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“चार दिन हो गए हैं। न ठीक से सो पा रहे हैं, न रहने की कोई व्यवस्था है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की रहती है। डर लगा रहता है कि कहीं कीड़ा-मकौड़ा, सांप या कोई जंगली जानवर न आ जाए। इसी डर में पूरी रात जागते हुए या करवट बदलते हुए कट रही है। किसी तरह दिन-रात गुजार रहे हैं। बहुत मुश्किल में जिंदगी चल रही है।” बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण लाल जी की यह बात चंपारण तटबंध पर गुजर रही सैकड़ों जिंदगियों की तस्वीर बता रहे हैं। दरअसल, पूर्वी चंपारण में आई बाढ़ की वजह से 40 हजार घरों में पानी घुस गया है। इसकी वजह से परिवार जान बचाने के लिए बांध पर आ गए हैं। तीन-चार दिन से मिट्टी पर तिरपाल बिछाकर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इसी पर रात काट रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों की इसी जिंदगी को करीब से देखने के लिए दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 40KM दूर अरेराज और संग्रामपुर पहुंची। इस दौरान नोनिया-गोविंदगंज तक करीब 6 किलोमीटर का सफर तय किया गया। रात 10 बजे शुरू हुआ यह ग्राउंड कवरेज रात करीब 2 बजे तक चला। रास्ते में बाढ़ से घिरे गांव, बांध पर बसे परिवार, पानी से घिरे घर, राहत शिविर, कम्युनिटी किचन और रात में बांध की निगरानी करते ग्रामीण नजर आए। ‘चार दिन से खुले में हैं, रात में डर के कारण नींद नहीं आती’ बाढ़ प्रभावित लाल जी बताते हैं कि घर में पानी भरने के बाद परिवार को जान बचाने के लिए ऊंची जगह पर आना पड़ा। चार दिन से खुले में रहने की वजह से रात में ठीक से नींद नहीं आती। बांध पर रह रहे इनरल पासवान की चिंता कुछ अलग है। घर छोड़कर आए परिवारों के पास कपड़े, अनाज, बर्तन और बकरियां जैसे सामान हैं। लेकिन इन्हें सुरक्षित रखने के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं है। अगर परिवार का एक व्यक्ति भी सामान छोड़कर थोड़ी देर के लिए चला जाए तो चोरी का डर बना रहता है। इसी वजह से रात में भी कोई न कोई जागकर सामान और बकरियों की रखवाली करता है। कई जगह लाइट तक की व्यवस्था नहीं है। अंधेरे में बकरियों और सामान की निगरानी करना पड़ता है। बाढ़ से बचने के लिए घर छोड़ा, लेकिन बांध पर भी सुरक्षा की चिंता खत्म नहीं हुई। घर-आंगन में पानी, छाती तक पहुंचा सतेंद्र पासवान के घर की स्थिति भी ऐसी ही है। उनके मुताबिक, चारों तरफ पानी ही पानी है। घर में भी पानी घुसा हुआ है। रात में डर लगता है कि पानी और बढ़ गया तो क्या होगा। घर-आंगन में इतना पानी है कि चलना भी मुश्किल है। छाती तक पानी पहुंच गया है। इतनी ज्यादा बाढ़ हमने नहीं देखी। धुरंधर सिंह बताते हैं कि तटबंध टूटने के बाद पानी तेजी से गांव की तरफ आया। घरों में पानी घुसने के बाद परिवार को सुरक्षित जगह पर आना पड़ा। खाने-पीने की परेशानी का जिक्र करते हुए वे कहते हैं, किसी तरह खाना बनाकर खा रहे हैं। पानी थोड़ा कम होने के बावजूद खतरा खत्म नहीं हुआ है। सरकार और प्रशासन ऐसी व्यवस्था करे कि बाढ़ से जल्द राहत मिले और लोग सुरक्षित तरीके से अपने घर लौट सकें। एक अन्य बाढ़ प्रभावित परिवार का कहना है, घर के चारों तरफ पानी है और खाने-पीने की सबसे ज्यादा दिक्कत है। तटबंध टूटने के बाद पानी लगातार गांव की तरफ आया, लेकिन हमें अभी तक कोई खास सहायता नहीं मिली। पानी के बीच किसी तरह खाना बना रहे हैं और आगे की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। रात 10 बजे भी बांध पर लोग, कोई खाना देख रहा तो कोई तटबंध दैनिक भास्कर की टीम जब रात करीब 10 बजे संग्रामपुर पहुंची तो बड़ी संख्या में लोग अब भी चंपारण तटबंध पर मौजूद थे। यहां प्रशासन की ओर से कम्युनिटी किचन चलाया जा रहा था। कई लोग खाना खाकर लौट चुके थे। कुछ लोगों के लिए खाना अभी भी रखा गया था। मौके पर मौजूद कर्मचारी रात में भी यह देख रहे थे कि कोई व्यक्ति भूखा तो नहीं लौट गया। आसपास के लोगों को भी कम्युनिटी किचन में आकर भोजन करने के लिए कहा जा रहा था। रात में बांध पर सिर्फ बाढ़ पीड़ित ही नहीं थे। पुलिस की गश्त भी दिखाई दी। गांव के युवक भी बांध पर घूमकर निगरानी कर रहे थे। उनकी चिंता इस बात को लेकर थी कि कहीं किसी हिस्से में रिसाव या पानी का दबाव बढ़ने की स्थिति न बने। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बांध में कहीं गड़बड़ी दिखाई देती है तो तुरंत प्रशासन को सूचना दी जा सके, इसलिए रात में भी निगरानी जारी है। जिन जगहों पर रिसाव की आशंका है, वहां प्रशासन की ओर से लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि बांध के सभी हिस्सों में पर्याप्त रोशनी नहीं है। डीएम बोले- कम्युनिटी किचन, लाइटिंग और तिरपाल की व्यवस्था डीएम सौरभ सुमन यादव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अलग-अलग स्थानों पर कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं। लाइटिंग की व्यवस्था भी की गई है। प्रभावित परिवारों को तिरपाल और प्लास्टिक उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि खुले में रहने के दौरान उन्हें बारिश से बचाव मिल सके। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर रखने के साथ राहत और बचाव कार्य जारी है। कई परिवार तिरपाल पर सोने को मजबूर राहत व्यवस्था के बीच ग्राउंड की तस्वीर पूरी तरह अलग कहानी भी दिखाती है। जिन परिवारों के पास चौकी या खाट नहीं है, वे मिट्टी पर तिरपाल बिछाकर सो रहे हैं। कई परिवार प्लास्टिक का तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं। बच्चे और बुजुर्ग एक ही तिरपाल पर सोते नजर आए। उनके ठीक सामने बाढ़ का पानी है। रात में सांप और दूसरे कीड़े-मकौड़ों का डर अलग है। इसलिए परिवार का कोई न कोई सदस्य जागता रहता है। यानी राहत शिविर में खाना मिल रहा है, लेकिन रहने की स्थायी और सुरक्षित जगह अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मोतिहारी के अरेराज अनुमंडल क्षेत्र के संग्रामपुर और अरेराज प्रखंड बाढ़ से प्रभावित हैं। चंपारण तटबंध कई परिवारों के लिए फिलहाल आश्रय स्थल बना हुआ है। स्थानीय जनप्रतिनिधि के मुताबिक, नवादा, पिपरासरिया, मिश्रवलिया, नगदाहा, चटिया और चिंतामनपुर पंचायत के कई वार्ड बाढ़ प्रभावित हैं। उनके अनुसार स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। विधायक के पिछले चार दिनों से क्षेत्र में सक्रिय रहने और पानी बढ़ने की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचने का भी दावा किया गया है। यह संबंधित जनप्रतिनिधि का दावा है। केले के थम के सहारे जिंदगी बचा रहे सुरेंद्र को NDRF ने निकाला बाढ़ के बीच केसरिया की बैरिया पंचायत में रेस्क्यू का एक खौफनाक दृश्य भी सामने आया। वार्ड नंबर 5 में बाढ़ के पानी में फंसे सुरेंद्र महतो के पास बचने का कोई साधन नहीं था। वे केले के थम के सहारे खुद को डूबने से बचा रहे थे। काफी देर तक वे पानी के बीच इसी तरह फंसे रहे। इसी दौरान एनडीआरएफ की टीम की नजर उन पर पड़ी। जवानों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया और सुरेंद्र महतो को सुरक्षित बाहर निकाला। एनडीआरएफ की टीमें फिलहाल केसरिया और संग्रामपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू कर रही हैं। प्रभावित लोगों को पानी से निकालकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। गंडक के दबाव से रिंग बांधों को भी खतरा पूर्वी चंपारण के अरेराज की सरेया पंचायत में सोमवार देर रात करीब 3 बजे गंडक का रिंग बांध टूटा। इसके बाद सरेया पांडेय टोला, लोकनाथपुर और सिकटिया गांवों में पानी पहुंचा। अरेराज-पटना स्टेट हाईवे पर पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित हुआ, जबकि संग्रामपुर के अरेराज-हाजीपुर मुख्य एसएच-74 पर भी पानी बहने की स्थिति बनी। पिपरासी के सुगौली में पीपी तटबंध के रिटायर बांध के क्षतिग्रस्त होने से मुख्य पीपी तटबंध पर दबाव बढ़ने की जानकारी है। नौतन-गोपालगंज पथ पर भी पानी पहुंचा है।
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'तिरपाल पर बच्चे-बुजुर्ग,रात में सांप-बिच्छू का डर':पूर्वी चंपारण में 3 दिन से बांध पर जिंदगी, परिवार बोले-पूरी रात जागकर सामान का करते हैं निगरानी
