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जालंधर के प्राइवेट स्कूल में पढ़ते नकोदर के परिवार के बच्चों पर 20 हजार रुपए फाइन लगा दिया गया। मजदूरी करने वाले पिता ने बताया कि सभी फीसें टाइम टू टाइम स्कूल को आनलाइन ट्रांसफर की गई हैं। जब उन्होंने दूसरे स्कूल में दाखिले के लिए बच्चों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट मांगे तो 20 हजार रुपए जुर्माने के तौर पर बकाया निकला दिया गया।
नकोदर के मोहल्ला पालम विहार कॉलोनी की रहने वाली सुरिंदरजीत कौर के नाम से ADC जालंधर को शिकायत दी गई है। 3 अगस्त को मार्क हुई शिकायत पर अभी तक कार्रवाई पेंडिंग है। सुरिंदरजीत कौर के पति जसपाल ने नकोदर के पनियाल स्थित प्राइवेट स्कूल के खिलाफ जिला प्रशासन को शिकायत सौंपी है। यह शिकायत पत्र डिप्टी कमिश्नर ने एडीसी जालंधर को मार्क किया था लेकिन अभी तक उनकी समस्या हल नहीं हो पाई है।
जसपाल ने ने बताया कि उनके तीन बच्चे जैसलीन सहगल (10वीं), गारव सहगल (8वीं) और हर्ष सहगल (8वीं) में पढ़ते थे। हाल ही में उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में करवाने का फैसला किया और स्कूल से बच्चों का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट मांगा। अब उन पर मानसिक दबाव बनाने के लिए 20 हजार का जुर्माना लगा दिया है। वह क्रशर पर दिहाड़ी लगाता है। सभी फीस समय से दी गई हैं फिर इतना जुर्माना कहां से बन गया। 20 हजार देने पर ही सर्टिफिकेट देने पर अड़ा स्कूल प्रबंधन
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने बच्चों की पूरी फीस ऑनलाइन माध्यम से जमा करवा दी है और उनका कोई भी बकाया नहीं है। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन ने उन पर मानसिक दबाव बनाने की नीयत से जमा करवाई गई फीस पर करीब 20 हजार रुपए का भारी जुर्माना लगा दिया है। पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब तक यह 20 हजार रुपए का जुर्माना अदा नहीं किया तो, बच्चों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
पीड़ित महिला और उनकी पत्नी ने जिला प्रशासन और एडीसी जालंधर से गुहार लगाई है कि नियम-विरुद्ध जुर्माना लगाने और बच्चों का भविष्य अधर में लटकाने वाले स्कूल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उन्हें जल्द से जल्द बच्चों के स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट दिलाए जाएं।
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जालंधर में दिहाड़ीदार के बच्चों पर 20 हजार फाइन:प्राइवेट स्कूल ने जुड़वा बच्चों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट रोके, शिकायत ADC तक पहुंची, अभी कार्रवाई नहीं
