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झज्जर बछड़े की रंभाहट सुनकर कुएं में उतरे चार व्यक्ति:फिर कुएं में फंसे लोगों की चीखों से दहल उठा गांव,मुनीमपुर गांव की घटना, चारों की मौत




झज्जर के मुनीमपर गांव पर रविवार रात को दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक ही परिवार के तीन लोगों समेत चार युवाओं की कुंए में डूबकर मौत हो गई। मगर ग्रामीणों को गुस्सा इस बात पर है कि उनको कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिली। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह मौत कुंए में डूबने से नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी के कारण हुई है। न समय पर पुलिस पहुंची और जो अधिकारी पहुंचे उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के एक घंटा 38 मिनट बाद पुलिस की डायल 112 टीम मौके पर पहुंची। वहां पहुंचने के बाद भी पुलिस ने एक घंटे तक कुछ खास नहीं किया। फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर बहुत देरी से पहुंची। लेकिन उनको निकालने के लिए कुंए में कोई नहीं उतरा। हारकर ग्रामीणों को फायर ब्रिगेड के मास्क पहनकर कुंए में उतरना पड़ा। पुलिस कमिश्नर को बोले ग्रामीण अब आप जाओ सूचना मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर डा. राजश्री सिंह पहले मुनीमपुर मौके पर पहुंची और बाद में नागरिक अस्पताल पहुंची। वहां पर गांव के लोगों ने झज्जर प्रशासन को जीरो बताया। पुलिस कमिश्नर को भी गांव के लोगों ने कहा कि अब आप दुख जता रहे हो, अगर थोड़ी देर पहले अपना काम ठीक करते तो चारों जिंदा होते। अब आप जाओ नरेंद्र ने चिल्लाकर कहा अंदर मत आना मृतकों के भतीजे सुनील ने बताया कि जब वह कुंए पर पहुंचे तो नीचे उतरने का प्रयास किया। मगर अंदर से नरेंद्र चिल्ला रहा था कि नीचे मत आना, यहां सांस नहीं आ रहा है। जब पुलिस पहुंची तब तक चारों कुंए के अंदर जिंदा थे। मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने दो-दो मिनट का नाम लेकर कई घंटे निकाल दिए। सेप्टिक टैंक से खाली किया कुंआ ग्रामीणों ने बताया कि जब प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की तो अपने गांव के बच्चों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने ही अपनी जान जोखिम में डाली। पहले सेप्टिक टैंक से कुंए का पानी कम किया गया और उसके बाद जेसीबी की मदद से कुंए को उखाड़ना शुरू कर दिया, ताकि गैस बाहर निकल सके और अंदर गिरे चारों युवाओं को बाहर निकाला जा सके। काफी उखाड़ने के बाद फायर ब्रिगेड के मास्क लेकर ग्रामीण ही कुंए में उतरे। एंबुलेंसों में नहीं थी ऑक्सीजन ग्रामीणों ने बताया कि मौके पर पहुंची एंबुलेंसों में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं थी। उनको निकालने के बाद जब एंबुलेंस में डाला गया, तब तक भी वह जिंदा थे। अगर ऑक्सीजन होती तो उनकी जान बच सकती थी। लापरवाही की हद तो यह है कि चौथे व्यक्ति को लाने के लिए एंबुलेंस ही नहीं पहुंची। रम्मे को पुलिस की पीसीआर में डालकर नागरिक अस्पताल लाया गया। पोस्टमार्टम से पहले लेंगे कड़ा फैसला ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सोमवार को शवों का पोस्टमार्टम कराने से पहले वह कड़ा फैसला लेंगे। इस दौरान मौके पर पहुंचे बादली विधायक कुलदीप वत्स से भी ग्रामीणों ने सहयोग मांगा है। एमएलए वत्स ने भी बाताया प्रशासन का फेलियर बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने कहा यह बहुत ही दुखद घटना है। कई पहलु हैं, जहां लापरवाही की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए। जो लोग दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मेरा पूरी संवेदना और सहयोग गांव के साथ है। जो दोषी अधिकारी होने पर कार्रवाई की जाए पीड़ित परिवार को उचित मुआवज दिया जाए और हर घर में एक नौकरी दी जाए। कमिश्नर बोली सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे झज्जर पुलिस कमिश्नर डॉक्टर राजश्री सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची गई थी। लोगों ने कुछ आरोप लगाए हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की



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