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खगड़िया में बाढ़ से 1.59 लाख लोग पानी में:40 सामुदायिक रसोई-128 नावें चल रहीं; 6 बोट एंबुलेंस, 85 हैंडपंप-49 अस्थायी शौचालय लगाए गए




खगड़िया जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बाढ़ प्रभावित और विस्थापित परिवारों को सुरक्षित जगह, भोजन, स्वास्थ्य, पीने का पानी, साफ-सफाई और आने-जाने की सुविधाएं दी जा रही हैं। बच्चों की पढ़ाई, पोषण और महिलाओं-लड़कियों की जरूरतों का भी खास ध्यान रखा जा रहा है। 8 सितंबर 2026 तक जिले में 37,070 परिवारों के कुल 1,59,492 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन लोगों को तुरंत भोजन देने के लिए जिले में 40 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। अब तक करीब 7,000 पॉलीथीन शीट बांटी जा चुकी हैं। साफ पीने के पानी और साफ-सफाई के लिए 85 अस्थायी हैंडपंप और 49 अस्थायी शौचालय लगाए गए हैं। 6 बोट एंबुलेंस से मिल रही स्वास्थ्य सुविधा बाढ़ प्रभावित इलाकों में इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए 6 बोट एंबुलेंस लगातार काम कर रही हैं। इनमें गोगरी अंचल में 2, मानसी में 1 और खगड़िया अंचल में 3 बोट एंबुलेंस शामिल हैं। पानी भरे और मुश्किल इलाकों में मेडिकल टीमें बोट एंबुलेंस से पहुंच रही हैं। वे लोगों की जांच, इलाज और जरूरी दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इसके अलावा, राहत और बचाव के लिए 128 नावें भी चलाई जा रही हैं, ताकि लोग सुरक्षित आ-जा सकें। आश्रय स्थलों पर भोजन और जरूरी सुविधाएं मध्य विद्यालय उसरी में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए एक आश्रय स्थल बनाया गया है। यहां रहने के साथ-साथ सामुदायिक रसोई, स्वास्थ्य कैंप और दूसरी जरूरी सुविधाएं दी गई हैं। इसी तरह NH-31 बालुआही में विस्थापित परिवारों के लिए तय किए गए आश्रय स्थल पर भी सामुदायिक रसोई शुरू की गई है। यहां भोजन के साथ पीने का पानी, अस्थायी शौचालय, हैंडपंप, बिजली और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने विस्थापित परिवारों से अपील की है कि वे NH-31 पर बेवजह न रुकें और तय गति सीमा का पालन करें। सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचने के लिए प्रशासन उनकी मदद भी कर रहा है। डीएम ने किया राहत व्यवस्थाओं का निरीक्षण जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने खेल भवन, खगड़िया में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तैयार किए जा रहे ड्राई राशन पैकेट की पैकेजिंग का निरीक्षण किया। उन्होंने तैयार पैकेटों के वजन का रैंडम सत्यापन किया और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, पैकेजिंग प्रक्रिया तथा वितरण की तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण राशन पैकेट तैयार कर समय पर प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके बाद जिलाधिकारी ने बापू मध्य विद्यालय में संचालित सामुदायिक रसोई और बाढ़ आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ बैठकर भोजन किया और भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों से सीधे संवाद कर भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य, आवासन समेत अन्य सुविधाओं के संबंध में फीडबैक लिया तथा समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। इसके बाद मध्य विद्यालय उसरी पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर विशेष ध्यान बाढ़ के बीच बच्चों की शिक्षा और पोषण को प्रभावित होने से बचाने के लिए भी प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए गोगरी में 165, खगड़िया में 195 और परबत्ता में 315 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी नैपकिन का वितरण भी किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि आपदा की परिस्थितियों में भी बच्चों की पढ़ाई, पोषण और महिलाओं की आवश्यक सुविधाएं बाधित न हों। घाटों से नावों का परिचालन, शिकायत के लिए हेल्पलाइन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए विभिन्न घाटों से नावों का परिचालन जारी है। नाव परिचालन से संबंधित किसी भी शिकायत या समस्या के लिए DEOC, खगड़िया के फोन नंबर 06244-222384 पर सूचना देने की अपील की गई है, ताकि आवश्यक कार्रवाई शीघ्र की जा सके। जिला प्रशासन के अनुसार, बदलती बाढ़ की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत शिविरों, सामुदायिक रसोई, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, स्वच्छता, नाव परिचालन और राहत सामग्री वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए राहत एवं बचाव कार्य पूरी तत्परता और समन्वय के साथ जारी रहेगा। बाढ़ से जुड़ी कुछ और तस्वीरें…



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