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नमस्कार, कांग्रेस में कार्यकर्ता अपने नेता के नारे लगाने से डर रहे हैं, उधर गहलोत जी का कहना है विरोधी फूट डाल रहे हैं। डीग के सरकारी स्कूल में दो मास्टर जी खाली क्लासरूम में सोते हुए पकड़े गए और किशनगढ़ के यूजर ने रेस्क्यू का वीडियो बनाने के लिए ढूंढ लिया डमी अभ्यर्थी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. नारों से डर लगता है साहब! 2010 में आई एक फिल्म का संवाद है- थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, प्यार से लगता है। यही संवाद अगर राजस्थान कांग्रेस पर फिट किया जाए तो कुछ यूं कहा जाएगा- यारों से डर नहीं लगता साहब, नारों से लगता है। जयपुर में जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक हो रही थी। जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा के नारे लगने लगे। जिलाध्यक्ष ने तुरंत कार्यकर्ताओं को टोका। बोले- अब किसी भी व्यक्ति के नारे नहीं लगेंगे। कार्यकर्ता साइलेंट। जिलाध्यक्ष फिर बोले- नारे ही लगाने हैं तो राहुल गांधी के लगाओ, मल्लिकार्जुन खड़गे के लगाओ और कांग्रेस पार्टी के लगाओ। कार्यकर्ता धीरे-धीरे बात को समझते हैं। नारों का प्रोटोकॉल लागू हो चुका था। विधायक रफीक खान संबोधित करने उठे। उत्साही कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया- रफीक खान जिंदाबाद। रफीक साहब ने तुरंत कार्यकर्ताओं की लगाम खींची। इशारा किया, बोले- नहीं। नारे मत लगाओ। बोले- कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद। कार्यकर्ताओं ने दोहराया- कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद। नारों का यह बखेड़ा महेंद्र जीत मालवीय जी के समर्थकों से शुरू हुआ था। पूर्व सीएम को अगला सीएम देखने को उत्सुक कार्यकर्ताओं ने ‘चौथी बार’ की दुहाई दी थी। यह संगठन के चीफ को पसंद नहीं आया। चीफ ने ऐलान किया- CM का नारा लगाने की जरूरत नहीं। एक ही आलाकमान है- राहुल गांधी। इसके बाद कोटा के पुराने नेताजी का नया बयान सुर्खियों में आया। बोले- राजस्थान का आलाकमान तो गहलोत ही है। दिल्ली वाला आलाकमान दूसरा है। इस आपदा में भाजपा को अवसर दिखा। प्रवक्ता रामलाल जी ने भविष्यवाणी की। बोले- देखते जाओ। आने वाले समय में कांग्रेस की अन्तर्कलह बढ़ती जाएगी। अब निगाह कांग्रेस पर है। एकजुट होकर लड़ेंगे या आपस में। 2. प्राइवेट स्कूल, सरकारी स्कूल और मास्टर जी कोटपूतली के बानसूर में एक प्राइवेट स्कूल है। स्कूल चल रहा था। इस दौरान एक जागरूक नागरिक स्कूल के पास से गुजरा। उसने देखा कि टेबल पर एक छात्र को लिटा रखा है। कुछ मास्टरों ने उसके हाथ-पैर पकड़े हुए हैं और छात्र के तलवों पर डंडे मारे जा रहे हैं। नागरिक को दाल में काला दिखा। उसने मोबाइल निकाला और वीडियो बना लिया। वीडियो में बताया- देखो भाइयों स्कूल में छात्र की बेरहमी से पिटाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो हाथों-हाथ सर्कुलेट हो गया। इसके बाद स्कूल का डायरेक्टर प्रकट हुआ। उसने सफाई अभियान चलाया। बताया- वह जो उस नागरिक ने देखा, छात्र की पिटाई का दृश्य नहीं था। हम तो एक नाटक तैयार कर रहे हैं। जिसका मंचन 15 अगस्त को होना है। हमारा तो रिहर्सल चल रहा था। प्राइवेट स्कूल में तो 15 अगस्त का रिहर्सल चल रहा था, लेकिन डीग के ठेक का बास गांव के सरकारी स्कूल में क्या चल रहा है? यहां दो मास्टर जी एक खाली क्लासरूम में आराम से सो रहे थे। यहां भी एक जागरूक नागरिक फोन को ऑन करके स्कूल में घुस गया और नींद में खलल डाल दी। खलल डालने तक तो ठीक। लेकिन चुभता सा सवाल भी पूछ लिया- सोने की तनख्वाह लेते हो क्या? 3. चलते-चलते.. अजमेर के किशनगढ़ में एक इन्फ्लूएंसर है। वह जानवरों को रेस्क्यू करने के वीडियो बनाता है। वीडियो लाइक और सब्सक्राइब के लिए बनाता है। कई वीडियो सांप का रेस्क्यू करते हुए बनाए हैं। वीडियो देखकर लगता है कि जंगल में भेड़ चरा रहे चरवाहे को कोबरा सांप ने लपेट लिया। सांप कभी गले पर रेंगता है, कभी सीने पर और कभी हाथों पर। चरवाहा दम साधे पड़ा रहता है। रेस्क्यू टीम उसे निर्देश देती है कि क्या नहीं करना। वीडियो में हर क्षण यही लगता है कि सांप किसी भी वक्त चरवाहे को डस लेगा। लेकिन जिसे आप चरवाहा समझ रहे हैं वह तो एक डमी है। इस पूरी टीम का एक पात्र, जो कभी चरवाहा बन जाता है तो कभी किसान। इन्फ्लूएंसर का वीडियो बनाने के लिए खुद जोखिम उठाता है। ठीक उसी प्रकार, जैसे एक डमी अभ्यर्थी किसी और को आगे बढ़ाने के लिए जोखिम के बावजूद परीक्षा देने पहुंच जाता है। इनपुट सहयोग- अंकित ढाका (जोधपुर), मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग), धर्मसिंह यादव (कोटपूतली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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गहलोत की दो टूक- विरोधी डाल रहे फूट:मास्टरजी ले रहे 'सोने की तनख्वाह'?; युवक के ऊपर रेंगता रहा कोबरा
