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गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के 10 गांवों की करीब 9 हजार आबादी अब भी बाढ़ की चपेट में है। गांवों के अंदर और बाहर पानी भरा हुआ है। निचले इलाकों में कई घरों में पानी घुसने से लोग चारपाई और तख्त पर रहने को मजबूर हैं। वहीं, खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। बीते 24 घंटे से घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। शुक्रवार सुबह 8:30 बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 33 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शुक्रवार सुबह गिरजा, शारदा और सरयू बैराज से कुल 2 लाख 89 हजार 165 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलस्तर घटने के बावजूद गांवों में जमा पानी निकलने में समय लग रहा है। सड़कों पर पानी होने से लोगों का आवागमन नाव के सहारे हो रहा है। बाढ़ ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी के साथ बच्चों की पढ़ाई और पशुपालन को भी प्रभावित किया है। पानी भरे होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। किसानों के सामने फसलों के साथ पशुओं के चारे का भी संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ से पहले निचले इलाकों में रखा सूखा चारा पानी में डूबकर खराब हो गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को लंच पैकेट और राहत सामग्री दी जा रही है, जबकि कुछ परिवार सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। घरों में घुसा पानी, चारपाई-तख्त पर रहने को मजबूर निचले इलाकों के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पानी भरने के कारण ग्रामीणों को घर के अंदर चारपाई और तख्त पर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। सड़कों और रास्तों पर पानी भरने से गांवों में आवागमन भी प्रभावित है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नावों की व्यवस्था की है। बच्चों की पढ़ाई बंद, पानी में मछली पकड़ रहे गांवों में पानी भरा होने के कारण बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं। स्कूल जाने के बजाय कई बच्चे बाढ़ के पानी में मछली पकड़ते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव लंबे समय तक रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है। गांवों से स्कूल तक जाने वाले रास्ते पानी में डूबे हुए हैं। चारे का संकट, खेतों में डूबी फसलें बाढ़ से किसानों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। खेतों में पानी भरने से फसलें खराब होने लगी हैं। वहीं, पशुओं के लिए रखा सूखा चारा भी पानी में डूबकर खराब हो चुका है। ग्रामीणों के सामने पशुओं को चारा उपलब्ध कराने का संकट है। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री और लंच पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन पानी की वजह से प्रभावित लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं। घाघरा का जलस्तर घटा, नवाबगंज में कटान जारी घाघरा नदी का जलस्तर अब घट रहा है। शुक्रवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 33 सेंटीमीटर ऊपर थी। प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है। वहीं, तरबगंज तहसील के नवाबगंज क्षेत्र में नदी का कटान किसानों के लिए नई परेशानी बन गया है। घाघरा नदी किसानों की जमीन काटकर अपने आगोश में ले रही है। क्षेत्र में सरयू नदी का भी पानी ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। 10 से अधिक परिवार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे बाढ़ के कारण दोनों तहसीलों में 10 से अधिक परिवार अपने पानी में डूबे घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। प्रभावित गांवों में प्रशासन की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। ग्रामीणों को राहत सामग्री और लंच पैकेट दिए जा रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि जलस्तर कम होने तक प्रभावित परिवारों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। हालांकि, नदी का जलस्तर घटने के बावजूद गांवों में जमा पानी और कटान के कारण खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
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गोंडा में बाढ़ से 9 हजार लोग प्रभावित:10 गांवों में पानी भरा, फसलें बर्बाद; बच्चों की पढ़ाई ठप, घट रहा घाघरा का जलस्तर
