![]()
अमरमणि त्रिपाठी जब से अपनी बाकी सजा माफ होने के बाद जेल से बाहर आए हैं, उन्हें कठिनाइयों से भरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। दिन-रात एक कर किसी तरह बेटे को विधायक बनाना चाहते हैं लेकिन अभी टिकट का जुगाड़ करना आसान नहीं दिख रहा। लगभग सभी पार्टियों के दरवाजे खटखटा चुके हैं लेकिन ठोस आश्वासन नहीं मिला है। अब एक बार फिर उसी कांग्रेस से टिकट की आस पालकर बैठे हैं, जिससे वह लगातार 4 बार चुनाव लड़े और दो बार विधायक रहे। अमरमणि पहली बार विधायक कांग्रेस के ही टिकट पर बने थे। कुछ दिन पहले अमरमणि ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि उनका परिवार दो जगहों से चुनाव लड़ेगा। फिलहाल उन्होंने अपना दावा फरेंदा पर और अपने बेटे अमन मणि का दावा नौतनवा विधानसभा क्षेत्र पर किया है। जेल से छूटने के बाद अमरमणि त्रिपाठी ने कई बार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के यहां चक्कर लगाया। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का स्वागत करने अमरमणि व उनके पुत्र अमन पहुंचे। लेकिन इस पार्टी में टिकट की मारामारी देखकर वह दूसरे विकल्पों की तलाश में भी जुटे हैं।
अमरमणि के खुद के चुनाव लड़ने पर संशय है लेकिन अपने बेटे अमनमणि के लिए सपा से टिकट का दावा कर सकते थे लेकिन यहां पहले से ही उनके चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी मुन्ना सिंह मौजूद हैं। अब, दोनों प्रतिद्वंद्वी एक साथ एक ही पार्टी में नहीं हो सकते। बसपा से पिछली बार अमन ने चुनाव लड़ा था लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। ऐसे में अभी यह परिवार बसपा पर फोकस नहीं कर रहा है। उससे ज्यादा फोकस कांग्रेस को लेकर है। संयोग से अमनमणि पिछले दो साल से कांग्रेस में हैं। जानिए कांग्रेस को लेकर चर्चा क्यों शुरू हुई कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक दत्त एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत मंगलवार की सुबह गोरखपुर एयरपोर्ट पर पहुंची तो उनका स्वागत करने वालों में अमरमणि त्रिपाठी भी नजर आ रहे थे। इसी के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि अमरमणि का परिवार कांग्रेस से चुनाव लड़ सकता है। अमरमणि लगातार 4 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और 2 बार कांग्रेस के विधायक भी रहे हैं। लेकिन अमन मणि ने अब तक कांग्रेस के टिकट पर कोई चुनाव नहीं लड़ा। इतना आसान नहीं होगा कांग्रेस से टिकट पाना अमरमणि त्रिपाठी ने फरेंदा से खुद के व नौतनवां से अपने पुत्र अमन के चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद से राजनीतिक हलचल तेज है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कानून अमरमणि को चुनाव लड़ने की अनुमति देगा या नहीं। यदि किसी और को भी अमरमणि फरेंदा से लड़ाते हैं तो वहां कांग्रेस का टिकट मिलना आसान नहीं है। वीरेंद्र चौधरी यहां से कांग्रेस के विधायक हैं और सपा व कांग्रेस गठबंधन से 2024 में लोकसभा के प्रत्याशी भी थे। ऐसे में वह टिकट के फिर प्रबल दावेदार रहेंगे। यदि सपा व कांग्रेस का फिर गठबंधन होता है तो नौतनवा में सपा के 2022 में प्रत्याशी रहे मुन्ना सिंह दावेदार होते हैं। ऐसे में अमरमणि के लिए राजनीतिक मजबूती बनाए रखना चुनौती है। 2017 में अमरमणि ने जेल में रहते हुए भी अमनमणि को जिताया था। ऐसे में माना जा रहा है कि अमनमणि चुनाव तक हर तरह के विकल्प खुले रखेंगे।
Source link
जेल के बाहर कठिनाइयों से भरे हैं अमरमणि के रास्ते:जिस कांग्रेस से 2 बार विधायक बने, फिर उसी से आस
