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साधारण तांबे के तार, हाथों की कला और कल्पनाशीलता से तैयार की गई साहिबगंज के कलाकार संजय भरतिया की अनोखी ‘लाइव वायर आर्ट’ अब अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में अपनी जगह बनाएगी। उनकी कलाकृति का चयन संग्रहालय में प्रदर्शित करने के लिए किया गया है। यह उपलब्धि न सिर्फ संजय भरतिया, बल्कि पूरे साहिबगंज के लिए गौरव का विषय है। खास बात यह है कि संजय ने इस कला को किसी आधुनिक मशीन या जटिल तकनीकी उपकरण के सहारे नहीं, बल्कि सामान्य साधनों से विकसित किया है। तांबे के तारों को अलग-अलग आकार और आकृतियों में ढालकर कलाकृति तैयार करना उनकी विशिष्ट शैली है। वर्ष 1955 में साहिबगंज के भरतिया रोड में जन्मे संजय की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे उच्च विद्यालय, साहिबगंज में हुई, जबकि उच्च शिक्षा उन्होंने साहिबगंज महाविद्यालय से प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तांबे के तारों के साथ प्रयोग शुरू किया और धीरे-धीरे यही शौक उनकी अलग पहचान बन गया। एक्सपर्ट की जांच के बाद हुआ है चयन संजय भरतिया की इस विशिष्ट कला को अयोध्या में विकसित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में प्रदर्शित करने के लिए चुना गया है। उनकी कलाकृति का चयन सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि विशेषज्ञों की गहन जांच और सर्वेक्षण के बाद हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट के राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के निर्देश पर कोलकाता के महानिदेशक की विशेष टीम ने संजय की कलाकृति का विस्तृत परीक्षण किया। टीम ने उनकी कला की बारीकियों, निर्माण शैली और विशिष्टता का अध्ययन किया। परीक्षण और सर्वेक्षण के बाद उनकी कलाकृति को संग्रहालय में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया गया। संजय की कला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे तांबे के तारों को हाथों और सामान्य उपकरणों की मदद से मनचाही आकृति में ढालते हैं। आधुनिक तकनीक के दौर में पारंपरिक और हस्तकौशल आधारित इस कला को राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय में जगह मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। होलोग्राम और 7-डी से जीवंत होंगे रामकथा के प्रसंग अयोध्या में विकसित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को आधुनिक तकनीक के साथ भव्य रूप दिया जा रहा है। संग्रहालय में भगवान श्रीराम से जुड़े प्रसंगों, कलाकृतियों और कथाओं को नई तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की योजना है। इसके लिए होलोग्राम और 7-डी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि संग्रहालय आने वाले लोग रामकथा से जुड़े प्रसंगों को अधिक प्रभावी ढंग से अनुभव कर सकें। इसी महत्वाकांक्षी संग्रहालय के लिए संजय भरतिया की कलाकृति का चयन हुआ है। इससे उनकी कला को देशभर के लोगों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। संजय ने अपनी कलाकृति के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भी आवेदन किया है। उनका कहना है कि उनकी सबसे बड़ी आकांक्षा है कि तांबे के तारों से तैयार इस अनूठी कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिले। अयोध्या के संग्रहालय में प्रदर्शनी के लिए चयन को वे इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। यह उपलब्धि वर्षों की साधना का परिणाम संजय भरतिया की इस उपलब्धि से साहिबगंज के कला और सामाजिक क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वे स्थानीय व्यवसायी सुनील भरतिया और वार्ड पार्षद सुशील भरतिया के बड़े भाई हैं। उनकी उपलब्धि पर साचेका अध्यक्ष चेतन भरतिया, आलोक भरतिया, पत्नी सुधा, कुणाल, निखिल, नम्रता, रुचि, मित्र ललित स्वदेशी, शिवकुमार शर्मा, अवधेश सिंह, बोदी सिन्हा, जयप्रकाश सिन्हा और रमेश तिवारी समेत अन्य लोगों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बीच विकसित की गई संजय की कला का अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र में पहुंचना साहिबगंज के लिए भी सम्मान की बात है। तांबे के तारों को कलात्मक रूप देकर पहचान बनाने वाले संजय के लिए यह उपलब्धि वर्षों की साधना का परिणाम है। अब उनकी कला अयोध्या में रामकथा से जुड़े भव्य संग्रहालय का हिस्सा बनकर साहिबगंज की रचनात्मक प्रतिभा को देश के सामने प्रस्तुत करेगी।
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तांबे के तारों से साहिबगंज के संजय ने गढ़ी कला:अयोध्या के राम कथा संग्रहालय पहुंची ‘लाइव वायर आर्ट’, एक्सपर्ट टीम ने की है जांच
