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विदिशा जिले में बारिश धीमी पड़ने के बावजूद प्राकृतिक झरनों के शुरू होने से पर्यटन स्थलों पर रौनक बढ़ गई है। हलाली डैम के पास स्थित मिनी पचमढ़ी इन दिनों सैलानियों का मुख्य आकर्षण बनी हुई है। यह स्थल विदिशा से लगभग 35 किलोमीटर और भोपाल से 40 किलोमीटर दूर है। यहां 60 फीट की उंचाई से चट्टानों के बीच गिरते झरने, हरी-भरी पहाड़ियां और प्राकृतिक दृश्य बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। विदिशा, भोपाल और आसपास के जिलों से लोग परिवार सहित यहां पहुंच रहे हैं। मिनी पचमढ़ी की एक और खासियत यहां का ‘ब्लू वाटर’ है। झरने का पानी ऊपर से सफेद दिखता है, लेकिन नीचे पहुंचते ही इसका रंग नीला हो जाता है। बारिश के मौसम में झरनों के सक्रिय होने से इस स्थान की सुंदरता और बढ़ जाती है। अवकाश और रविवार के दिनों में यहाँ पर्यटकों की भीड़ अधिक होती है, जो परिवार और दोस्तों के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाते हैं। पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिनी पचमढ़ी में वन विभाग और पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। झरने तक जाने वाले कुछ रास्तों पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। हालांकि, घना जंगल होने के कारण कई छोटे-बड़े रास्ते मौजूद हैं। प्रतिबंधित मार्गों पर रोक के बावजूद, कई लोग जंगल के भीतर से अन्य रास्तों का उपयोग कर झरने तक पहुंच जाते हैं। सुरक्षाकर्मियों की चेतावनी के बावजूद, कुछ पर्यटक पहाड़ी से नीचे उतरकर झरने के करीब पहुँचते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के कारण चट्टानें और रास्ते अत्यधिक फिसलन भरे हो जाते हैं, और कई स्थानों पर गहरी ढलान व पानी भी है। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। पिछले वर्षों में मिनी पचमढ़ी में कई हादसे हुए हैं, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसलिए, यहां आने वाले पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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जान जाने का खतना फिर भी पहुंच रहे लोग:हलाली डैम के पास मिनी पचमढ़ी झरने देखने पहुंचते हैं; ब्लू वाटरफॉल सबसे चर्चित
