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केंद्र सरकार के सेवा नियम लागू होने के करीब साढ़े चार साल बाद भी चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में उनके सही ढंग से पालन नहीं होने का आरोप लगा है। जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स, यूटी चंडीगढ़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर पंजाब से डेप्युटेशन पर शिक्षकों, प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों की नियुक्ति का विरोध किया है। यूनियन के अध्यक्ष रणबीर सिंह राणा और महासचिव शिव मूरत यादव ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग कार्मिक विभाग के 15 अक्टूबर 2020 के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है। उनका कहना है कि बाहरी राज्यों से डेपुटेशन पर नियुक्ति करने से पहले कार्मिक विभाग की पूर्व मंजूरी जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। 100% प्रमोशन नियम फिर भी डेपुटेशन पर भर्ती जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स का कहना है कि केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा कैडर में कई पद ऐसे हैं, जिन पर 100 प्रतिशत पदोन्नति का प्रावधान है। यानी यदि निचले पदों पर कार्यरत पात्र और योग्य कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो उन्हें पदोन्नति देकर रिक्त पद भरे जाने चाहिए। ऐसे पदों पर दूसरे राज्य से अधिकारियों या शिक्षकों को डेप्युटेशन पर नियुक्त करना नियमों के खिलाफ है। कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित होंगे यूनियन का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए पंजाब से प्रिंसिपल, हेडमास्टर, पीजीटी, टीजीटी, जेबीटी और अन्य शिक्षकों का पैनल मांगा है। इससे चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित होंगे। विभाग पहले अपने फीडर कैडर में उपलब्ध योग्य कर्मचारियों को पदोन्नति दे और यदि कोई पद खाली रह जाए या योग्य कर्मचारी उपलब्ध न हों, तभी नियमानुसार डेप्युटेशन का विकल्प अपनाया जाए। डेपुटेशन पर नियुक्तियां कर व्यवस्था कमजोर उन्होने कहा केंद्रीय सेवा नियमों का उद्देश्य चंडीगढ़ के कर्मचारियों को अपना अलग कैडर और समय पर पदोन्नति का लाभ देना था। विभाग लगातार पंजाब से डेपुटेशन पर नियुक्तियां कर इस व्यवस्था को कमजोर कर रहा है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। पंजाब से इन पदों के लिए मांगा पैनल शिक्षा विभाग ने 30 जुलाई को पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को पत्र भेजकर विभिन्न पदों के लिए शिक्षकों का पैनल मांगा है। इसमें 2 प्रिंसिपल, 1 हेडमास्टर, 5 मास्टर और कई पीजीटी, टीजीटी व जेबीटी पद शामिल हैं। नॉन-मेडिकल और समाजशास्त्र के पद भी शामिल पीजीटी के तहत अकाउंट्स, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, हिंदी, गणित, संगीत, शारीरिक शिक्षा और राजनीति शास्त्र के पदों के लिए पैनल मांगा गया है। वहीं टीजीटी में हिंदी, गणित, संस्कृत, पंजाबी और विज्ञान के शिक्षकों की मांग की गई है। इसके अलावा जेबीटी, मेडिकल, नॉन-मेडिकल और समाजशास्त्र के पद भी शामिल हैं। यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों की कैजुअल लीव 20 से घटाकर 8 दिन कर दी गई, जबकि हाफ पे लीव (एचपीएल) की सुविधा भी समाप्त कर दी गई। वहीं, यूटी कैडर के कर्मचारियों को लाभ देने वाले पदोन्नति (प्रमोशन) नियम अब तक पूरी तरह लागू नहीं किए गए हैं।
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चंडीगढ़ शिक्षा विभाग पर केंद्रीय नियमों की अनदेखी का आरोप:पंजाब से शिक्षकों का पैनल मांगने पर विवाद, गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
