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झारखंड के दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में विकास के दावे सिर्फ कागजों पर दिख रहे हैं। राज्य के कई जिलों की जमीनी हकीकत प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रही है। ऐसी ही एक तस्वीर कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड की बंगाखलार पंचायत के भुलाटोला, मौलवीबागी और बाराटोला गांवों से सामने आई है। यहां आज भी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जिसका असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सभी पर पड़ रहा है। बरसात के दिनों में समस्या सबसे ज्यादा बढ़ जाती है इन गांवों को जोड़ने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही कोई पुल-पुलिया। वैसे तो ग्रामीणों को हमेशा परेशानी होती है, लेकिन बरसात के दिनों में समस्या सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। बरसात में इन गांवों के बीच से गुजरने वाली नदी उफान पर रहती है। इससे आसपास के गांवों से इनका संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। छोटे बच्चे घरों में ही कैद होकर रह जाते हैं छात्रों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है, जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। बड़े बच्चे तो किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन छोटे बच्चे घरों में ही कैद होकर रह जाते हैं। ग्रामीण फोदार सिंह ने बताया कि गांव में कई समस्याएं हैं, लेकिन मुख्य समस्या गांव के बीच से गुजरने वाली नदी है। बरसात में अगर कोई गर्भवती महिला होती है, तो उसका प्रसव भगवान भरोसे ही होता है। गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित उन्होंने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। चुनाव के समय नेता वादों की लंबी लिस्ट लेकर आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही स्थिति वैसी ही बनी रहती है। इधर, एक स्कूली छात्रा लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि पढ़ाई करना भी जरूरी है। ऐसे में हम छात्रों को प्रतिदिन जान को जोखिम में डालकर विद्यालय जाना पड़ता है। मुखिया शिव शंकर रॉय ने बताया कि समस्या तो काफी गंभीर है। कई बार इस समस्या को लेकर विभाग को पत्राचार किया गया है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर भी इस समस्या से अवगत कराया गया है लेकिन विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। इधर, प्रखंड विकास पदाधिकारी भोला पांडेय ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। पंचायत सचिव से स्थल निरीक्षण कर जल्द से जल्द इसके निदान का कार्य की बात कही गई है।
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कोडरमा के गांव में बरसात में ग्रामीण घरों में कैद:न सड़क न पुलिया, नदी उफान पर; बच्चे जान जोखिम में डाल स्कूल जाने को मजबूर
