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जैसलमेर नगरपरिषद में 2483 नए नाम जुड़े, 986 कटे:वार्ड 8 में 190 ज्यादा, 16 से 117 कम हुए; शहर में अब 36,642 वोटर




जैसलमेर नगर परिषद चुनाव में इस बार मतदाता सूची में कुल 2,483 नए नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं, जबकि 986 मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। कई सामान्य वार्डों के ओबीसी वर्ग में जाने के बाद प्रत्याशियों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए वोटरों की भारी शिफ्टिंग कराई है। इस जोड़-तोड़ के बाद शहर में कुल 1,497 नए मतदाता बढ़ गए हैं और कुल वोटरों की संख्या 35,145 से बढ़कर 36,642 पहुंच गई है। नाम जुड़ने और हटने के इस बड़े फेरबदल से कई वार्डों में पुराने सियासी समीकरण पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। वार्ड 8 में सबसे ज्यादा 190 नाम जोड़े, 16 में 117 काटे शहर के 45 वार्डों के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि जहां वार्ड 8 में सबसे ज्यादा 190 नाम जोड़े गए, वहीं वार्ड 16 में सर्वाधिक 117 नाम काटे गए हैं। सबसे कम नाम जुड़ने का रिकॉर्ड वार्ड 18 (केवल 2 नए नाम) के नाम रहा, जबकि सबसे कम कटौती वार्ड 8 (मात्र 1 नाम काटा) में दर्ज की गई। कुल मिलाकर 2,483 नए नाम जुड़े और 986 नाम काटे गए हैं। वार्ड 6 में 149 और वार्ड 1 में 142 नए नाम जोड़े सर्वाधिक नए नाम (वार्ड 8): यहाँ रिकॉर्ड 190 नए मतदाता जोड़े गए हैं, जिससे यह वार्ड नए नाम जुड़ने में पूरे शहर में शीर्ष पर रहा। इसके अलावा वार्ड 6 में 149 और वार्ड 1 में 142 नए नाम जोड़े गए। सबसे कम नए नाम (वार्ड 18): दूसरी ओर वार्ड 18 में सबसे कम केवल 2 नए मतदाताओं के नाम जुड़ सके। वहीं वार्ड 16 में महज 7 नए नाम ही दर्ज हो पाए। यहां कटे सबसे ज्यादा और सबसे कम नाम नाम हटाने की प्रक्रिया में भी कुछ वार्डों में भारी फेरबदल दर्ज किया गया है: सर्वाधिक नाम कटे (वार्ड 16): वोटर लिस्ट में सबसे बड़ी कटौती वार्ड 16 में हुई, जहां से सर्वाधिक 117 मतदाताओं के नाम काट दिए गए। सबसे कम नाम कटे (वार्ड 8): नाम कटने के मामले में वार्ड 8 सबसे सुरक्षित रहा, जहाँ से पूरे शहर में सबसे कम केवल 1 नाम काटा गया। इसके बाद वार्ड 10 में महज 3 नाम ही हटे। शहर भर में 1497 की कुल शुद्ध वृद्धि पूरे शहर की बात करें तो कुल 2,483 नए नाम जोड़े गए, जबकि 986 मतदाताओं के नाम काटे गए। इस जोड़-तोड़ के बाद जैसलमेर में कुल मतदाताओं की संख्या 35,145 से बढ़कर 36,642 हो गई है। रणनीतिक मैनेजमेंट का नतीजा अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में नाम जुड़ने और कटने की वजह केवल नए युवा मतदाताओं का आना नहीं है। बल्कि यह प्रत्याशियों द्वारा अपने पक्ष में किया गया रणनीतिक मतदान प्रबंधन है। ग्रामीण इलाकों से शहर में शिफ्ट हुए लोगों और दूसरे वार्डों से वोट ट्रांसफर कराने के कारण यह बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है।



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