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गिरिडीह में 2 हार्डकोर माओवादियों का कोर्ट में सरेंडर:2008 के पुलिस-माओवादी मुठभेड़ में था हाथ, लंबे समय से फरार थे




माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सोमवार को 2008 के चर्चित पुलिस-माओवादी मुठभेड़ कांड में वांछित दो माओवादियों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में सीताराम सोरेन और पवन कुमार मुर्मू उर्फ शिवलाल मुर्मू शामिल हैं। दोनों ने जिला जज वन कंवलजीत चौपड़ा की अदालत में सरेंडर किया। अदालत ने दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए जेल भेज दिया। दोनों लंबे समय से इस मामले में फरार चल रहे थे। पुलिस के अनुसार, दोनों के खिलाफ वर्ष 2008 में हुए मुठभेड़ से जुड़े मामले में प्राथमिकी दर्ज थी। मामले में कई अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, जबकि कुछ माओवादियों ने बाद में आत्मसमर्पण भी किया था। बंद के दौरान रेलवे ट्रैक और जीटी रोड पर बड़ी घटना की थी तैयारी मामला सात अगस्त 2008 को बुलाए गए उत्तरी छोटानागपुर बंद से जुड़ा है। हजारीबाग जिले में उग्रवादियों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद भाकपा माओवादी संगठन ने बंद का आह्वान किया था। इसे देखते हुए पुलिस ने रेलवे ट्रैक, जीटी रोड समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर गश्ती बढ़ा दी थी। इसी दौरान रात करीब आठ बजे पुलिस को सूचना मिली कि माओवादी रेलवे ट्रैक और जीटी रोड पर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में हैं। सूचना के बाद निमियाघाट थाना प्रभारी, सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट समेत जिले के कई पुलिस अधिकारी और जवान गश्ती पर निकले। रात करीब 11 बजे पुलिस टीम लक्ष्मण टुंडा के समीप एक पुलिया के पास पहुंची। प्राथमिकी के अनुसार, वहां पहले से घात लगाए करीब 50 से 60 माओवादियों ने पुलिस टीम को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। करीब 600 राउंड चली थीं गोलियां, दो जवानों की इलाज के दौरान मौत अचानक हुई फायरिंग के बाद पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गयी। प्राथमिकी के अनुसार, पुलिस की ओर से करीब 400 राउंड और माओवादियों की ओर से करीब 200 राउंड गोलियां चलायी गयी थीं। मुठभेड़ में सीआरपीएफ के जवान राम सिंह धामी और कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह को गोली लगी थी। दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। इस मामले में तत्कालीन एसआई अहमद अली के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। बाद में पुलिस ने मामले में कई माओवादियों को गिरफ्तार किया, जबकि कुछ ने आत्मसमर्पण किया। कांड का नेतृत्वकर्ता बताया गया नवीन मांझी भी इस मामले में जेल में बंद है। अब लंबे समय से फरार चल रहे सीताराम सोरेन और पवन कुमार मुर्मू के अदालत में आत्मसमर्पण के बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।



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