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जींद जिले में पटवारियों और कानूनगो की हड़ताल के बीच शुक्रवार को राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी खुद खेतों में पहुंचे। चंडीगढ़ में डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड के साथ पटवारी-कानूनगो एसोसिएशन की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, राजस्व अधिकारी (DRO) विनय चौधरी जींद के गुलकनी गांव पहुंचे। उन्होंने वहां धान की फसल के पानी से भरे खेतों के बीच जाकर खुद डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रिया को समझा। डीआरओ विनय चौधरी ने गुलकनी गांव के खेतों में करीब दो से तीन घंटे बिताए। उन्होंने मोबाइल ऐप के माध्यम से पानी से भरे धान के खेतों में उतरकर लगभग 11 जमीनों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा किया। इस दौरान उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया कि खेतों के बीच जाकर प्रत्येक फसल की लोकेशन ट्रैक करना और सर्वे करना कितना चुनौतीपूर्ण कार्य है। कम समय में सर्वे पूरा करना काफी मश्किल : डीआरओ खेतों की वास्तविक स्थिति देखने के बाद डीआरओ ने स्वीकार किया कि पटवारियों के लिए इतनी कम समय सीमा में जमीनी स्तर पर ऐसा सर्वे करना वास्तव में काफी मुश्किल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस पूरी सर्वे प्रक्रिया के दौरान सामने आई व्यावहारिक समस्याओं और मौके की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कई गांवों में 10 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन : सर्वेश पटवारी-कानूनगो एसोसिएशन की प्रधान सर्वेश पटवारी ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि गुलकनी गांव का क्षेत्रफल अकेले 2 हजार एकड़ से अधिक है, जबकि कई गांवों में यह 10 हजार एकड़ से भी ज्यादा है। सरकार ने सर्वे के लिए केवल 45 दिन की समय सीमा तय की है, जिसमें एक पटवारी दिनभर धूप और पानी में रहकर भी अधिकतम 20 सर्वे ही कर सकता है। उल्लेखनीय है कि पटवारी और कानूनगो इंतकाल दर्ज करने के लिए बनाए गए नए पोर्टल सिस्टम और इस जटिल डिजिटल क्रॉप सर्वे के विरोध में 20 अगस्त से हड़ताल पर हैं। शासन और आंदोलनकारियों के बीच अब तक हुई बातचीत से कोई समाधान नहीं निकल सका है, जिसके चलते तहसीलों में राजस्व, रजिस्ट्री और इंतकाल से जुड़े सभी कार्य ठप पड़े हैं।
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जींद में पटवारियों की हड़ताल, अधिकारी खेत में उतरे:DRO विनय चौधरी ने पानी से भरे धान के खेत में डिजिटल क्रॉप मैपिंग की
