवस्थाओं को लेकर स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वित्त एवं लेखा कार्यालय के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया। सहायक लेखाधिकारी (प्रथम) जितेंद्र साहू, कनिष्ठ लेखाकार दीपक यादव और कनिष्ठ लेखाकार लोकेश सैनी को निलंबित किया गया है। यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. निमित चौधरी ने बताया अनुशासनहीनता के कारण एक्शन लिया है। तीनों को दो-तीन बार समझाया था। घटना से एक दिन पहले (बुधवार) तीनों को निलंबित कर दिया गया। वहीं दैनिक भास्कर ने मौके पर जाकर हॉस्टल के हालात देखे। ऐसे में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले करीब 2 हजार स्टूडेंट्स हॉस्टल में खतरे के साए के बीच रहने को मजबूर हैं। हॉस्टल के डेढ़ किलोमीटर हिस्से में स्टूडेंट्स को आए दिन सांप, अजगर, मॉनिटर लिजार्ड (गोह) और अन्य वन्यजीव नजर आ जाते हैं। इस इलाके में 5 में से 4 हॉस्टल काफी पुराने हैं। लंबे समय से इनका रिनोवेशन नहीं हुआ। हॉस्टल के कमरे में खिड़कियों की मच्छर जालियां टूटी हुई हैं। इनमें से जहरीले जानवर घुस आते हैं। कुछ कमरे के गेट भी टूट रहे हैं। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी कैंपस में केवल एक डिस्पेंसरी है। जो केवल 4-5 घंटे ही खुलती है। अब देखिए ये 7 फोटोज… स्टूडेंट्स बोले- स्ट्रीट लाइट बंद, जगह-जगह हालात बदतर दैनिक भास्कर से बातचीत में हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स ने कार्रवाई के डर के कारण कैमरे पर नहीं बोला। कैमरा ऑफ करने और नाम नहीं छापने की शर्त के बाद स्टूडेंट्स से अपना दर्द बयां किया और हॉस्टल के हालात दिखाए। शाम 6 बजे बाद स्टूडेंट्स की गाड़ियों की नो एंट्री: शुरुआत यूनिवर्सिटी के मेन गेट से की। स्टूडेंट्स ने बताया- हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं की गाड़ियों को शाम 6 बजे बाद अंदर नहीं ले जाने दिया जाता। गाड़ियों को मेन गेट पार्किंग पर खड़ा करवा लिया जाता है। वहीं स्टाफ की गाड़ियों को नहीं रोका जाता। 8 हॉस्टल में रहते 2 हजार स्टूडेंट्स: यूनिवर्सिटी में 8 गर्ल्स और बॉयज हॉस्टल हैं। इनमें दो हजार स्टूडेंट्स रहते हैं। शाम को मेन गेट से स्टूडेंट्स को पैदल ही डेढ़ किलोमीटर का सफर करके हॉस्टल (भास्कर भवन) जाना पड़ता है। इस इलाके में 5 बॉयज हॉस्टल हैं। इसी एरिए में बड़ी-बड़ी जंगली घास, पेड़-पौधे उगे हुए हैं। जंगली घास की कटाई नहीं हो रही। यहां लगी स्ट्रीट लाइट ज्यादातर खराब रहती है या बंद पड़ी है। स्टूडेंट्स को अंधेरे में जाना पड़ता है। बाथरूम की स्थिति खराब: बाथरूम की स्थितियां खराब हैं। कई जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ है। खिड़कियों में जंग लगा है। छत पर रखी कुछ पानी की टंकियों के ढक्कन गायब हैं। एक डिस्पेंसरी, 5 घंटे ही खुलती: यूनिवर्सिटी कैंपस में केवल एक डिस्पेंसरी है। जो केवल 4-5 घंटे ही खुलती है। डॉक्टर भी कभी-कभी मिलते हैं। हॉस्टल में इतना बड़ा कैंपस और इतने स्टूडेंट रहते हैं। कोई इमरजेंसी हो जाए तो स्टूडेंट्स को एंबुलेंस तक नहीं मिल पाती। स्टूडेंट्स से डवलपमेंट के नाम पर फीस ली जाती है, लेकिन सुविधा नहीं दी जाती। वीसी बोले- आजकल प्रोटेस्ट फैशन बन गया… फैसिलटी बढ़ाएंगे यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. निमित चौधरी से दैनिक भास्कर ने विशेष बातचीत की। सवाल- आपने स्टूडेंट्स से बातचीत की, लेकिन स्टूडेंट्स अभी प्रोटेस्ट कर रहे हैं? जवाब- मुझे जो समझ में आया, उनकी मांगों में और हमारे इरादों में कोई फर्क नहीं है। जो स्टूडेंट्स चाहते हैं, वो हम करना चाहते हैं और पहले से कर रहे हैं। दोनों एक ही बात है। बहुत समय से रिपेयर और मेंटेनेंस का काम नहीं हुआ। हमने इन कामों को एजेंडे में ले रखा है। स्टूडेंट्स लिखित में आश्वासन मांग रहे हैं। मैं लिखित में देने को तैयार हूं। सवाल- यूनिवर्सिटी में मेडिकल फैसिलिटी की व्यवस्था ठीक नहीं है? जवाब – ऐसा नहीं है, डिस्पेंसरी की बिल्डिंग पुरानी है। मैं बिल्डिंग और संसाधन देखने जाऊंगा। डिस्पेंसरी में दो डॉक्टर और एक नर्स हैं। इनसे बात करके डॉक्टर का टाइम सेट करने के लिए बोला है। एक शिफ्ट में डॉक्टर आए, दूसरी में दूसरा डॉक्टर आए। ताकि डिस्पेंसरी में 13-14 घंटे डॉक्टर उपलब्ध रह सके। बाकी रात के लिए मेडिकल कॉलेज से भी बात करके व्यवस्था कर सकें। डिस्पेंसरी में 24 घंटे गाड़ी की व्यवस्था कर दी। इमरजेंसी में किसी को जरूरत पड़ेगी तो गाड़ी तैयार रहेगी। सवाल- लंबे समय से रिनोवेशन का काम नहीं हुआ? सवाल- यह कैंपस 50 साल पुराना है। आसपास फॉरेस्ट इलाके हैं। छतें टपकना, साफ-सफाई नहीं होना, ये बड़ा मुद्दा है। इसमें ज्यादा पैसा लगेगा। सरकार का प्रोसेस है। इसमें थोड़ा सा टाइम लगेगा। सवाल- स्टूडेंट को पैदल हॉस्टल जाना पड़ता है? जवाब- अब नई व्यवस्था के तहत हॉस्टल तक स्टूडेंट्स बाइक ले जा सकेंगे। सवाल- क्या हॉस्टल्स में स्पेस की कमी है? जवाब- हॉस्टल में जगह की कमी नहीं है। हर यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की सीमित कैपेसिटी होती है। हमारे यहा हॉस्टल में लड़कियों के लिए 260 और लड़कों के लिए 350-400 की व्यवस्था है। वहीं कैपेसिटी से ज्यादा स्टूडेंट है। इस बार हमने ज्यादा मेहनत की। RTU के इतिहास में पहली बार इतने एडमिशन हुए। विदेशों में हॉस्टल का कॉन्सेप्ट नहीं है। आज भी स्टूडेंटस से कहा है कि आप दो-तीन महीने रह लिए। आपकी सालभर की फीस लौटा देते हैं। आप अपनी व्यवस्था कर लो। 4 स्टूडेंट्स के लिए एक बाथरूम की व्यवस्था है, जबकि 6 स्टूडेंट्स इस्तेमाल कर रहे हैं। सवाल- कैंपस में वन्यजीव भी आते हैं? जवाब- ये पूरी बेल्ट फॉरेस्ट एरिया है। जब कैम्पस बना था। जब यहा जंगल था। अब बच्चों ने 30-40 कुत्तों को हॉस्टल में पाल रखा है। उनको खाना देते हैं। ये कुत्ते किसी को काट लेते हैं। दिल्ली से मेरी स्टूडेंट आई थी। उसे मेरे ऑफिस के सामने कुत्ते ने काट लिया। हम कुत्तों को हटाने का अभियान शुरू करेंगे। फिर बातें होने लगेगी। आज हमने डिसाइड किया है कि बच्चों को एनिमल से कैसे डील करना है, उसकी काउंसलिंग करेंगे। ——————- ये खबर भी पढ़ें राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में स्टूडेंट की मौत:रात को सोया, सुबह उठा नहीं; धरने पर बैठे छात्रों को पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ा कोटा RTU में दूसरे दिन भी स्टूडेंट्स का धरना जारी:यूनिवर्सिटी प्रशासन से लिखित में आश्वासन की मांग पर अड़े, वीसी बोले-कैंपस 50 साल पुराना
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कोटा RTU में खतरे में रहते 2 हजार स्टूडेंट:डेढ़ किमी जंगली रास्ते से पैदल गुजरते; आए दिन दिखते सांप-गोह; 5 घंटे ही खुलती डिस्पेंसरी
