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चंडीगढ़-अमित शाह के प्रोजेक्ट की जांच ठंडे बस्ते में:75 करोड़ 24×7 जलापूर्ति प्रोजेक्ट, एक साल से विजिलेंस पास, BJP अध्यक्ष मल्होत्रा शिकायर्ता




चंडीगढ़ के मनीमाजरा में 75 करोड़ रुपए की लागत से शुरू किए गए 24×7 जलापूर्ति प्रोजेक्ट की विजिलेंस जांच करीब एक साल से ठंडे बस्ते में पड़ी है। इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था, लेकिन इसके बाद भी लोगों को परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के आरोप लगे। प्रोजेक्ट में गड़बड़ी की शिकायत चंडीगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा ने केंद्र सरकार से की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच चंडीगढ़ विजिलेंस को सौंपी थी। इसके बावजूद अब तक न तो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है और न ही मामले में किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। विजिलेंस की जांच की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। बताया जा रहा है कि विजिलेंस की ओर से नगर निगम से प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं, लेकिन ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे। ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं तो उन्हें हासिल करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और जांच को आगे बढ़ाने में देरी क्यों हो रही है। अमित शाह के उद्घाटन के बाद भी प्रोजेक्ट पर सवाल मनीमाजरा में 24×7 जलापूर्ति परियोजना का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। इस दौरान चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी मौजूद थे। परियोजना की लागत करीब 75 करोड़ रुपए बताई गई थी। इसका उद्देश्य मनीमाजरा के लोगों को चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति उपलब्ध करवाना था। हालांकि, अब इस प्रोजेक्ट की लागत, खरीद प्रक्रिया और कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। जांच में यह पता लगाया जाना था कि परियोजना पर खर्च की गई राशि किन कार्यों और उपकरणों पर खर्च हुई, सामान कहां से खरीदा गया और नगर निगम में इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किन अधिकारियों के पास थी। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ तक नहीं इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब एक साल बीतने के बाद भी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ तक नहीं हुई है। जांच के दौरान नगर निगम के उन अधिकारियों की भूमिका देखी जानी है, जो परियोजना की योजना बनाने, खरीद प्रक्रिया और काम पूरा करवाने से जुड़े थे। बताया जा रहा है कि परियोजना शुरू होने के समय एक अधिकारी चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर तैनात थे। वह अब अपने मूल कैडर में वापस जा चुके हैं। ऐसे में जांच में देरी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित अधिकारी के चंडीगढ़ से जाने के बावजूद मामले की जांच को समय पर आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया। उद्घाटन के समय आनंदिता मित्रा थीं निगम कमिश्नर प्रोजेक्ट के उद्घाटन के समय चंडीगढ़ नगर निगम की कमिश्नर आनंदिता मित्रा थीं, जबकि वर्तमान में अमित कुमार निगम कमिश्नर हैं। जांच में परियोजना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका और उस समय लिए गए फैसलों की पड़ताल की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर तत्कालीन निगम कमिश्नर समेत अन्य संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। विजिलेंस को यह भी जांचना है कि परियोजना पर खर्च हुए 75 करोड़ रुपए का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के अनुसार हुआ या नहीं। इसके लिए खरीद से जुड़े रिकॉर्ड, टेंडर, भुगतान और काम पूरा होने से संबंधित दस्तावेज अहम हो सकते हैं। विजिलेंस की जांच में देरी पर उठ रहे सवाल केंद्र सरकार को शिकायत दिए जाने और जांच विजिलेंस को सौंपे जाने के बावजूद मामले में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप हैं, दूसरी तरफ विजिलेंस की ओर से दस्तावेज नहीं मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल है कि नगर निगम से रिकॉर्ड हासिल करने के लिए क्या कार्रवाई की गई और अब तक संबंधित अधिकारियों को बुलाकर उनका पक्ष क्यों नहीं जाना गया। फिलहाल, इस मामले में किसी अधिकारी के खिलाफ गड़बड़ी साबित नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य परियोजना में खर्च हुई राशि, खरीद प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करना है। अब देखना होगा कि करीब एक साल से लंबित जांच में विजिलेंस कब तक आगे की कार्रवाई करती है। बीजेपी अध्यक्ष ने दी केंद्र को शिकायत चंडीगढ़ बीजेपी अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने केंद्र सरकार को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि मनीमाजरा में 4 अगस्त 2024 को 24×7 जलापूर्ति परियोजना का उद्घाटन किया गया, लेकिन आज तक वहां एक दिन भी पानी नहीं आया है। लोगों के घरों में गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। मल्होत्रा ने लिखा था कि इस समस्या का जल्द समाधान किया जाए, ताकि लोगों को पानी की दिक्कत न हो। इसी शिकायत के बाद केंद्र सरकार ने मामला संज्ञान में लिया और इसकी जांच का जिम्मा चंडीगढ़ विजिलेंस विभाग को सौंपी। परियोजना का उद्देश्य 75 करोड़ की लागत से बनी यह परियोजना मनीमाजरा के एक लाख से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है। इसमें मॉडर्न हाउसिंग कॉम्प्लेक्स, शिवालिक एन्क्लेव, इंदिरा कॉलोनी और शास्त्री नगर के इलाके शामिल हैं। यह परियोजना स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य लगातार और उच्च दबाव वाली जल आपूर्ति देना है, ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके। इसके तहत रिसाव में कमी, स्मार्ट मीटरिंग, भूजल पर निर्भरता घटाना और ऊर्जा की खपत की निगरानी जैसे काम किए जाने हैं। इसके लिए कुल 22 किलोमीटर लंबी जल पाइपलाइन बिछाई गई है और दो भूमिगत जलाशय बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता दो-दो मिलियन गैलन प्रतिदिन है।



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