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जन्माष्टमी पर जसोल में आस्था और लोक संस्कृति का संगम:मंदिरों में हुई विशेष पूजा-अर्चना, ढोल-थाली की गूंज पर कलाकारों ने पेश किया गैर नृत्य




श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जसोल में देर रात तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चला। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने श्री भगवान कृष्ण मंदिर, श्री गजानंद जी मंदिर और श्री ठाकुर जी मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना की। तीनों मंदिरों में भगवान को विशेष भोग लगाया गया। पूजा के बाद श्रद्धालुओं और भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। श्री ठाकुर जी मंदिर में स्थानीय विद्वान पंडितों के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष धार्मिक अनुष्ठान कराया गया। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विशेष आहुतियां अर्पित कीं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना की। ढोल-थाली की गूंज पर कलाकारों ने पेश किया गैर नृत्य जन्माष्टमी समारोह में पारंपरिक गैर नृत्य आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। ढोल और थाली की गूंज के बीच स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने जसोल की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को जीवंत कर दिया। भक्ति और लोक कला के इस मेल से देर रात तक माहौल कृष्णमय बना रहा। बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु इस दौरान ग्रामवासी और कृष्ण भक्त बड़ी संख्या में धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। धर्म, कर्म और जनकल्याण का संदेश देता है श्रीकृष्ण का जीवन हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्म, कर्तव्य और लोककल्याण का शाश्वत संदेश देता है। उनका जीवन समाज के प्रति जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने और जनकल्याण के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जसोल की आस्था, संस्कृति, सामाजिक एकजुटता और जनसहभागिता क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है।



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