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चंडीगढ़ नगर निगम ने मांगे 50 करोड़ अतिरिक्त:अगले वित्त वर्ष के लिए 1,500 करोड़ का एस्टीमेट, सड़कों ,सफाई और सीवरेज कार्यों पर फोकस




शहर की सड़कों, सफाई व्यवस्था, सीवरेज, पार्कों और दूसरे नागरिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को गति देने के लिए चंडीगढ़ नगर निगम ने प्रशासन से अतिरिक्त आर्थिक मदद मांगी है। निगम ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले से तय 850 करोड़ रुपए के Grant-in-Aid को बढ़ाकर 900 करोड़ रुपए करने की सिफारिश की है। यानी निगम को 50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मदद चाहिए। इसके साथ ही अगले वित्त वर्ष के लिए निगम ने करीब 1,500 करोड़ रुपए की जरूरत का एस्टीमेट प्रशासन के सामने रखा है। नगर निगम की वित्तीय स्थिति को लेकर प्रशासन के सामने हाल ही में विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई। इसमें आय और खर्च के साथ शहर में प्रस्तावित विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं के लिए आवश्यक फंड की जानकारी दी गई। 5 महीने में 787 करोड़ आए, 444.65 करोड़ खर्च निगम के अधिकारियों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त तक पांच महीनों में निगम को कुल 787 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई। इसमें प्रशासन से मिलने वाला अनुदान सबसे बड़ा हिस्सा रहा। प्रशासन से 600 करोड़ रुपए का अनुदान मिला, निगम की अपनी आय187 करोड़ रुपए की हुई। इस प्रकार कुल प्राप्ति 787 करोड़ रुपए की हुई। जिसमें से कुल खर्च 444.65 करोड़ रुपए हुए। निगम की अपनी 187 करोड़ रुपए की आय प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर सेस, पार्किंग और अन्य स्रोतों से हुई है। इसी अवधि में विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों समेत विभिन्न मदों पर 444.65 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 850 करोड़ में से 250 करोड़ अभी बाकी चालू वित्त वर्ष के लिए प्रशासन की ओर से निगम के लिए 850 करोड़ रुपए के अनुदान को मंजूरी दी गई है। इसमें से अब तक 600 करोड़ रुपए निगम को प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 250 करोड़ रुपए अभी मिलना बाकी हैं। निगम के मुताबिक यह राशि मिलने से मौजूदा वित्तीय दबाव कम करने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। अगले साल 1,500 करोड़ क्यों चाहिए निगम ने अगले वित्त वर्ष के लिए 1,500 करोड़ रुपए की जरूरत का अनुमान ऐसे समय में रखा है, जब शहर में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई कामों के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता बताई जा रही है। इसका सीधा संबंध शहर की सड़कों, ड्रेनेज, सीवरेज, पार्कों, सफाई और कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं से है। चार पॉइंट में जाने जरूरत- 1. सड़कों की मरम्मत और री-कार्पेटिंग शहर के विभिन्न सेक्टरों में अंदरूनी सड़कों की मरम्मत और री-कार्पेटिंग बड़े खर्च वाले कामों में शामिल है। अतिरिक्त फंड उपलब्ध होने पर सड़क से जुड़े लंबित और प्रस्तावित कार्यों को गति देने की योजना है। इसका असर सीधे वाहन चालकों और सेक्टरों में रहने वाले लोगों की रोजाना की आवाजाही पर पड़ेगा। 2. जलभराव और सीवरेज से राहत बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या सामने आती है। रिपोर्ट में खुड्डा जस्सू, मलोया और अन्य इलाकों में सीवरेज तथा स्टॉर्म वॉटर ड्रेन से जुड़े कार्यों का उल्लेख है। नई सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के लिए भी फंड की जरूरत होगी। 3. पार्कों में बढ़ेंगी सुविधाएं शहर के पार्कों को बेहतर बनाने के लिए वॉकिंग ट्रैक, टो-वॉल, ओपन जिम और हरियाली से जुड़े काम प्रस्तावित हैं। अतिरिक्त बजट मिलने से इन सुविधाओं को अलग-अलग सेक्टरों के पार्कों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसका फायदा सुबह-शाम पार्कों में जाने वाले लोगों को होगा। 4. सफाई और कचरा प्रबंधन पर खर्च शहर की डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन व्यवस्था और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के अपग्रेडेशन के लिए भी फंड की जरूरत है। निगम के बजट में यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध रोजाना की सफाई और शहर के कचरे के निपटारे से है।



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